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Chandigarh News: अब दूसरी आईटी कमेटी करेगी जीएमसीएच 32 में हुए फर्जीवाड़े की जांच

Sun, 07 May 2023 01:46 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 07 May 2023 01:46 AM IST
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Now the second IT committee will investigate the forgery in GMCH 32
चंडीगढ़। जीएमसीएच-32 में नर्सिंग ऑफिसरों की भर्ती में हुए फर्जीवाड़े की जांच अब नए सिरे से होगी। अस्पताल प्रशासन ने अभ्यर्थियों की ओर से फर्जी सीसीसी (कोर्स ऑन कंप्यूटर कॉन्सेप्ट्स) प्रमाणपत्र लगाने की आशंका को देखते हुए आईटी विभाग के अधिकारियों की नई कमेटी गठित कर दी है। यह कमेटी नियुक्ति संबंधी साक्ष्यों की बारीकी से जांच कर अपनी रिपोर्ट देगी। बता दें कि अमर उजाला ने अपने छह मई के अंक में नर्सिंग ऑफिसरों की भर्ती में बड़ी संख्या में फर्जी सीसीसी प्रमाणपत्र लगाने की आशंका जताते हुए एक ऐसे गिरोह का खुलासा किया था जो यूट्यूब पर विज्ञापन देकर 5 से 10 दिन में फर्जी प्रमाणपत्र बना रहा है। इस गिरोह ने अमर उजाला संवाददाता से यह भी कहा था कि प्रमाणपत्र बनाने के साथ वह परीक्षा भी दिलवा देंगे। प्रमाण पत्र के लिए छह हजार रुपये मांगे गए। खबर प्रकाशित होने के बाद अस्पताल प्रबंधन हरकत में आया और नियुक्तियों के दौरान अभ्यर्थियों की ओर से दिए गए दस्तावेजों व प्रमाणपत्रों की फिर से जांच कराने का फैसला लिया।
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जीएमसीएच-32 के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुधीर गर्ग ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि मामले में फर्जी उम्मीदवारों के पकड़े जाने के बाद छह सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई थी। कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी है लेकिन अब मामले की नए सिरे से जांच कराने का निर्णय लिया गया है। स्वास्थ्य निदेशक के निर्देश पर दोबारा नई कमेटी गठित कर दी गई है, जो सोमवार से मामले में जांच शुरू करेगी। डॉ. सुधीर गर्ग ने बताया कि नियुक्तियों में राष्ट्रीय स्तर के चार मान्यता प्राप्त संस्थाओं के कंप्यूटर सर्टिफिकेट वाले अभ्यर्थियों को चयनित किया गया है लेकिन आशंका है कि अभ्यर्थियों ने फर्जी प्रमाणपत्रों का प्रयोग किया है इसलिए मामले की जांच के लिए उन सभी संस्थाओं को पत्र लिख दिया गया है कि वे अपने यहां से जारी किए गए प्रमाणपत्रों की पुनः जांच करवा लें। साथ ही कहा है कि प्रमाणपत्र जारी करने वाली एजेंसी से भी इसकी रिपोर्ट लेकर हमें सौंपें।
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नियुक्ति करने वाली पूरी कमेटी सवालों के घेरे में
उधर, सूत्रों का कहना है कि गड़बड़ी सामने आने के बाद से एक के बाद एक जांच कमेटी गठित कर मामले को डायवर्ट करने की कोशिश की जा रही है। नियुक्तियों के दौरान साक्ष्य की प्रमाणिकता जांच करने वाली कमेटी में शामिल असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट, सीनियर नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट और लिपिक संवर्ग के कर्मचारियों के सत्यापन प्रक्रिया को कठघरे में खड़ा किया जाना चाहिए क्योंकि इनके सत्यापन के बाद ही डायरेक्टर प्रिंसिपल, जेडीए, चिकित्सा अधीक्षक, लीगल एडवाइजर व एचए 1 ब्रांच के सुपरिंटेंडेंट नियुक्तियों पर फाइनल मुहर लगाते हैं। ऐसे में अगर पूरी प्रक्रिया पर गौर किया जाए तो नियुक्ति करने वाली अस्पताल की पूरी कमेटी ही शक के दायरे में आ जाती है।
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30 अभ्यर्थियों ने मांगी है एक्सटेंशन
जानकारी के अनुसार, 182 पदों पर हुई नियुक्तियों में से चयनित 30 अभ्यर्थियों ने तैनाती की समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, यह सभी अभ्यर्थी मौजूदा समय में किसी न किसी चिकित्सा संस्थान में कार्यरत हैं। इसके कारण वह नई तैनाती में असमर्थ हैं। वहीं, ओबीसी कोटे को लेकर न्यायालय में केस विचाराधीन होने के कारण कुछ सीटें खाली हैं जबकि एक्स सर्विसमैन के कोटे की आधे से ज्यादा सीटें इस वजह से नहीं भरी जा सकीं क्योंकि इसके लिए काफी कम आवेदन आया था।

नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया एक नजर में
- 182 पद
- 28 अगस्त 2022 को 39 केंद्रों पर परीक्षा
- 10594 उम्मीदवार हुए शामिल
- तीन चरण में हुई लिखित परीक्षा
- 4 फर्जी उम्मीदवारों को पकड़ा गया
- मामले पर पहले 6 सदस्यीय जांच कमेटी गठित
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