मोहाली में लावारिस पशुओं की समस्या: काउ सेस से करोड़ों की कमाई फिर भी 24 घंटे में जा रही एक की जान
मोहाली जिला प्रशासन ने कुछ समय पहले लावारिस पशुओं को लालड़ू गोशाला में भेजने की योजना बनाई थी लेकिन, अभी तक यह सपना हकीकत में नहीं बदल पाया है। कई बार इस प्रोजेक्ट को लेकर मीटिंग भी हुई लेकिन प्रोजेक्ट फाइलों से आगे नहीं बढ़ पाया है।
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12 साल से जिले को लावारिस पशुओं से मुक्त बनाने की योजना चल रही है लेकिन अभी तक यह सपना पूरा नहीं हुआ। कई नगर काउंसिल तो अभी तक अपनी गोशाला तक नहीं बना पाई हैं। जबकि, सरकार हर साल करोड़ों रुपये का काउ सेस इकट्ठा कर रही है। पुलिस के अनुसार तो 24 घंटे में एक व्यक्ति की जान जाती है।
लावारिस पशुओं के चलते कई जानें जा चुकी हैं। जिले में मोहाली नगर निगम और सात नगर काउंसिल हैं। मोहाली और लालड़ू में ही सरकारी गोशाला है। कुछ इलाकों में निजी गोशालाएं संचालित हैं लेकिन संचालक लावारिस पशुओं को रखने की जहमत नहीं उठाते। पांच हजार पशु सड़कों पर घूम रहे हैं।
पशुओं की वजह से लोगों की सड़क हादसों में जा रही जान
दप्पर कॉलोनी निवासी बुजुर्ग रामचंद्र और उनकी पत्नी नैबो देवी के (25) बेटे विक्रम की पशुओं की वजह से हादसे में मौत हो गई थी। जवान बेटे की मौत ने माता-पिता की कमर ही तोड़ दी। जिस उम्र में बेटे के सिर पर सेहरा सजना था, वह इस तरह बुढ़ापे में साथ छोड़ जाएगा, यह उन्होंने सोचा भी न था। वह उसकी शादी का सपने देख रहे थे।
यह बताते ही आंखों से आंसू छलक पडे़। उन्होंने बताया कि बेटा बिक्रम मुबारिकपुर के पास दुकान करता था और इसी से घर का खर्च चलता था। वह दुकान बंद करके घर आ रहा था। इसी दौरान रास्ते में लड़ रहे दो सांड़ों ने उसे टक्कर मार दी थी। वह गंभीर रूप से घायल हो गया। लोगों ने उसे डेराबस्सी अस्पताल पहुंचाकर उन्हें सूचना दी। यहां से डॉक्टरों ने उसे जीएमसीएच सेक्टर-32 रेफर कर दिया। हालत बिगड़ने पर उसे पीजीआई में भर्ती किया गया। 7 जुलाई, 2021 को बिक्रम जंग हार गया। बुजुर्ग ने बताया कि उनके तीन बेटे और एक बेटी थी। वह दो बेटों को खो चुके हैं।
दप्पर कॉलोनी निवासी गुरमीत कौर ने बताया कि उसके पति लज्जा राम लालड़ू स्थित एक कंपनी में नौकरी करते थे। जैसे ही वह एक दिन सुबह करीब 8 बजे बाइक से ड्यूटी के लिए निकले तो घर के पास एक लावारिस पशु ने टक्कर मार दी। वह गंभीर रूप से जख्मी हो गए। उनका करीब 8 महीने तक इलाज करवाया लेकिन 8 मई 2020 को वे जिंदगी की जंग हार गए।
उनके इलाज में बहुत पैसा खर्च होने पर भी उन्हें बचाया नहीं जा सका। इसके बाद घर की आर्थिक हालत बहुत खराब हो गई। सरकार से उन्हें कोई आर्थिक मदद नहीं मिली है। ईएसआई ने कुछ महीने पहले ही 1300 रुपये पेंशन लगाकर भद्दा मजाक किया है। अब उनका इकलौता बेटा स्थानीय कंपनी में दिहाड़ी करके घर का खर्चा चला रहा है।
गोशाला पहुंचाया जाए पशुओं को
पशुओं से निपटने के लिए प्रशासन को जिम्मेदारी निभानी होगी। एक तो सभी इलाकों में गोशाला बननी चाहिए, दूसरा लावारिस पशुओं को गोशाला में पहुंचाया जाना चाहिए। तभी हादसे रुकेंगे। -सुनील वर्मा, बिजनेसमैन, फेज-9 मोहाली
लोग निभाएं अपनी जिम्मेदारी
पशुओं की समस्या गंभीर है। सरकार प्रयास कर रही हैं। पशुओं का दूध निकालने के बाद उन्हें छोड़ना नहीं चाहिए। यदि लोग अपनी भूमिका सही से निभाएंगे तो हादसे रुकेंगे। - राजवंत शर्मा, सदस्य गोशाला सेवा कमीशन, पंजाब
पशु मालिकों को जल्द देंगे जगह
निगम की ओर से पशु मालिकों को जगह देने की योजना पर काम चल रहा है। निगम ने प्रस्ताव पास कर दिया गया है। कुछ महीने में पशुओं की दिक्कत पूरी तरह से खत्म हो जाएगी। -कुलजीत सिंह बेदी, डिप्टी मेयर नगर निगम मोहाली
मामले में नगर निगम गंभीर
पशुओं को पकड़ने के लिए ड्राइव चलाई जाती है। लोगों को भी पशुओं को सड़कों पर खुले में न छोड़ने के प्रति जागरुक किया जाता है। नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की जाती है। - डॉ. कमल कुमार गर्ग, कमिश्नर नगर, निगम मोहाली
ऐसे बढ़ती है लावारिस पशुओं की संख्या
जिले में लावारिस पशु पंजाब एरिया से आ रहे हैं। इन्हें रोकने के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा शहर की कालोनी में पशुपालन करने वाले लोग जब पशु दूध देना बंद कर देते हैं तो वह इन्हें भटकने के लिए सड़कों पर छोड़ देते हैं। इसमें अधिकतर दूध नहीं देने वाली गाय और बछड़े हैं। यह पशु सड़कों पर हादसे का कारण बनते हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए नगर निगम ने जुर्माने का प्रावधान किया है। इसके बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है।
पशुओं को लालड़ू भेजने की योजना अधर में
मोहाली जिला प्रशासन ने कुछ समय पहले लावारिस पशुओं को लालड़ू गोशाला में भेजने की योजना बनाई थी लेकिन, अभी तक यह सपना हकीकत में नहीं बदल पाया है। कई बार इस प्रोजेक्ट को लेकर मीटिंग भी हुई लेकिन प्रोजेक्ट फाइलों से आगे नहीं बढ़ पाया है। हालांकि गोशाला को सरकार ने फंड भी जारी किया है। जबकि, गो सेवा कमीशन की ओर से कुछ पशुओं को गोशाला में पहुंचाया गया था।
अब इस योजना से निपटेंगे समस्या से
निगम ने कुछ समय पहले एक सर्वे करवाया गया था। इसमें यह बात साफ हो चुकी है कि मोहाली शहर में कोई भी लावारिस पशु नहीं है। मोहाली के साथ लगते गांवों के लोग ही रात को दूध लेने के बाद पशुओं को छोड़ देते हैं। इस वजह से हादसे होते हैं। वहीं, अब निगम ने उक्त पशुओं को चप्पड़चिड़ी के पास जगह देने की योजना बनाई है। जगह की निशानदेही हो चुकी है। प्रस्ताव पास करके सरकार को भेज दिया गया है। विधानसभा चुनाव के बाद इस योजना को सफलता मिल जाएगी।
पशुओं के गले में पहनाए जा रहे रेडियम वाले पट्टे
जिला पुलिस भी लावारिस पशुओं से होने वाले हादसों को रोकने के लिए कई कदम उठा रही है। पुलिस की ओर से बाकायदा समाजसेवी संस्थाओं के सहयोग से रेडियम वाले पट्टे पशुओं के गले में पहनाए जा रहे हैं। जिससे रात के समय दूर से ही पशु लोगों को दिख जाएं और वह अपने वाहन को बचाकर निकाल सकें।