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देख लीजिए देश के नंबर वन अस्पताल का हाल, मरीज को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी लगा रहा टांके

Thu, 15 Nov 2018 09:19 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा) Updated Thu, 15 Nov 2018 09:19 AM IST
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On Camera, Peon Put Stitches In Rohtak District Hospital of Haryana
टांका लगाते हुए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी

देश के नंबर वन अस्पताल से हैरान करने वाली तस्वीरें आई हैं। यहां पर मरीजों का इलाज डॉक्टर नहीं बल्कि चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी कर रहे हैं। एक घायल व्यक्ति को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी टांके लगा रहा है। मामला हरियाणा के रोहतक जिला अस्पताल का है। रोहतक जिला अस्पताल को नेशनल क्वालिटी एसोरेंस स्टैंडर्ड के निरीक्षण में देश भर में पहली रैंकिंग हासिल है। 

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 हैरानी तो इस बात की है कि मामला उजागर होने के बाद अस्पताल प्रशासन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को रिलीव कर सिविल सर्जन कार्यालय ही भेज देता है। वहीं कार्रवाई के नाम पर जांच टीम गठित की जाती है और ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता है। 
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जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों की अकसर शिकायत रहती है कि उन्हें ओपीडी के बाद उपचार के लिए आपातकालीन विभाग में सीनियर डॉक्टर नहीं मिलते। अकसर डॉक्टर मरीजों को पीजीआईएमएस रेफर करने की तैयारी में रहते हैं। यदि किसी का उपचार करना पड़ भी जाए तो उसमें लापरवाही ऐसी बरती जाती है कि मेडिकल नियमों का अता-पता भी नहीं होता। 

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On Camera, Peon Put Stitches In Rohtak District Hospital of Haryana
रोहतक

हाल ही में कृपाल नगर निवासी जोगेंद्र का मामला प्रकाश में आया है। इसमें मरीज के हाथ में चोट लगी तो उपचार के लिए वह जिला अस्पताल के आपातकालीन विभाग में मध्य रात्रि के बाद पहुंचा। यहां जब मरीज को सही उपचार नहीं दिया गया तो उसने एक साथी को मौके पर बुलाया। जब डॉक्टर ने उपचार करना शुरू किया तो बताया कि हाथ में घाव है, इसलिए टांके लगाने पडे़ंगे। 

इसके बाद ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर सुनील मिनोचा अपनी कुर्सी से नहीं उठे और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बलजीत ने मरीज के हाथ में तीन टांके लगाए। जब तीमारदार ने कहा कि घाव अधिक है और तो कर्मचारी ने एक टांका और लगा दिया। इसके बाद मरीज को छुट्टी दे दी गई, लेकिन मरीज को आराम नहीं मिला। तीमारदार ने बताया कि उन्हें दर्द की दवा बाहर से लेनी पड़ी। यह मामला जब प्रकाश में आया तो बुधवार को जिला अस्पताल प्रशासन ने डॉक्टर पर कार्रवाई करने की बजाए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को रिलीव कर सिविल सर्जन कार्यालय भेज दिया। 

जांच टीम गठित की : चिकित्सा अधीक्षक
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश चंद्र ने बताया कि उनके संज्ञान में मामला आया है, इसके लिए उन्होंने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को रिलीव कर दिया है। जो काम कर्मचारी का नहीं था उसे नहीं करना चाहिए था। डॉक्टर से इसके लिए जवाब मांगा गया है। इस मामले की जांच के लिए टीम गठित की गई है। इसमें एसएमओ इंचार्ज डॉ. आरएस पूनिया, आरएमओ डॉ. शैलेंद्र डोगरा, डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. राजीव सभ्भरवाल शामिल हैं।

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