Chandigarh: मेयर को जवाब नहीं देते अधिकारी, आठ दिन में पत्र लिखकर पांच सवाल पूछे, किसी का भी रिस्पांस नहीं
27 अगस्त को हुई सदन की बैठक के बाद मेयर ने आठ दिन में पांच पत्र लिखे और सदन में उठे मुद्दों पर विभिन्न विभागों के अधिकारियों से जवाब मांगा लेकिन आज तक उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। दुखी होकर उन्होंने अब आयुक्त विनय प्रताप सिंह को पत्र लिखा है और पूरी जानकारी दी है।
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चंडीगढ़ के मेयर कुलदीप कुमार को उनके ही विभाग के अधिकारी जवाब नहीं दे रहे हैं। 27 अगस्त को हुई सदन की बैठक के बाद मेयर ने आठ दिन में पांच पत्र लिखे और सदन में उठे मुद्दों पर विभिन्न विभागों के अधिकारियों से जवाब मांगा लेकिन आज तक उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। दुखी होकर उन्होंने अब आयुक्त विनय प्रताप सिंह को पत्र लिखा है और पूरी जानकारी दी है। कहा है कि ऐसा कर अधिकारी नगर निगम एक्ट का उल्लंघन कर रहे हैं।
बीते 27 अगस्त को नगर निगम की सदन की बैठक हुई थी। इसमें पार्षदों ने विभिन्न विभागों में लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों, भर्तियों समेत कई अन्य मुद्दे उठाए थे। बैठक के दो दिन बाद मेयर कुलदीप कुमार ने एक पत्र में सदन में उठे मुद्दों की एक्शन टेकन रिपोर्ट और दूसरे पत्र में सात बिंदु बनाकर संबंधित विभागों से सात दिन के अंदर जवाब मांगा था।
दूसरे पत्र में पूछा कि निगम के सभी विंग में 6 महीने से ज्यादा समय से कितने आउटसोर्सिंग कर्मचारी काम कर रहे हैं। उन्होंने पूरी लिस्ट मांगी। पूछा कि कितने कर्मचारी पांच साल से ज्यादा समय से काम कर रहे हैं। इन्हें एक्सटेंशन किसने दी और भर्ती के समय क्या अनुभव और शैक्षणिक योग्यता की जांच की गई थी। 30 सितंबर को एक विंग में नियमों को दरकिनार कर एक कर्मी की भर्ती के आरोप की जांच के लिए पत्र लिखा और सात दिन में रिपोर्ट मांगी।
दो सितंबर को चौथा पत्र लिखा और पूछा कि निगम ने निजी एजेंसी से कई गाड़ियां हायर कर कई कर्मचारियों को दी हैं। कंपनी कैसे चुनी गई। इसके टेंडर की कॉपी मांगी। किस-किस कर्मचारी को गाड़ी दी गई है। उसकी भी लिस्ट मांगी। 5 सितंबर को पांचवां पत्र लिखा, जिसमें 27 अगस्त को हुई सदन की बैठक का हवाला दिया और कहा कि जो फायरमैन विभिन्न विभागों में क्लर्क का काम कर रहे हैं, उन्हें तुरंत फायर स्टेशन भेजकर मेयर ऑफिस को जानकारी भेजी जाए। मेयर कुलदीप कुमार का कहना है कि इस पत्र का भी उन्हें अब तक जवाब नहीं मिला।
मेयर बोले- जवाब न देना एमसी एक्ट के सेक्शन 38 (6) का उल्लंघन
लिखित में पांच सवाल पूछने के बाद जब उन्हें एक का भी जवाब नहीं मिला तो मेयर ने 16 सितंबर को आयुक्त व डीसी विनय प्रताप सिंह को पत्र लिखा और 29 अगस्त से लेकर 5 सितंबर के बीच लिखे पांचो पत्रों का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें यह बताते हुए बहुत दुख हो रहा है कि उनकी ओर से लिखे गए पत्रों का जवाब नहीं दिया जा रहा है। न ही किसी अधिकारी ने यह बताने की जहमत उठाई है कि उत्तर देने में देरी क्यों हुई है।
उन्होंने कहा है कि यह स्पष्ट रूप से म्युनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट के सेक्शन 38 (6) का उल्लंघन है। मेयर ने पत्र में एक्ट की भी कॉपी लगाई है। साथ ही दोबारा आग्रह किया कि अब देर न करते हुए तुरंत उनके सवालों के जवाब दिए जाएं। मेयर ने पत्र की कॉपी यूटी प्रशासन के गृह सचिव-कम-सेक्रेटरी लोकल गवर्नमेंट को भी भेजी है।
मेयर की ओर से जो भी प्रश्न पूछे गए हैं, उनके उचित जवाब जल्द दे दिए जाएंगे। - विनय प्रताप सिंह, आयुक्त व डीसी