टॉयलेट शुल्क पर बवाल: चंडीगढ़ में अधिकारी और पार्षद आमने-सामने, महिलाओं से शुल्क लेने पर सवाल
नगर निगम के पास शहर में लगभग 300 टॉयलेट हैं। इसमें 110 टॉयलेट पार्क व ग्रीन बेल्ट में बने हैं। वहीं 190 टॉयलेट मार्केट और सार्वजनिक स्थलों पर बने हैं। निगम इन टॉयलेट को अनुबंध के साथ ठेकेदार और मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन को देता है।
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पेयजलापूर्ति के बाद अब टॉयलेट में महिलाओं से लिए जाने वाले शुल्क को लेकर चंडीगढ़ में अधिकारी और पार्षद आमने-सामने आ गए हैं। पार्षदों का कहना है कि जब पुरुषों से टॉयलेट का उपयोग करने पर शुल्क नहीं लिया जा रहा है तो महिलाओं से क्यों? अधिकारियों का कहना है कि टॉयलेट सीट का उपयोग करने पर यह शुल्क लिया जाता है। शुल्क न लेने पर हर साल लगभग 4 लाख 56 हजार रुपये राजस्व का नुकसान होगा।
नगर निगम के पास शहर में लगभग 300 टॉयलेट हैं। इसमें 110 टॉयलेट पार्क व ग्रीन बेल्ट में बने हैं। वहीं 190 टॉयलेट मार्केट और सार्वजनिक स्थलों पर बने हैं। निगम इन टॉयलेट को अनुबंध के साथ ठेकेदार और मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन को देता है। अनुबंध के अनुसार निगम 200 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से हर माह ठेकेदार से छह हजार रुपये लेता है। इसके एवज में टॉयलेट सीट उपयोग करने वाले लोगों से ठेकेदार दो रुपये लेता है। पुरुषों के लिए निगम ने विकल्प दिया है, लेकिन महिलाओं को दो रुपये शुल्क देना ही होता है। ठेकेदार इसी से अपना खर्चा निकालता है। निगम का दावा है कि दिनभर में कुछ ही पुरुष टॉयलेट सीट उपयोग करते हैं जबकि महिला टॉयलेट में सीट का उपयोग हो रहा है, इसलिए यह प्रावधान रखा गया है।
महिला और पुरुष टॉयलेट का बांटा गया है शुल्क
अधिकारियों का कहना है कि महिला और पुरुष टॉयलेट को 3-3 हजार रुपये के अनुसार बांटा गया है। पुरुष टॉयलेट से महीने का खर्चा न के बराबर निकलता है, वहीं महिलाओं को दो रुपये छोड़े गए तो ऐसी स्थिति में महीने का मुश्किल से दो हजार रुपये मिलेगा। इस हिसाब से महीने का 190 टॉयलेट से लगभग 3.80 लाख रुपये राजस्व का नुकसान होगा। निगम अपना ब्योरा तैयार कर सितंबर माह की बैठक में रखेगा। सदन के निर्णय के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
भाजपा पार्षद से मिलने पहुंचे ठेकेदार
नगर निगम सदन में यह मुद्दा भाजपा पार्षद सौरभ जोशी ने उठाया था। उन्होंने कहा कि सरकार के नियमानुसार हम किसी भी व्यक्ति से टॉयलेट उपयोग करने का शुल्क नहीं ले सकते। यहां तक कि यह नियम बड़े-बड़े होटलों पर भी लागू होता है। अगर इसे लोगों की सेवा के लिए बनाया गया है तो शुल्क कैसे ले सकते हैं। खुले में पेशाब करने की समस्या को हल करने के लिए यह व्यवस्था की गई थी। आयुक्त ने इस संबंध में राजस्व नुकसान संबंधी जानकारी सदन में पेश करने को कहा। जैसे ही ठेकेदारों को पता चला तो वह पार्षद से मिलने पहुंच गए। पार्षद ने अगली बैठक में अनुबंध की कॉपी मिलने के बाद उसे देखकर कोई निर्णय लेने की बात कही।
खुले में पेशाब करने पर भी कटते हैं नंबर
स्वच्छता अभियान में येलो स्पॉट नाम से भी शहरों को नंबर मिलते हैं। इसमें खुले में पेशाब करने वाले स्थानों को चिह्नित किया जाता है। रेलवे स्टेशन पर कहीं कोई टॉयलेट नहीं है, जबकि शहर के सार्वजनिक स्थलों को ही इसमें प्रमुख रूप से देखा जाता है। शहर के ऐसे कई स्पॉट हैं जहां अभी भी लोग खुले में पेशाब करते हैं। वहीं इस श्रेणी में इन स्थानों पर दिन में दो बार सफाई होनी चाहिए।
शहर में किसी सुविधा के लिए दो नियम नहीं हो सकते हैं। जो नियम पुरुषों के लिए हैं वहीं महिलाओं के लिए भी होने चाहिए। वह टॉयलेट का उपयोग करने के लिए रुपये क्यों दें। इसके राजस्व का खाका तैयार किया जा रहा है। उसे सदन में रखेंगे। वहां शहर की भलाई के लिए जो निर्णय होगा लिया जाएगा। -सरबजीत कौर, मेयर