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ऑन डिमांड कैब मंगाते हैं तो देखिए ट्राइसिटी में चलेंगी कौन सी कैब?
बलवान करिवाल/अमर उजाला, चंडीगढ़।
Updated Fri, 08 Jul 2016 11:57 PM IST
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ola cab
- फोटो : ola cab
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यूटी प्रशासन ने ऑन-डिमांड ट्रांसपोर्टेशन के लिए नई पॉलिसी फाइनल कर दी है। इस पॉलिसी के तहत ही शहर में एप कैब अपनी सेवाएं देंगी।
स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) ने पॉलिसी फाइनल कर यूटी प्र्रशासक प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी के पास मंजूरी के लिए भेज दी है। मंजूरी मिलते ही जुलाई के अंत या अगस्त के शुरू में इसे लागू कर दिया जाएगा। शहर में ओला, टैक्सी फॉर श्योर और उबर एप कैब कंपनी शहर में अपनी सेवाएं दे रही हैं। रेडियो और वेब कैब की तरह शहरवासियों की सुरक्षा को देखते हुए नई पॉलिसी बनाई गई है।
पॉलिसी में यह सब
एप कैब आपरेटर यानी संचालक को अपनी कंपनी को कंपनी एक्ट-2013 के तहत रजिस्टर्ड करवाना अनिवार्य होगा। कंपनी रजिस्टर्ड करवाने के लिए आपरेटर के पास कम से कम 100 टैक्सी होनी चाहिए। एग्रीमेंट के जरिए वह किसी दूसरे परमिट होल्डर की टैक्सी भी हायर कर सकता है। कंपनी का शहर में अपना चौबीसों घंटे सातों दिन खुलने वाला कॉल सेंटर होना चाहिए। इन सब शर्तों को पूरा करने पर ही आपरेटर को शहर में एप कैब चलाने का लाइसेंस दिया जाएगा। एप कैब संचालक को 5 साल के लिए परमिट दिया जाएगा। एप कैब संचालक को एसटीए के पास सभी टैक्सियों व ड्राइवर का रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य होगा।
पड़ोसी राज्यों की कैब को देना होगा टैक्स
पॉलिसी के अनुसार पंजाब और हरियाणा नंबर की एप कैब को चंडीगढ़ में प्रवेश पर सेवा शुल्क देना होगा। सेवा शुल्क अदा नहीं करने वाले पर सख्त कार्रवाई का प्रस्ताव है।
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स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) ने पॉलिसी फाइनल कर यूटी प्र्रशासक प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी के पास मंजूरी के लिए भेज दी है। मंजूरी मिलते ही जुलाई के अंत या अगस्त के शुरू में इसे लागू कर दिया जाएगा। शहर में ओला, टैक्सी फॉर श्योर और उबर एप कैब कंपनी शहर में अपनी सेवाएं दे रही हैं। रेडियो और वेब कैब की तरह शहरवासियों की सुरक्षा को देखते हुए नई पॉलिसी बनाई गई है।
पॉलिसी में यह सब
एप कैब आपरेटर यानी संचालक को अपनी कंपनी को कंपनी एक्ट-2013 के तहत रजिस्टर्ड करवाना अनिवार्य होगा। कंपनी रजिस्टर्ड करवाने के लिए आपरेटर के पास कम से कम 100 टैक्सी होनी चाहिए। एग्रीमेंट के जरिए वह किसी दूसरे परमिट होल्डर की टैक्सी भी हायर कर सकता है। कंपनी का शहर में अपना चौबीसों घंटे सातों दिन खुलने वाला कॉल सेंटर होना चाहिए। इन सब शर्तों को पूरा करने पर ही आपरेटर को शहर में एप कैब चलाने का लाइसेंस दिया जाएगा। एप कैब संचालक को 5 साल के लिए परमिट दिया जाएगा। एप कैब संचालक को एसटीए के पास सभी टैक्सियों व ड्राइवर का रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य होगा।
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पड़ोसी राज्यों की कैब को देना होगा टैक्स
पॉलिसी के अनुसार पंजाब और हरियाणा नंबर की एप कैब को चंडीगढ़ में प्रवेश पर सेवा शुल्क देना होगा। सेवा शुल्क अदा नहीं करने वाले पर सख्त कार्रवाई का प्रस्ताव है।
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ola cab
- फोटो : ola cab
पुलिस की रहेगी पैनी नजर
सुरक्षा के लिहाज से सभी कैब में जीपीएस, जीपीआरएस, सीसीटीवी लगा होना जरूरी है। इन सभी का लिंक 24 घंटे आपरेटेड कॉल सेंटर से होना चाहिए। कॉल सेंटर की मदद से यूटी पुलिस कैब पर 24 घंटे नजर रख सकेगी। कैब के अंदर बोर्ड लगा होना चाहिए। जिस पर ड्राइवर का नाम, पता, फोन नंबर और कैब का नंबर और ऑपरेटर का नाम पता होना चाहिए।
एसटीए तय करेगा एप कैब का किराया
एसटीए कैब के लिए किराया निर्धारित करेगा। निर्धारित किराए से कोई भी कंपनी अधिक नहीं वसूल सकती। ऐसी कोई भी शिकायत मिलने पर लाइसेंस रद करने का अधिकार एसटीए के पास होगा।
पॉलिसी के अहम प्वाइंट्स
- एप कैब ड्राइवर के पास लाइसेंस, एसटीए द्वारा दिया गया आईडी नंबर, ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए।
- दुर्घटना के समय अपनी लोकेशन देने के लिए एप कैब में पैनिक बटन होना चाहिए। जिससे लोकल पुलिस को कैब की लोकेशन दी जा सके।
- एप कैब चलाने वाला ड्राइवर चंडीगढ़ में पिछलें दो साल से रह रहा हो। अगर ड्राइवर पंजाब, हरियाणा व हिमाचल का रहने वाला है तो उसे वहां का निवास
प्रमाण पत्र एसटीए के पास जमा करवाना अनिवार्य होगा।
- एप कैब में डिजिटल मीटर लगा होना चाहिए और कैब संचालक को रोज का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा।
कोट्स....
