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Hindi News ›   Chandigarh ›   Operation Blue Star, No Clue about Missing Books and Documents related to Sikh Community

ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान गुम गए थे सिख धर्म से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज, आज तक नहीं लगा सुराग

Wed, 05 Jun 2019 12:27 PM IST
खुशबू गोयल अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब) Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 05 Jun 2019 12:27 PM IST
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Operation Blue Star, No Clue about Missing Books and Documents related to Sikh Community
लिखित दस्तावेज - फोटो : फाइल फोटो
‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ के बाद सिख धर्म से जुड़ी कई ऐतिहासिक धार्मिक पुस्तकें और गुरुकाल की धरोहर भी गुम हो गई थीं। आज तक उनका कोई भी सुराग नहीं लग पाया है। ऑपरेशन ब्लू स्टार को हुए 35 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन सिख धर्म व इतिहास का यह खजाना कहां व किसके पास है, इसका सच जानने के लिए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा किए गए सभी प्रयास विफल हो चुके हैं।
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1984 से लेकर अब तक जितनी भी सरकारों का गठन केंद्र में हुआ, एसजीपीसी ने सभी से ‘सिख रेफरेंस लाइब्रेरी’ में इस खोज को लौटाने की गुहार लगाई, लेकिन किसी भी सरकार ने इस पर गंभीरता नहीं दिखाई। एसजीपीसी ने श्री हरमंदिर साहिब में माथा टेकने के लिए आने वाले प्रधानमंत्री देवगौड़ा, इंद्रकुमार गुजराल, चंद्रशेखर, अटल बिहारी वाजपेयी को ज्ञापन देकर इस खजाने को लौटने की गुहार लगाई। किसी भी प्रधानमंत्री ने इस खजाने के बारे में एसजीपीसी को कोई ठोस जानकारी नहीं दी।
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एसजीपीसी ने इस खजाने के बारे में जानकारी लेने के लिए राष्ट्रपतियों को भी पत्र लिखे। पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिज को भी ज्ञापन दिया था, लेकिन कोई नतीजा सामने नहीं आया। लगभग 15 साल पहले जब एसजीपीसी के सचिव दलमेघ सिंह थे, उस दौरान केंद्र ने कुछ ट्रंक भेजे थे। जब इन ट्रंकों को खोला गया था, तब उनमें से एक-दो पुराने पिस्टल व कपडे़ निकले थे। ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान श्री दरबार साहिब परिसर में स्थित कई इमारतें आग की लपेट में आ गई थीं।
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सिख रेफरेंस का कुछ हिस्सा भी आग की लपेट में आ गया था। तब चर्चा थी कि भारतीय सेना सिख रेफरेंस में पड़े ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के खजाने को अपने साथ ट्रंकों में भर कर ले गई है। इसको आधार बनाकर एसजीपीसी देश के रक्षा मंत्रियों से भारतीय सेना के पास पड़े खजाने को लौटने की मांग करती रही है। कई साल के बाद सेना ने एसजीपीसी को भेजे एक श्वेतपत्र में कहा था कि ऑपरेशन के दौरान लाइब्रेरी जलकर खाक हो गई थी।

खजाने को ट्रंकों में भर ले गई थी भारतीय सेना

6 जून तक लाइब्रेरी सुरक्षित थी। ऐसे कोई भी निशान नहीं थे, जिससे अंदेशा हो कि लाइब्रेरी जल गई है। इस लाइब्रेरी में सिख इतिहास, धर्म और सभ्याचार का बहुमूल्य खजाना था। भारतीय सेना इस खजाने को ट्रकों में भर कर ले गई थी। भारतीय सेना ने इन ट्रंकों को यूथ हॉस्टल में रखा था। बाद में यह ट्रंक कहां गए इसकी कोई भी जानकारी नहीं मिल पाई।
- ज्ञानी जोगिंदर सिंह वेदांती, पूर्व जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब और श्री दरबार साहिब के तत्कालीन अरदासिये

जानबूझ कर नष्ट कर दिया गया
सिखों की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर को खत्म करने के लिए इस खजाने का  जानबूझ कर नुकसान किया गया। इस धरोहर को जला दिया गया। उस समय के लोगों के अनुसार सेना यहां से कई ट्रंक भरकर खजाना ले गई थी।
- डॉ. रूप सिंह, चीफ सेक्रेटरी, एसजीपीसी

देश की आजादी के एक वर्ष पहले हुई थी सिख रेफरेंस लाइब्रेरी की स्थापना
एसजीपीसी ने देश की आजादी के एक साल पहले अक्तूबर 1946 में एक प्रस्ताव पारित कर श्री दरबार साहिब परिसर में महाकवि संतोख सिंह के नाम पर ‘सिख रेफरेंस लाइब्रेरी’ की स्थापना की थी। एसजीपीसी  के तत्कालीन अध्यक्ष सिख रेफरेंस लाइब्रेरी के बारे में तब से विचार कर रहे थे जब खालसा कॉलेज में 1945 में सिख इतिहासकार सोसाइटी की बैठक का आयोजन हुआ था। इस बैठक में सेंट्रल सिख लाइब्रेरी स्थापित करने का निर्णय लिया गया था, बाद में एसजीपीसी ने इसे सिख रेफरेंस लाइब्रेरी का नाम दिया।
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