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कर्मी की विधवा से 1.11 करोड़ की रिकवरी, आदेश ने हमको झकझोर दिया: हाईकोर्ट
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-कॉनफेड ने मनमानी की सभी सीमाएं लांघ दी, हाईकोर्ट लगाया 5 लाख रुपये जुर्माना
-रिकवरी का आदेश हाईकोर्ट ने किया रद्द, याची के पति के रिटायरमेंट लाभ जारी करने का आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। रिटायर कर्मचारी की विधवा को 1 करोड़ 11 लाख रुपये रिकवरी के नोटिस पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि इस आदेश ने हमको झकझोर दिया है। इस आदेश ने अवैधता, मानमानी और विकृति की सभी सीमाएं लांघ दी हैं। हाईकोर्ट ने इस रिकवरी नोटिस सहित याची के पति के खिलाफ सभी कार्रवाई रद्द करने, उसके पति के रिटायरमेंट लाभ जारी करने का कॉनफेड को आदेश दिया है। साथ ही याची को प्रताड़ित करने पर कॉनफेड पर 5 लाख रुपये जुर्माना लगाते हुए यह राशि याची को सौंपने का आदेश दिया है। याचिका दाखिल करते हुए फतेहाबाद निवासी अंजना ने हाईकोर्ट को बताया कि उसके पति 1980 से कॉनफेड में अकाउंटेंट के तौर पर काम कर रहे थे। 2012 और 2013 में उनके खिलाफ चार्जशीट हुई थी लेकिन इसमें कोई जांच अधिकारी नहीं नियुक्त किया गया। इसके बाद 2015 में वह रिटायर हो गए और 2016 में एक और चार्जशीट कर दी गई तो 2012 के अनाज स्टॉक से जुड़ी थी। इसके चलते उसके पति के रिटायरमेंट लाभ रोक दिए गए। रिटायरमेंट के बाद याची के पति बीमार हो गए और फोर्टिस हॉस्पिटल में इलाज चला। 25 लाख इलाज में खर्च हुआ लेकिन 2017 में उनकी मौत हो गई। इसके बाद याची ने पति के रिटायरमेंट लाभ के लिए कॉनफेड के एमडी से कई बार गुहार लगाई। जब कोई लाभ नहीं हुआ तो हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई और हाईकोर्ट ने मांग पर निर्णय लेने का कॉनफेड को आदेश दिया। इसके बाद 2020 में याची को 1 करोड़ 11 लाख रुपये की रिकवरी का नोटिस जारी कर दिया गया। कहा गया कि रिटायरमेंट लाभ से कटौती के बाद जो राशि बचेगी उसकी वसूली सिविल सूट के माध्यम से कर्मी की विधवा से की जाएगी। इसी को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
हाईकोर्ट ने कॉनफेड को फटकार लगाते हुए कहा कि एक अकाउंटेंट का स्टॉक की गुणवत्ता से क्या लेना देना, उसे कैसे इस मामले में रिकवरी का हिस्सा बनाया गया। बिना जांच पूरी हुए कैसे यह रिकवरी की राशि तय की गई और क्यों नहीं यह नोटिस कर्मी के जिंदा रहते दिया गया। यह राशि सेवानिवृत्ति लाभों से वसूलने का निर्देश देना और शेष राशि के लिए कर्मी की विधवा के खिलाफ सिविल मुकदमा दायर करने का निर्देश देते हुए अवैधता, विकृति और मनमानी की सभी सीमाएं पार कर दीं।
बॉक्स
एक आईएएस अधिकारी ने यह आदेश जारी किया हम हैरान
हाईकोर्ट ने आदेश जारी करने वाले अधिकारी के बारे में पूछा तो बाया गया कि वह एक आईएएस अधिकारी थे जो अब रिटायर हो चुके हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि एक आईएएस अधिकारी द्वारा पारित इस तरह का आदेश प्रथम दृष्टया न्यायालय की अंतरात्मा को झकझोर देने वाला और अत्यधिक निंदनीय है। हाईकोर्ट ने जुर्माने की राशि तत्कालीन एमडी से वसूलने की कॉनफेड को छूट दी है।
