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104 किमी हाईवे का चौड़ीकरण अधर में

Wed, 05 Feb 2014 12:01 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला Updated Wed, 05 Feb 2014 12:01 PM IST
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Objected to only 700 meters and 104 km of highway construction pending

नेशनल हाईवे-73 की 104 किलोमीटर सड़क (पंचकूला-यमुनानगर) को फोरलेन बनाने का प्रोजेक्ट सिर्फ 700 मीटर के टुकड़े की वजह से अटका पड़ा है।

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यह 700 मीटर का टुकड़ा नाडा साहिब से लेकर मोरनी टी-प्वाइंट के बीच है। यह टुकड़ा वन विभाग के इको सेंसेटिव जोन में अता है। इसलिए वन विभाग एनओसी नहीं दे रहा है, जबकि इस क्षेत्र में पहले कई निर्माण हो चुके हैं।
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निर्माण की मंजूरी नहीं मिलने के कारण अब हाईवे का ठेका लेने वाली कंपनी ने भी पत्र लिखकर इस प्रोजेक्ट से अलग होने की बात कह डाली है।

यह खुलासा हुआ है आरटीआई में, जो शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष एडवोकेट विजय बंसल ने जुटाई है।

आरटीआई में मिली जानकारी से पता चला कि पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से अभी तक इको सेंसेटिव जोन वाले क्षेत्र में पेड़ काटने संबंधी एनओसी नहीं मिली है।

मोरनी के डीएफओ ने इतना समय गुजर जाने के बाद भी रिपोर्ट नहीं दी, जबकि करीब दो साल पहले फोरलेनिंग का काम शुरू हो जाना चाहिए था।

इतना ही नहीं, निर्माण कार्य शुरू होने में देरी के चलते निर्माण कंपनी ने गत 31 जनवरी को नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी एनएचएआई को पत्र लिखा और ठेका रद्द करने की बात कही।
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हवाला दिया कि कंपनी नुकसान नहीं झेल सकती।

अफसरों की लापरवाही से देरी
ऐसा नियम है कि जब तक एनएचएआई पूरी क्लीयरेंस करके नहीं देगी, तब तक निर्माण शुरू नहीं हो सकता।

तीन जनवरी को एनएचएआई ने हरियाणा के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कहा था कि अफसरों की लापरवाही से प्रोजेक्ट में देरी हो रही है। यह सभी तथ्य आरटीआई में सामने आए हैं।

तो बाकी निर्माण कैसे हो गए?
एडवोकेट विजय बंसल व एडवोकेट रवि शर्मा ने आरोप लगाया गया कि सिर्फ 700 मीटर सड़क को इको सेंसेटिव जोन में बताकर एनओसी नहीं दी जा रही, जबकि इस क्षेत्र में होटल, स्कूल व अन्य निर्माण पहले ही हो चुके हैं।

इसके बावजूद जनहित के लिए चौड़ा होने वाले हाईवे पर रोक लगाई जा रही है। इस संबंध में प्रधानमंत्री को भी एक ज्ञापन भेजा गया है।

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