फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Officers slept for four months, preparing to reverse the decision of the House

चार माह तक सोते रहे अधिकारी, सदन का फैसला पलटने की तैयारी

Fri, 01 Oct 2021 01:45 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Fri, 01 Oct 2021 01:45 AM IST
विज्ञापन
Officers slept for four months, preparing to reverse the decision of the House
चंडीगढ़। अधिकारियों की लापरवाही के चलते अब नगर निगम अपने ही फैसले को पलटने की तैयार में है। दक्षिणी सेक्टरों की सफाई के लिए बीते 31 मई को सदन की बैठक में लायंस कंपनी के मैनुअल काम के ठेके को आगे न बढ़ाने और नई कंपनी के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करने के लिए फैसला लिया गया था लेकिन समय कम होने के बावजूद अधिकारी चार माह तक हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे।
विज्ञापन

अब नवंबर में कंपनी का टेंडर खत्म होने जा रहा है। ऐसे में निगम के पास कंपनी का कार्यकाल बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। उधर, फरवरी में कंपनी के मैकेनिकल ठेके की भी समय सीमा खत्म होनी है। ऐसे में निगम दोनों ठेकों के लिए जनवरी 2022 में टेंडर लगाने की योजना बना रहा है। इसके लिए अक्तूबर माह की सदन की बैठक में एजेंडा लाने की तैयारी है।
विज्ञापन

दक्षिणी सेक्टरों में सफाई का काम कर रही लायंस कंपनी ने फरवरी 2021 में निगम के साथ पांच साल का अनुबंध किया था। इसमें नवंबर 2021 में मैनुअल ठेके और फरवरी 2022 में मैकेनिकल ठके की समय सीमा खत्म होनी है। बीते मई माह में तय हुआ था कि कंपनी के काम को तीन साल आगे बढ़ाया जाए लेकिन कांग्रेस के पार्षदों ने इनकार कर दिया था। वहीं भाजपा पार्षदों के दो फाड़ हो गए। एक ने टेंडर प्रक्रिया नए सिरे से करने को कहा जबकि दूसरे ने समय सीमा बढ़ाने को कहा। अंत में तय हुआ कि नए सिरे से टेंडर होगा। प्रस्ताव सदन में लाया गया, लेकिन अफसरों की लापरवाही से टेंडर प्रक्रिया का काम ही शुरू नहीं हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन

कंपनी ने दिखाए थे प्रशस्ति पत्र
लायंस कंपनी ने काम की समयसीमा बढ़ाने के लिए पार्षद, आरडब्ल्यूए व कुछ संगठनों की ओर से दिए गए प्रशस्ति पत्रों को तत्कालीन आयुक्त के सामने प्रस्तुत किया था। निगम की ओर से गठित कमेटी ने स्पष्ट कहा था कि सफाई व्यवस्था के लिए नए सिरे से टेंडर किया जाना चाहिए। उसके बाद पार्षदों ने आरोप लगाया था कि हमने कर्मचारियों को पत्र दिया था न कि कंपनी को।
निगम कंपनी को हर साल देती है 50 करोड़
कंपनी को निगम लगभग 50 करोड़ (हर माह 4 करोड़ रुपये) का सालाना भुगतान करता है। वहीं, निगम 13 गांव व अपने सेक्टरों में लगभग 1200 से 1300 कर्मचारियों से सफाई करवाता है, जिनका हर माह करीब 7 से 8 करोड़ का खर्च आता है।
प्लांट के लिए नहीं भेजा था प्रस्ताव
इससे पहले सदन में भी कचरा निस्तारण प्लांट के लिए रोपड़ आईआईटी को तीन माह तक मशीनों की डीपीआर बनाने का पत्र न भेजने के मामले में मुद्दा गरमाया था। पार्षदों का आरोप था कि जानबूझकर निगम के अधिकारियों ने लापरवाही की है। रोपड़ आईआईटी ने डीपीआर बनाने के लिए तीन माह का समय मांगा है। ऐसे में पार्षदों की चुनाव को लेकर भी जवाबदेही बनी हुई है।

क्या कहते हैं अधिकारी
टेंडर प्रक्रिया पहले क्यों शुरू नहीं हुई, इसकी जानकारी नहीं है। फिलहाल टेंडर को देखा जा रहा है। एक माह में नया टेंडर लगाना थोड़ा मुश्किल है। इसके लिए बैठक करके सुझाव लिए जा रहे हैं। शहर की सफाई व्यवस्था पर इसका असर नहीं आने देंगे। -आनिंदिता मित्रा, आयुक्त, नगर निगम

अमर उजाला ई-पेपर फ्री में पढ़ने के लिए अमर उजाला ऐप डाउनलोड करें, एकदम फ्री, ये ऑफर सीमित समय के लिए है।

अमर उजाला ई-पेपर डेली एक रुपये से भी कम, अभी सब्सक्राइब करें और अपने शहर की हर खबर, हर समय, हर डिवाइस पर पाएं ।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed