Punjab Assembly: भगवंत मान ने पेश किया विश्वास प्रस्ताव, चर्चा के बाद सदन की कार्यवाही 29 सितंबर तक स्थगित
भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार ने शनिवार को राज्यपाल को सूचित किया था कि 27 सितंबर को विधानसभा के नियमित सत्र में पराली जलाने, वस्तु एवं सेवा कर और बिजली आपूर्ति जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
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पराली, बिजली और जीएसटी के मुद्दे पर बुलाए गए पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हंगामे के बीच विश्वास प्रस्ताव पेश किया। वहीं सदन की कार्यवाही 29 सितंबर तक स्थगित कर दी गई है। इस प्रस्ताव को लेकर ही राज्यपाल ने सदन बुलाए जाने पर आपत्ति जताई थी लेकिन सरकार ने कैबिनेट की बैठक के मुद्दों को आधार बनाते हुए सदन की मंजूरी मांगी थी। सत्र बुलाए जाने की मंजूरी तो मिली लेकिन सत्र से पहले बुलाई गई बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (बीएसी) की बैठक में विश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया गया।
भाजपा को इसकी भनक पहले ही लग गई थी। लिहाजा सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा विधायक जंगीलाल महाजन ने बीएसी की बैठक में भाजपा विधायकों को न शामिल किए जाने पर ऐतराज जताया और अश्वनी शर्मा के साथ सदन का बहिष्कार किया। भाजपा के सदस्यों के बाहर निकलते ही कांग्रेस मुखर हो गई और कांग्रेस के 15 विधायकों ने प्रताप बाजवा के नेतृत्व में हंगामा शुरू कर दिया।
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हंगामा इस हद तक हुआ कि कांग्रेस विधायकों ने सीएम भगवंत मान को बोलने का मौका नहीं दिया। विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवा ने बीच में हस्तक्षेप किया लेकिन कांग्रेसियों ने उनकी भी नहीं मानी। लंबे चले हंगामे के बाद स्पीकर ने सभी कांग्रेसी विधायकों को आज की कार्यवाही से नेम कर निष्काषित कर दिया। इसके बाद ही सीएम भगवंत मान ने विश्वास प्रस्ताव पेश किया। वित्त मंत्री मंत्री हरपाल चीमा और शहरी स्थानीय निकाय मंत्री अमन अरोड़ा ने प्रस्ताव का समर्थन किया। इस प्रस्ताव पर तीन अक्तूबर को बहस और वोटिंग होगी।
राज्यपाल ने कार्यसूची देखकर दी थी मंजूरी
आम आदमी पार्टी 22 सितंबर को विधानसभा का सत्र बुलाकर विश्वास मत प्रस्ताव पेश करना चाहती थी लेकिन राज्यपाल ने संविधान व कानून का हवाला देते हुए इस मुद्दे पर विधानसभा का सत्र आयोजित करने की मंजूरी नहीं दी। सरकार ने 27 सितंबर को सूबे से जुड़े पराली, बिजली, जीएसटी के मुद्दों पर चर्चा के लिए सत्र बुलाने का राज्यपाल से आग्रह किया।
कार्यसूची देखने के बाद राज्यपाल ने इसे स्वीकार कर लिया। इस बहाने सरकार ने मंगलवार को विश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया। एक लाइन के विश्वास प्रस्ताव में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि हमारे विधायकों पर हमें विश्वास है। यह वह सौदा नहीं है जो बाजारों में बिक जाए।
ऐसे आया विश्वास प्रस्ताव
मंगलवार को विधानसभा सत्र शुरू होने के बाद सरकार ने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक बुलाकर विश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला ले लिया लेकिन सदन में पेश किए जाने तक इस फैसले को सार्वजनिक नहीं किया। सदन में जैसे ही विश्वास प्रस्ताव लाने की घोषणा हुई, कांग्रेस के सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया।
वड़िंग की चुनौती
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को चुनौती दी है कि अगर उनकी सरकार को बहुमत साबित करने की इतनी चाहत है तो वह विधानसभा चुनाव करवाकर दोबारा लोगों का विश्वास हासिल करें। नेता प्रतिपक्ष प्रताप बाजवा ने विधानसभा परिसर में कहा कि सरकार विश्वास प्रस्ताव लाकर सदन का समय बर्बाद कर रही है। जिन मुद्दों को लेकर यह सत्र बुलाया गया है, उनमें से किसी भी मुद्दे पर पहले दिन चर्चा नहीं हुई।
जनता के मुद्दों पर बहस ही नहीं हुई: अय्याली
विधायक मनप्रीत सिंह अय्याली ने कहा कि पंजाब में बिजली, एसवाईएल नहर, अवैध खनन, नशा व शराब तस्करी जैसे विभिन्न मुद्दे हैं, जिन पर सदन में चर्चा और बहस की जरूरत है। विश्वास प्रस्ताव लाकर सरकार जनता से जुड़े मुद्दों से ध्यान भटकाना चाहती है।