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प्रशासन जांचेगा, कितने टावर हैं नियमानुसार
अमर उजाला ब्यूरो/सर्वेश कुमार
Updated Tue, 04 Feb 2014 08:46 AM IST
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शहर में घनी आबादी के बीच जगह-जगह लगे मोबाइल टावरों पर लगातार उठ रहे सवालों के बाद प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है।
टावरों के लिए बने बायलॉज में रिहायशी इलाकों से कम से कम 50 मीटर की दूरी तय की गई है। इसके बावजूद सेक्टर-10 सहित कई सेक्टरों में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इससे लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है।
अब प्रशासन यह देखेगा कि तय मानकों के लिहाज से कितने मोबाइल टावर खरे उतर रहे हैं और कितने नहीं?
सर्विस प्रोवाइडरों से प्रशासन द्वारा मोबाइल टावरों का ब्योरा मांगा जाएगा और यदि जांच में नियमों की अनदेखी पाई गई तो कार्रवाई की जाएगी। डीसी ने कहा कि लोगों की सेहत से खिलवाड़ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जिलेभर में करीब 200 टावर
जिले में करीब 200 मोबाइल टावर लगाए गए हैं, लेकिन कुछ ऐसे हैं जो रिहायशी इलाके से तय न्यूनतमम दूरी के अंदर हैं।
यह मामला उस वक्त सामने आया, जब नियमों की अनेदखी कर हुडा की ओर से पार्कों में 33 टावरों को लगाने की अनुमति दे दी गई थी।
इस मामले में हुडा और नगर निगम के अधिकारियों पर राजनीतिक पार्टियों की तरफ से आरोप भी लगाए जा रहे हैं।
टावरों के तरंगों से कैंसर तक का खतरा
नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष बीबी सिंघल ने आईआईटी मुंबई के प्रोफेसर गिरीश के अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि मोबाइल टावरों से निकलने वाले रेडियो तरंगों की वजह से अनिद्रा, सुस्ती, माताओं और बच्चों को कैंसर सहित कई बीमारियों का खतरा होता है।
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साथ ही पुराने बने कुछ मकानों पर भी टावर लगाए गए हैं, जिनकी बुनियाद कमजोर होने की वजह से हादसे का खतरा है।
उन्होंने कहा कि टावरों के लिए कुछ जगह निश्चित किए जाने चाहिए, जो रिहायशी मकानों से थोड़ी दूर हो। वहीं, विधायक डीके बंसल ने भी नियमों की अनेदखी करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने की वकालत की है।
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टावरों के लिए बने बायलॉज में रिहायशी इलाकों से कम से कम 50 मीटर की दूरी तय की गई है। इसके बावजूद सेक्टर-10 सहित कई सेक्टरों में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इससे लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है।
अब प्रशासन यह देखेगा कि तय मानकों के लिहाज से कितने मोबाइल टावर खरे उतर रहे हैं और कितने नहीं?
सर्विस प्रोवाइडरों से प्रशासन द्वारा मोबाइल टावरों का ब्योरा मांगा जाएगा और यदि जांच में नियमों की अनदेखी पाई गई तो कार्रवाई की जाएगी। डीसी ने कहा कि लोगों की सेहत से खिलवाड़ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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जिलेभर में करीब 200 टावर
जिले में करीब 200 मोबाइल टावर लगाए गए हैं, लेकिन कुछ ऐसे हैं जो रिहायशी इलाके से तय न्यूनतमम दूरी के अंदर हैं।
यह मामला उस वक्त सामने आया, जब नियमों की अनेदखी कर हुडा की ओर से पार्कों में 33 टावरों को लगाने की अनुमति दे दी गई थी।
इस मामले में हुडा और नगर निगम के अधिकारियों पर राजनीतिक पार्टियों की तरफ से आरोप भी लगाए जा रहे हैं।
टावरों के तरंगों से कैंसर तक का खतरा
नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष बीबी सिंघल ने आईआईटी मुंबई के प्रोफेसर गिरीश के अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि मोबाइल टावरों से निकलने वाले रेडियो तरंगों की वजह से अनिद्रा, सुस्ती, माताओं और बच्चों को कैंसर सहित कई बीमारियों का खतरा होता है।
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साथ ही पुराने बने कुछ मकानों पर भी टावर लगाए गए हैं, जिनकी बुनियाद कमजोर होने की वजह से हादसे का खतरा है।
उन्होंने कहा कि टावरों के लिए कुछ जगह निश्चित किए जाने चाहिए, जो रिहायशी मकानों से थोड़ी दूर हो। वहीं, विधायक डीके बंसल ने भी नियमों की अनेदखी करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने की वकालत की है।