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#विसराः पंजाब में एक ही लैब, दो साल में आती है विसरा जांच की रिपोर्ट, तो न्याय में भी देरी होती
Tue, 03 Dec 2019 12:53 PM IST
खुशबू गोयल
नवनीत छिब्बर, अमर उजाला, मोहाली
नवनीत छिब्बर, अमर उजाला, मोहाली
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 03 Dec 2019 12:53 PM IST
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संदिग्ध हालात में हुई किसी मौत का राज खोलने में विसरा की केमिकल रिपोर्ट अहम तथ्य साबित होती है। बात पंजाब की करें तो यहां जांच में विसरा रिपोर्ट एक कमजोर पहलु है। पंजाब में एकमात्र स्टेट केमिकल टेस्टिंग लैबोरेटरी खरड़ में है। जहां लगभग 2 साल से विसरा की टेस्टिंग रिपोर्ट पेंडिंग चल रही हैं। इसका असर सीधा-सीधा पीड़ितों को न्याय मिलने पर पड़ता है।
विसरा की टेस्टिंग रिपोर्ट संदिग्ध हालात में हुई मौत का राज खोलने में अहम साबित होती है। विसरा जांच में पॉइजन, ड्रग्स व अल्कोहल की टाइप, क्वालिटी व मौत के लिए उसकी अहमियत साबित हो सकती है। पंजाब में विडंबना यह है कि यहां विसरा जांच की आधुनिक तकनीक नहीं है, उस पर राज्य में एकमात्र केमिकल लैबोरेटरी है।
उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो लैब में स्टाफ की भी कमी है। इन सब कमियों के चलते रिपोर्ट में देरी हो रही है। विसरा टेस्टिंग रिपोर्ट समय पर न मिलने के कारण कई मामलों में पुलिस का चालान कमजोर पड़ जाता है। देरी से रिपोर्ट आने पर अदालत में बचाव पक्ष एतराज जताता है। कई मामलों में विसरा रिपोर्ट देरी से आने के कारण न्यायिक प्रक्रिया काफी लंबी खिंच जाती है।
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विसरा की टेस्टिंग रिपोर्ट संदिग्ध हालात में हुई मौत का राज खोलने में अहम साबित होती है। विसरा जांच में पॉइजन, ड्रग्स व अल्कोहल की टाइप, क्वालिटी व मौत के लिए उसकी अहमियत साबित हो सकती है। पंजाब में विडंबना यह है कि यहां विसरा जांच की आधुनिक तकनीक नहीं है, उस पर राज्य में एकमात्र केमिकल लैबोरेटरी है।
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उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो लैब में स्टाफ की भी कमी है। इन सब कमियों के चलते रिपोर्ट में देरी हो रही है। विसरा टेस्टिंग रिपोर्ट समय पर न मिलने के कारण कई मामलों में पुलिस का चालान कमजोर पड़ जाता है। देरी से रिपोर्ट आने पर अदालत में बचाव पक्ष एतराज जताता है। कई मामलों में विसरा रिपोर्ट देरी से आने के कारण न्यायिक प्रक्रिया काफी लंबी खिंच जाती है।
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विसरा को पोस्टमार्टम के 24 घंटे के भीतर लैब भेजना चाहिए
संदिग्ध हालत में हुई मौत के मामलों की तह तक पहुंचने के लिए विसरा जांच के लिए भेजा जाता है। विसरा में पोस्टमार्टम के दौरान शव से किडनी, लीवर, आंत, छोटी आंत, दिल से खून का सैंपल जांच के लिए भेजा जाता है। इसे सुरक्षित रखने के लिए सैच्यूरेट सॉल्यूशन ऑफ सॉल्ट में विसरा के सैंपल को रखा जाता है।
विसरा को पोस्टमार्टम के 24 घंटे के भीतर टेस्टिंग के लिए लैब में भेज दिया जाना चाहिए। जांच के लिए विसरा का सुरक्षित रहना उसमें मौजूद पॉइजन, ड्रग्स व अल्कोहल की क्वालिटी पर निर्भर करता है। पुलिस को आपराधिक मामलों में 90 दिन के भीतर अदालत में चालान पेश करना होता है। मजबूत चालान पेश करने के लिए पुलिस को विसरा रिपोर्ट की जरूरत होती है।
विसरा रिपोर्ट समय पर न आने पर पुलिस का चालान कमजोर हो सकता है।
विसरा को पोस्टमार्टम के 24 घंटे के भीतर टेस्टिंग के लिए लैब में भेज दिया जाना चाहिए। जांच के लिए विसरा का सुरक्षित रहना उसमें मौजूद पॉइजन, ड्रग्स व अल्कोहल की क्वालिटी पर निर्भर करता है। पुलिस को आपराधिक मामलों में 90 दिन के भीतर अदालत में चालान पेश करना होता है। मजबूत चालान पेश करने के लिए पुलिस को विसरा रिपोर्ट की जरूरत होती है।
विसरा रिपोर्ट समय पर न आने पर पुलिस का चालान कमजोर हो सकता है।
पंजाब में आधुनिक सुविधा नहीं
पंजाब में विसरा की केमिकल जांच की आधुनिक सुविधा नहीं है। पंजाब में एकमात्र केमिकल टेस्टिंग लैब है। वहां भी टाइप ऑफ पॉइजन की जांच की सुविधा है। पंजाब में क्वालिटी ऑफ पॉइजन को जांचने की सुविधा नहीं है। इसके चलते पुलिस मजबूत केस तैयार नहीं कर पाती।
पंजाब में मेडिकल पार्ट ऑफ क्रिमिनल इंवेस्टिगेशन का पक्ष काफी कमजोर है। पूरे सूबे का वर्कलोड महज एकमात्र केमिकल टेस्टिंग लैब पर है। हमने दो साल पहले सूबे में तीन केमिकल लैब अमृतसर, पटियाला और फरीदकोट में बनाने की मांग उठाई थी, लेकिन आज तक इस पर कोई कदम नहीं उठाया गया। कई मामलों में विसरा की जांच में होने वाली देरी न्यायिक प्रक्रिया को भी लंबा कर देती है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
- डॉ. डीएस भुल्लर, प्रेसिडेंट, पंजाब अकादमी ऑफ फॉरेंसिक मेडिसन एंड टॉक्सिलॉजी
पंजाब में मेडिकल पार्ट ऑफ क्रिमिनल इंवेस्टिगेशन का पक्ष काफी कमजोर है। पूरे सूबे का वर्कलोड महज एकमात्र केमिकल टेस्टिंग लैब पर है। हमने दो साल पहले सूबे में तीन केमिकल लैब अमृतसर, पटियाला और फरीदकोट में बनाने की मांग उठाई थी, लेकिन आज तक इस पर कोई कदम नहीं उठाया गया। कई मामलों में विसरा की जांच में होने वाली देरी न्यायिक प्रक्रिया को भी लंबा कर देती है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
- डॉ. डीएस भुल्लर, प्रेसिडेंट, पंजाब अकादमी ऑफ फॉरेंसिक मेडिसन एंड टॉक्सिलॉजी