किसान आंदोलन की समाप्ति: अपनी खुशहाली की 'एमएसपी' के लिए किसानों ने सरकार से लिया पूरा लोहा
पंजाब और हरियाणा के किसानों को गेहूं और चावल उगाने के बदले लाभ देने के उद्देश्य से एमएसपी को शुरू किया गया था, जिसके परिणाम 70-80 के दशक में देश को मिलने भी शुरू हुए थे।
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कृषि कानूनों के वापस हो जाने के बाद भी किसान आंदोलन मुख्य तौर पर दो मांगों को लेकर जारी रहा था। इनमें किसानों पर दर्ज केस वापस लेने और न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी शामिल थी। गुरुवार को किसान आंदोलन के स्थगित होने के बाद एक बार फिर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर चर्चा तेज हो गई है। एमएसपी का उदय पंजाब-हरियाणा से हुआ था। 1965 के दशक में देश में शुरू हुई हरित क्रांति के रूप में केंद्र का यह फैसला अब इतिहास में दर्ज हो चुका है। देश के अनाज भंडारण में भी एमएसपी की अहम भूमिका मानी जाती है।
एक साल से अधिक समय से चल रहे किसान आंदोलन की बड़ी वजह एमएसपी ऐसे ही नहीं बनी। इसके पीछे का कारण पंजाब और हरियाणा के किसानों की खुशहाली के अतीत से जुड़ा हुआ है। पंजाब और हरियाणा के किसानों को गेहूं और चावल उगाने के बदले लाभ देने के उद्देश्य से एमएसपी को शुरू किया गया था, जिसके परिणाम 70-80 के दशक में देश को मिलने भी शुरू हुए थे। हरियाणा और पंजाब के किसानों के विरोध का कारण कृषि जानकार एमएसपी को ही बताते रहे हैं, क्योंकि एमएसपी की शुरुआत ही इन दोनों राज्यों के किसानों को लाभ देने के लिए हुई थी। एमएसपी की इस व्यवस्था से किसान समृद्ध हुए हैं, नए कानून से उन्हें उसी व्यवस्था को खत्म होने का खतरा लगा। जिसके बाद पंजाब के किसानों ने इसका विरोध शुरू किया। पंजाब के किसानों का यह आंदोलन बाद में किसान आंदोलन के रूप में तैयार हो गया।
इन फसलों में है एमएसपी व्यवस्था
वर्तमान में गेहूं, चावल, जौ, ज्वार, बाजरा, मक्का और रागी के साथ ही पांच तरह की दालों और 8 किस्म के तेल बीज, कच्चा कपास व जूट, गन्ना और वीएफसी तंबाकू पर केंद्र सरकार एमएसपी दे रही है। देश के लगभग 9.0 करोड़ टन अनाज भंडारण में भी एमएसपी को बड़ा कारण माना जाता है।
सीएसीपी तय करता है एमएसपी
कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) एमएसपी के अंतर्गत आने वाली फसलों की कीमतें तय करता है। वर्ष 1965 में हरित क्रांति के समय एमएसपी की घोषणा की गई थी। वर्ष 1966-67 में गेहूं की खरीद के साथ इसकी शुरुआत हुई।
हरियाणा-पंजाब के किसानों को ज्यादा फायदा
एमएसपी का लाभ उन्हीं किसानों को मिल पाता है जिनके पास औसतन 5 हेक्टेयर से अधिक कृषि योग्य भूमि होती है। हरियाणा और पंजाब के किसानों में ऐसे किसानों की संख्या काफी अधिक है। इन दोनों राज्यों सहित देश के अन्य राज्यों में 86 प्रतिशत ऐसे किसान हैं जिनके पास औसतन 2 हेक्टेयर से भी कम जमीन है।
हां यह सच है कि एमएसपी की शुरुआत पंजाब-हरियाणा से ही हुई है। देश में अकाल पड़ने के वक्त में केंद्र सरकार के द्वारा इसकी घोषणा की गई थी। यहां के किसानों के लिए एमएसपी एक धुरी की तरह हैं। इसके कारण ही किसानों को अपनी फसल का उचित मूल्य मिल पाता है, यदि उन्हें एमएसपी का लाभ ही नहीं मिलेगा तो वह बर्बाद हो जाते। - सुखदेव सिंह कोकरी कलां, राष्ट्रीय महासचिव, भाकियू, एकता (उगराहां)