ई-रिक्शा के बाद एप कैब पॉलिसी को भी फाइनल कर प्रशासक के पास मंजूरी के लिए भेज दिया गया है। पॉलिसी में पैसेंजर की सुरक्षा और सुविधा का विशेष ख्याल रखा गया है। मंजूरी के बाद जुलाई के आखिर या अगस्त के शुरू में इसे लागू कर दिया जाएगा।
केके जिंदल, सेक्रेटरी, ट्रांसपोर्ट, चंडीगढ़।
कोट्स...
एप कैब की पॉलिसी लागू होने के बाद सभी सवाल दूर हो जाएंगे। पॉलिसी में हर छोटे-छोटे से प्वाइंट का ध्यान रखा गया है। खासकर महिलाओं की सुरक्षा और कैब में सुविधा का ख्याल रखा गया है। हर कोई कैब में सहज महसूस करे इसका ध्यान रखा गया है।
राजिव तिवारी, एडीशनल सेक्रेटरी, एसटीए।
सुरक्षा के लिहाज से सभी कैब में जीपीएस, जीपीआरएस, सीसीटीवी लगा होना जरूरी है। इन सभी का लिंक 24 घंटे आपरेटेड कॉल सेंटर से होना चाहिए। कॉल सेंटर की मदद से यूटी पुलिस कैब पर 24 घंटे नजर रख सकेगी। कैब के अंदर बोर्ड लगा होना चाहिए। जिस पर ड्राइवर का नाम, पता, फोन नंबर और कैब का नंबर और ऑपरेटर का नाम पता होना चाहिए।
एसटीए तय करेगा एप कैब का किराया
एसटीए कैब के लिए किराया निर्धारित करेगा। निर्धारित किराए से कोई भी कंपनी अधिक नहीं वसूल सकती। ऐसी कोई भी शिकायत मिलने पर लाइसेंस रद करने का अधिकार एसटीए के पास होगा।
पॉलिसी के अहम प्वाइंट्स
- एप कैब ड्राइवर के पास लाइसेंस, एसटीए द्वारा दिया गया आईडी नंबर, ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए।
- दुर्घटना के समय अपनी लोकेशन देने के लिए एप कैब में पैनिक बटन होना चाहिए। जिससे लोकल पुलिस को कैब की लोकेशन दी जा सके।
- एप कैब चलाने वाला ड्राइवर चंडीगढ़ में पिछलें दो साल से रह रहा हो। अगर ड्राइवर पंजाब, हरियाणा व हिमाचल का रहने वाला है तो उसे वहां का निवास
प्रमाण पत्र एसटीए के पास जमा करवाना अनिवार्य होगा।
- एप कैब में डिजिटल मीटर लगा होना चाहिए और कैब संचालक को रोज का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा।
कोट्स....
ई-रिक्शा के बाद एप कैब पॉलिसी को भी फाइनल कर प्रशासक के पास मंजूरी के लिए भेज दिया गया है। पॉलिसी में पैसेंजर की सुरक्षा और सुविधा का विशेष ख्याल रखा गया है। मंजूरी के बाद जुलाई के आखिर या अगस्त के शुरू में इसे लागू कर दिया जाएगा।
केके जिंदल, सेक्रेटरी, ट्रांसपोर्ट, चंडीगढ़।
कोट्स...
एप कैब की पॉलिसी लागू होने के बाद सभी सवाल दूर हो जाएंगे। पॉलिसी में हर छोटे-छोटे से प्वाइंट का ध्यान रखा गया है। खासकर महिलाओं की सुरक्षा और कैब में सुविधा का ख्याल रखा गया है। हर कोई कैब में सहज महसूस करे इसका ध्यान रखा गया है।
राजिव तिवारी, एडीशनल सेक्रेटरी, एसटीए।