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राजशाही मानसिकता से पारित आदेश असांविधानिक: हाईकोर्ट

Wed, 04 Feb 2026 07:14 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 04 Feb 2026 07:14 PM IST
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Orders passed with a monarchical mindset are unconstitutional: High Court
-नीलामी को बिना किसी कारण, नोटिस या सुनवाई का मौका दिए अस्वीकार करना मनमाना रुख
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-कार्रवाई स्वतंत्रता-पूर्व की राजशाही परंपराओं का अवशेष करार, पंजाब की द्वितीय अपील खारिज
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पुष्टि-प्राप्त सार्वजनिक नीलामी को बिना कारण बताए बिना नोटिस और बिना सुनवाई का अवसर दिए मात्र एक शब्द ‘अस्वीकार’ लिखकर रद्द करने को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मनमाना और पूरी तरह असंवैधानिक करार दिया है। अदालत ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का स्पष्ट उल्लंघन बताते हुए स्वतंत्रता-पूर्व की राजशाही परंपराओं का अवशेष कहा और पंजाब सरकार की नियमित द्वितीय अपील खारिज कर दी।
जस्टिस विरिंदर अग्रवाल ने कहा कि लोकतांत्रिक भारत में कोई भी सार्वजनिक प्राधिकरण निरंकुश विवेकाधिकार के आधार पर निर्णय नहीं ले सकता। प्रत्येक आदेश में कारण दर्ज करना और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करना अनिवार्य है।
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मामला मुक्तसर के मोहल्ला वाटर वर्क्स स्थित 621 वर्ग गज छह वर्ग फीट भूमि की सार्वजनिक नीलामी से जुड़ा है। यह नीलामी 6 मार्च 1987 को हुई, जिसमें राजविंदर सिंह ने 13,500 रुपये की सर्वोच्च बोली लगाई और नियमानुसार मौके पर एक-चौथाई राशि जमा की। इसके बाद 9 नवंबर 1987 को सक्षम प्राधिकारी सेल्स कमिश्नर, मुक्तसर ने नीलामी को विधिवत मंजूरी दे दी।
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इसके बावजूद 24 मई 1988 को उसी प्राधिकारी ने बिना कोई कारण बताए, बिना नोटिस जारी किए और बिना सुनवाई का अवसर दिए नीलामी को केवल ‘अस्वीकार’ लिखकर रद्द कर दिया। इस आदेश को चुनौती देते हुए वादी ने अदालत का रुख किया। ट्रायल कोर्ट ने कार्रवाई को गैर-वाजिब और असंवैधानिक मानते हुए वादी के पक्ष में डिक्री पारित की। इसके बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, फरीदकोट ने भी राज्य की अपील खारिज कर दी।


खरीदार को विधिसम्मत नागरिक अधिकार प्राप्त
मामले में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि नीलामी की पुष्टि के बाद खरीदार को विधिसम्मत नागरिक अधिकार प्राप्त हो जाते हैं, जिन्हें बिना कानूनी प्रक्रिया छीना नहीं जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ‘अस्वीकार’ जैसा गैर-वक्तव्य आदेश न तो कानूनन टिकाऊ है और न ही संवैधानिक कसौटी पर खरा उतरता है। सभी पहलुओं पर विचार के बाद हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार की अपील को सिरे से खारिज कर दिया।
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