अफसरों ने माल नहीं किया रिलीज तो हाईकोर्ट ने ठोका 50 हजार का जुर्माना
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बंदरगाह पर आने वाले सामान को देर तक अपने पास रखने के लिए हाईकोर्ट ने कस्टम अफसरों को फटकार लगाई है। माल रिलीज न करने के खिलाफ लुधियाना के कारोबारियों की ओर से दाखिल की गई थी याचिका को मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने दोषी अधिकारियों पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
साथ ही लंबे समय तक रखने का खर्चा माफ करने का आदेश दिया है। अदालत ने बंदरगाहों पर आने वाले सामान की शिपमेंट में घोषणा पत्र और बिल के बीच अंतर को जांचने के लिए वहां ढांचागत सुविधाओं के अभाव पर भी चिंता जताई और कहा कि देश में हर वर्ष 33 हजार करोड़ का आयात बंदरगाहों के जरिये होता है।
इसके बावजूद माल की जांच के लिए लैब सहित अन्य सुविधाओं का अभाव भला क्यों है। सीनियर एडवोकेट पुनीत बाली और एडवोकेट सौरभ कपूर के माध्यम से लुधियाना के मेसर्स श्री लक्ष्मी स्टील्स ने याचिका दाखिल करते हुए कहा था कि उन्होंने दक्षिण कोरिया से कोल्ड रोल शीट मंगवाई थी।
इस शीट के दिसंबर, 2015 में मुंबई पहुंचने के बाद इसे कस्टम अफसरों ने रोक लिया। इसके बाद डायरेक्टर रिवेन्यू इंटेलिजेंस ने कस्टम को पत्र लिखकर कंसाइनमेंट को रिलीज न करने की बात कही।
‘स्टोरेज के लिए मांगी मोटी रकम’
इसके बाद से ही लगातार कानूनी लड़ाई जारी है। याचिका पर हाईकोर्ट की तरफ से सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था।
अब इस पर अपना फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि याची का यह दावा सही है कि जो आयात किया गया कंसाइनमेंट है, वह कोल्ड रोल शीट है न की हॉट। ऐसे में याची के कंसाइनमेंट को रिलीज किया जाए।
‘स्टोरेज के लिए मांगी मोटी रकम’
कोर्ट को बताया गया कि इतने लंबे समय से इस कंसाइनमेंट को स्टोर कर रखा गया, जिसके लिए मोटी रकम बतौर फीस मांगी जा रही है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यहां गलती याची की नहीं है।
ऐसे में याची से इसके लिए भुगतान नहीं करवाया जा सकता है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने कहा है कि कुछ अधिकारियों की गलती के कारण यह मामला लटका है। याची को नुकसान भी हुआ है। ऐसे में दोषी अफसरों पर जुर्माना लगाते हुए हाईकोर्ट ने कहा है कि यह राशि याची को अदा की जाए।