{"_id":"5d8ff7fca9e88de0aae810b7032e2545","slug":"operation-blue-star-issue-4","type":"story","status":"publish","title_hn":"ऑपरेशन ब्लू स्टार पर दो कांग्रेसी नेता हुए आमने-सामने","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ऑपरेशन ब्लू स्टार पर दो कांग्रेसी नेता हुए आमने-सामने
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 21 Feb 2014 03:39 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ऑपरेशन ब्लू स्टार पर चल रहे आरोप-प्रत्यारोप के दौरान पीपीसीसी महासचिव राजनबीर सिंह और प्रवक्ता सुखपाल सिंह खैहरा में ठन गई है।
पंजाब के पूर्व वित्त मंत्री स्व. बलवंत सिंह के पुत्र राजनबीर ने ऑपरेशन ब्लू स्टार से संबंधित एक पत्र के संबंध में खैहरा के खिलाफ मानहानि का केस करने की चेतावनी दी है। वहीं, खैहरा ने कहा है कि इस पत्र को लेकर उन्होंने जो भी बातें बलवंत सिंह के खिलाफ कही हैं, वह उन पर पूरी तरह से कायम हैं।
राजनबीर ने यहां पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि ऑपरेशन ब्लू स्टार से संबंधित उनके पिता के हस्ताक्षरों वाला तत्कालीन प्रधानमंत्री को संबोधित जो पत्र खैहरा ने कुछ दिन पहले जारी किया, वह फर्जी है। उस पर उनके पिता के हस्ताक्षर हैं ही नहीं।
खैरा ने यह इस पत्र को जारी करते हुए कहा था कि अकाली नेताओं, जिनमें राजनबीर के पिता भी शामिल थे, को ऑपरेशन ब्लू स्टार का पहले से पता था। इस पर ही राजनबीर ने ऐतराज उठाया है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि यदि खैहरा ने इस संबंध में माफी नहीं मांगी, तो वह उनके खिलाफ मानहानि का केस करेंगे। मसले को पार्टी स्तर पर भी उठाएंगे।
उन्होंने पिता के हस्ताक्षर वाले पासपोर्ट की कॉपी जारी करते हुए कहा कि खैहरा की ओर से जारी पत्र के साइन अलग हैं। यह पत्र नौ जून 1984 को लिखा बताया जा रहा है, जबकि वह तथा उनके पिता बलवंत सिंह 10 जून को विदेश से लौटे थे।
उनके पिता ने अलगाववादियों से टक्कर ली और शिरोमणि अकाली दल के पूर्व अध्यक्ष संत हरचंद सिंह लौंगोवाल की अगुवाई में शांति की बहाली के लिए समझौते का ड्राफ्ट तैयार करवाया। खैहरा पता नहीं किस उद्देश्य से यह पत्र लोगों के बीच लेकर आए हैं। संबंधित पत्र और इसके जैसे कई अन्य फर्जी पत्रों को शिरोमणि अकाली दल 1989 में खारिज कर चुका है।
इस बारे में सुखपाल सिंह खैहरा ने बयान जारी करते हुए कहा है कि वह अपने हर शब्द पर कायम हैं। उन्होंने कहा कि राजनबीर को उनके खिलाफ केस करने से पहले उस किताब के लेखक और प्रकाशक पर केस करना चाहिए, जिसमें बलवंत सिंह की ओर से इंदिरा गांधी को लिखा गया यह पत्र छपा है।
खैहरा ने राजनबीर पर उल्टा आरोप लगाया कि वह ऑपरेशन ब्लू स्टार में अकालियों की शमूलियत को नकारने के लिए अकाली नेताओ के हाथों में खेल रहे हैं।
बलवंत सिंह केंद्र सरकार के एजेंट के रूप में कार्य करते रहे हैं और ऑपरेशन ब्लैक थंडर के तहत 1996 में श्री हरिमंदर साहिब परिसर में पुलिस भेजने से उनकी भूमिका प्रमाणित हो गई। राजनबीर पहले यह तय करें कि वह अकाली हैं या कांग्रेसी, उसके बाद ही उन पर केस करने की सोचें।
विज्ञापन
पंजाब के पूर्व वित्त मंत्री स्व. बलवंत सिंह के पुत्र राजनबीर ने ऑपरेशन ब्लू स्टार से संबंधित एक पत्र के संबंध में खैहरा के खिलाफ मानहानि का केस करने की चेतावनी दी है। वहीं, खैहरा ने कहा है कि इस पत्र को लेकर उन्होंने जो भी बातें बलवंत सिंह के खिलाफ कही हैं, वह उन पर पूरी तरह से कायम हैं।
राजनबीर ने यहां पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि ऑपरेशन ब्लू स्टार से संबंधित उनके पिता के हस्ताक्षरों वाला तत्कालीन प्रधानमंत्री को संबोधित जो पत्र खैहरा ने कुछ दिन पहले जारी किया, वह फर्जी है। उस पर उनके पिता के हस्ताक्षर हैं ही नहीं।
विज्ञापन
खैरा ने यह इस पत्र को जारी करते हुए कहा था कि अकाली नेताओं, जिनमें राजनबीर के पिता भी शामिल थे, को ऑपरेशन ब्लू स्टार का पहले से पता था। इस पर ही राजनबीर ने ऐतराज उठाया है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि यदि खैहरा ने इस संबंध में माफी नहीं मांगी, तो वह उनके खिलाफ मानहानि का केस करेंगे। मसले को पार्टी स्तर पर भी उठाएंगे।
उन्होंने पिता के हस्ताक्षर वाले पासपोर्ट की कॉपी जारी करते हुए कहा कि खैहरा की ओर से जारी पत्र के साइन अलग हैं। यह पत्र नौ जून 1984 को लिखा बताया जा रहा है, जबकि वह तथा उनके पिता बलवंत सिंह 10 जून को विदेश से लौटे थे।
उनके पिता ने अलगाववादियों से टक्कर ली और शिरोमणि अकाली दल के पूर्व अध्यक्ष संत हरचंद सिंह लौंगोवाल की अगुवाई में शांति की बहाली के लिए समझौते का ड्राफ्ट तैयार करवाया। खैहरा पता नहीं किस उद्देश्य से यह पत्र लोगों के बीच लेकर आए हैं। संबंधित पत्र और इसके जैसे कई अन्य फर्जी पत्रों को शिरोमणि अकाली दल 1989 में खारिज कर चुका है।
इस बारे में सुखपाल सिंह खैहरा ने बयान जारी करते हुए कहा है कि वह अपने हर शब्द पर कायम हैं। उन्होंने कहा कि राजनबीर को उनके खिलाफ केस करने से पहले उस किताब के लेखक और प्रकाशक पर केस करना चाहिए, जिसमें बलवंत सिंह की ओर से इंदिरा गांधी को लिखा गया यह पत्र छपा है।
खैहरा ने राजनबीर पर उल्टा आरोप लगाया कि वह ऑपरेशन ब्लू स्टार में अकालियों की शमूलियत को नकारने के लिए अकाली नेताओ के हाथों में खेल रहे हैं।
बलवंत सिंह केंद्र सरकार के एजेंट के रूप में कार्य करते रहे हैं और ऑपरेशन ब्लैक थंडर के तहत 1996 में श्री हरिमंदर साहिब परिसर में पुलिस भेजने से उनकी भूमिका प्रमाणित हो गई। राजनबीर पहले यह तय करें कि वह अकाली हैं या कांग्रेसी, उसके बाद ही उन पर केस करने की सोचें।