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-रिकवरी का आदेश हाईकोर्ट ने किया रद्द, याची के पति के रिटायरमेंट लाभ जारी करने का आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। रिटायर कर्मचारी की विधवा को 1 करोड़ 11 लाख रुपये रिकवरी के नोटिस पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि इस आदेश ने हमको झकझोर दिया है। इस आदेश ने अवैधता, मानमानी और विकृति की सभी सीमाएं लांघ दी हैं। हाईकोर्ट ने इस रिकवरी नोटिस सहित याची के पति के खिलाफ सभी कार्रवाई रद्द करने, उसके पति के रिटायरमेंट लाभ जारी करने का कॉनफेड को आदेश दिया है। साथ ही याची को प्रताड़ित करने पर कॉनफेड पर 5 लाख रुपये जुर्माना लगाते हुए यह राशि याची को सौंपने का आदेश दिया है। याचिका दाखिल करते हुए फतेहाबाद निवासी अंजना ने हाईकोर्ट को बताया कि उसके पति 1980 से कॉनफेड में अकाउंटेंट के तौर पर काम कर रहे थे। 2012 और 2013 में उनके खिलाफ चार्जशीट हुई थी लेकिन इसमें कोई जांच अधिकारी नहीं नियुक्त किया गया। इसके बाद 2015 में वह रिटायर हो गए और 2016 में एक और चार्जशीट कर दी गई तो 2012 के अनाज स्टॉक से जुड़ी थी। इसके चलते उसके पति के रिटायरमेंट लाभ रोक दिए गए। रिटायरमेंट के बाद याची के पति बीमार हो गए और फोर्टिस हॉस्पिटल में इलाज चला। 25 लाख इलाज में खर्च हुआ लेकिन 2017 में उनकी मौत हो गई। इसके बाद याची ने पति के रिटायरमेंट लाभ के लिए कॉनफेड के एमडी से कई बार गुहार लगाई। जब कोई लाभ नहीं हुआ तो हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई और हाईकोर्ट ने मांग पर निर्णय लेने का कॉनफेड को आदेश दिया। इसके बाद 2020 में याची को 1 करोड़ 11 लाख रुपये की रिकवरी का नोटिस जारी कर दिया गया। कहा गया कि रिटायरमेंट लाभ से कटौती के बाद जो राशि बचेगी उसकी वसूली सिविल सूट के माध्यम से कर्मी की विधवा से की जाएगी। इसी को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
हाईकोर्ट ने कॉनफेड को फटकार लगाते हुए कहा कि एक अकाउंटेंट का स्टॉक की गुणवत्ता से क्या लेना देना, उसे कैसे इस मामले में रिकवरी का हिस्सा बनाया गया। बिना जांच पूरी हुए कैसे यह रिकवरी की राशि तय की गई और क्यों नहीं यह नोटिस कर्मी के जिंदा रहते दिया गया। यह राशि सेवानिवृत्ति लाभों से वसूलने का निर्देश देना और शेष राशि के लिए कर्मी की विधवा के खिलाफ सिविल मुकदमा दायर करने का निर्देश देते हुए अवैधता, विकृति और मनमानी की सभी सीमाएं पार कर दीं।
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एक आईएएस अधिकारी ने यह आदेश जारी किया हम हैरान
हाईकोर्ट ने आदेश जारी करने वाले अधिकारी के बारे में पूछा तो बाया गया कि वह एक आईएएस अधिकारी थे जो अब रिटायर हो चुके हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि एक आईएएस अधिकारी द्वारा पारित इस तरह का आदेश प्रथम दृष्टया न्यायालय की अंतरात्मा को झकझोर देने वाला और अत्यधिक निंदनीय है। हाईकोर्ट ने जुर्माने की राशि तत्कालीन एमडी से वसूलने की कॉनफेड को छूट दी है।
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