{"_id":"60f4971b8ebc3e6d8d5e001c","slug":"online-education-is-effective-only-when-students-also-want-to-study-chandigarh-news-pkl420563760","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘ऑनलाइन शिक्षा तभी प्रभावी, जब छात्र भी पढ़ने की इच्छा रखें’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘ऑनलाइन शिक्षा तभी प्रभावी, जब छात्र भी पढ़ने की इच्छा रखें’
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़। कोरोना के कारण चल रही ऑनलाइन कक्षाओं को तभी प्रभावी बनाया जा सकता है, जब छात्र भी पढ़ने की इच्छा रखें। मॉनीटरिंग सिस्टम के लिए कैमरा चालू रखना और रिकॉडिंग करना जरूरी है। यह बात विशेषज्ञों ने कही।
विशेषज्ञों का तर्क है कि यदि ऐसा होता है तो इसमें समय की बचत है। इसके जरिए विद्यार्थी दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर सकते हैं। विशेषज्ञों की राय है कि विदेशों की तर्ज पर लापरवाही बरने वालों पर कार्रवाई का प्रावधान भी करना होगा। जब छात्रों को उसका डर होगा, तो वे कक्षाएं जरूर लगाएंगे।
पीयू के इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर हरीश कुमार का कहना है कि जब कंप्यूटर भारत में आया था तो उस दौरान भी तर्क दिए जा रहे थे, कि इससे नौकरियां चली जाएंगी, लेकिन हुआ विपरीत। आज कंप्यूटर के क्षेत्र में लाखों लोगों को रोजगार मिला है। उसी तरह ऑनलाइन कक्षा के भी फायदे ही फायदे हैं। इसके लिए छात्रों को अपनी पढ़ाई के प्रति इच्छा जागृत करनी होगी। वरिष्ठ शिक्षक डॉ. अमरदीप का कहना है कि मॉनीटरिंग के लिए ऑनलाइन कक्षा में कैमरा चालू रखना जरूरी है। छात्र जैसे ही कक्षा से दूर जाने की कोशिश करेंगे तो वे दिखेंगे।
विज्ञापन
प्रयोग के लिए विज्ञान, इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों के लिए तय हो सकते हैं दिन
पीयू के कुछ वरिष्ठ प्रोफेसरों का मानना है कि कक्षाएं यदि ऑनलाइन चल रही हैं तो प्रयोग के लिए दिन तय किए जाने चाहिएं। विज्ञान, इंजीनियरिंग के छात्रों को रोस्टर के मुताबिक प्रयोगशालाओं में बुलाया जा सकता है। इससे एक साथ भीड़ भी नहीं बढ़ेगी। जानकारों का कहना है कि ये कार्य कभी भी शिक्षण संस्थान कर सकते हैं।
पाठ्यक्रम नहीं होना चाहिए कम
कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि जल्द पाठ्यक्रम पूरा कराने के चक्कर में कुछ जगहों पर कोर्स कम करने की सूचना मिल रही है, जो गलत है। भले ही देर हो, लेकिन शिक्षक पूरा कोर्स पढ़ाएं अन्यथा उसका छात्रों के भविष्य पर प्रभाव पड़ेगा।
विज्ञापन
विशेषज्ञों का तर्क है कि यदि ऐसा होता है तो इसमें समय की बचत है। इसके जरिए विद्यार्थी दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर सकते हैं। विशेषज्ञों की राय है कि विदेशों की तर्ज पर लापरवाही बरने वालों पर कार्रवाई का प्रावधान भी करना होगा। जब छात्रों को उसका डर होगा, तो वे कक्षाएं जरूर लगाएंगे।
विज्ञापन
पीयू के इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर हरीश कुमार का कहना है कि जब कंप्यूटर भारत में आया था तो उस दौरान भी तर्क दिए जा रहे थे, कि इससे नौकरियां चली जाएंगी, लेकिन हुआ विपरीत। आज कंप्यूटर के क्षेत्र में लाखों लोगों को रोजगार मिला है। उसी तरह ऑनलाइन कक्षा के भी फायदे ही फायदे हैं। इसके लिए छात्रों को अपनी पढ़ाई के प्रति इच्छा जागृत करनी होगी। वरिष्ठ शिक्षक डॉ. अमरदीप का कहना है कि मॉनीटरिंग के लिए ऑनलाइन कक्षा में कैमरा चालू रखना जरूरी है। छात्र जैसे ही कक्षा से दूर जाने की कोशिश करेंगे तो वे दिखेंगे।
विज्ञापन
प्रयोग के लिए विज्ञान, इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों के लिए तय हो सकते हैं दिन
पीयू के कुछ वरिष्ठ प्रोफेसरों का मानना है कि कक्षाएं यदि ऑनलाइन चल रही हैं तो प्रयोग के लिए दिन तय किए जाने चाहिएं। विज्ञान, इंजीनियरिंग के छात्रों को रोस्टर के मुताबिक प्रयोगशालाओं में बुलाया जा सकता है। इससे एक साथ भीड़ भी नहीं बढ़ेगी। जानकारों का कहना है कि ये कार्य कभी भी शिक्षण संस्थान कर सकते हैं।
पाठ्यक्रम नहीं होना चाहिए कम
कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि जल्द पाठ्यक्रम पूरा कराने के चक्कर में कुछ जगहों पर कोर्स कम करने की सूचना मिल रही है, जो गलत है। भले ही देर हो, लेकिन शिक्षक पूरा कोर्स पढ़ाएं अन्यथा उसका छात्रों के भविष्य पर प्रभाव पड़ेगा।