फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Opposition party raised questions on Shiromani Akali Dal

हरसिमरत के इस्तीफे के बाद भी सवालों में शिअद, किसानी मुद्दों पर लौटने में कर दी बहुत देर

Fri, 18 Sep 2020 04:10 AM IST
ajay kumar हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 18 Sep 2020 04:10 AM IST
विज्ञापन
Opposition party raised questions on Shiromani Akali Dal
हरसिमरत कौर बादल - फोटो : फाइल फोटो

केंद्र में एनडीए की सहयोगी शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने कृषि अध्यादेशों के विरोध स्वरूप अपने हिस्से का एकमात्र केंद्रीय मंत्री पद त्यागकर गुरुवार को पंजाब के किसानों के बीच अपनी खिसकती जमीन तलाशने की कोशिश की है। शिअद प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने अपनी पत्नी व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल के इस्तीफे को पार्टी द्वारा किसानों के लिए एक बड़े बलिदान के रूप में पेश किया है लेकिन अब तक एनडीए का हिस्सा बने रहने को कारण शिअद पर कांग्रेस लगातार हमलावर है। फिलहाल केंद्रीय मंत्री का पद त्यागने के कदम को अकाली दल की पंजाब की किसानी में वापसी की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। 

विज्ञापन


तीन कृषि बिलों पर अब तक सहयोगी भाजपा की ही बोली बोलती रही 
शिअद पहली बार बिलों के खिलाफ मुखर होकर खुद को पंजाब के किसानों का सच्चा हितैषी साबित करने की कोशिश में जुट गई है। दूसरी ओर, सूबे में कांग्रेस इस मुद्दे पर किसानों और किसान संगठनों का सहयोग हासिल करने के मामले में अकाली दल को काफी पीछे छोड़ चुकी है। शिअद के एनडीए से जुड़े रहने के कारण कांग्रेस राज्य के किसानों के बीच शिअद को किसान विरोधी और सत्ता की लालची पार्टी के रूप में प्रचारित करने में कामयाब रही है। यही कारण भी है कि इन दिनों राज्य भर में कृषि बिलों के खिलाफ किसान संगठनों के विरोध प्रदर्शनों में मोदी सरकार के साथ-साथ अकाली दल की जमकर आलोचना हो रही है।
विज्ञापन


दरअसल, पूरे देश का पेट भरने वाले प्रांत के नाम से जाने जाने वाले पंजाब में कृषि और किसान ऐसे अहम मुद्दे हैं कि कोई भी राजनीतिक दल इन्हें अनदेखा कर अपना वजूद कायम रख पाने की कल्पना भी नहीं कर सकता है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में किसानों के कर्ज माफी के वादे ने कांग्रेस को सत्ता दिलाई जबकि उससे पहले किसानों को मुफ्त बिजली के वादे की बदौलत अकाली दल (बादल) सत्ता पर काबिज होता रहा है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


किसानों की बढ़ती आत्महत्याओं के बीच कांग्रेस का कर्ज माफी का वादा अकाली दल की दस साल पुरानी सरकार को पदच्युत करने में कारगर रहा था। इसमें संदेह नहीं कि बीते कुछ ही महीनों में कैप्टन अमरिंदर सिंह और प्रदेश कांग्रेस राज्य के किसानों को यह समझा चुके हैं कि अकाली दल कृषि बिलों का समर्थन करके उन्हें बर्बाद करने की तैयारी कर चुका है। ऐसे में अकाली दल का इस्तीफे की राजनीति भरा पहला कदम उसे पंजाब में कितना मददगार देगा, यह अगले दो-तीन दिन में ही सामने आ जाएगा क्योंकि गुरुवार को अकाली दल इस सवाल के घेरे में है कि उसने एनडीए से नाता क्यों नहीं तोड़ा?

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed