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राहतः चंडीगढ़ में अब जरुरतमंद करा सकेंगे मुफ्त मकोर्निया ट्रांसप्लांट, खुलेगा पहला आई बैंक
Wed, 18 Mar 2020 12:59 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Wed, 18 Mar 2020 12:59 PM IST
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देशभर से अब तक तीन लाख पंद्रह हजार लोगों का मुफ्त उपचार कर चुके सेक्टर-18 स्थित गुरु का लंगर चैरिटेबल आई हॉस्पिटल में उत्तर भारत का पहला आई बैंक खुलने जा रहा है। यह जानकारी आई हॉस्पिटल के जनरल सेक्रेटरी एचएस सभ्रवाल ने मंगलवार को प्रेसवार्ता में दी। इस बैंक के खुलने से दृष्टिहीन लोगों की जिंदगी में उजाला आएगा।
उन्होंने बताया कि आई बैंक की शुरुआत को स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से निरीक्षण के लिए दिल्ली से डॉक्टरों की टीम आई थी। इसके बाद आई बैंक के लिए जागरूकता फैलाने का निर्देश दिया गया है। जिनकी आंखों की रोशनी जा चुकी है, अब वह मुफ्त कोर्निया ट्रांसप्लांट करा सकेंगे।
इसकी शुरुआत से पहले जन जागरूकता मुहिम चलाई जाएगी। इसके तहत चैरिटेबल आई हॉस्पिटल की ओर से पांच सदस्यीय टीम मंदिर, गुरुद्वारा, स्कूल, कॉलेज और अन्य संस्थानों में नेत्र दान के लिए लोगों को जागरूक करेगी। नेत्रदान करने वालों के परिवारों को सम्मानित भी किया जाएगा।
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एचएस सभ्रवाल ने बताया कि पीजीआई में कोर्निया ट्रांसप्लांट के लिए 25 से 30 हजार रुपये खर्च के साथ लगभग 4 साल की वेटिंग है। इस आई बैंक की शुरुआत होते ही मात्र एक हफ्ते में मरीज का मुफ्त कोर्निया ट्रांसप्लांट कर डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। इसके अलावा मरीजों के रहने व खाने की व्यवस्था भी हॉस्पिटल की तरफ से होगी। कोर्निया ट्रांसप्लांट के लिए मृतक की आंख को सुरक्षित रखने के लिए अमेरिका से सवा करोड़ की एक मशीन मंगवाई है।
आई हॉस्पिटल के प्रवक्ता रविंदर सिंह बिल्ला ने बताया कि सौरभ केमिकल की ओर से आई हॉस्पिटल को 28 लाख रुपये कीमत की एक मशीन भी डोनेट की गई। सौरभ केमिकल के चेयरमैन परवीन गोयल ने कहा कि डेढ़ साल पहले उन्हें इस हॉस्पिटल के बारे में पता चला था।
उसके बाद लगभग 20 दिन उन्होंने आसपास के लोगों से पूछताछ की और सोशल मीडिया से वीडियो देखकर पड़ताल की। सारी जानकारी सही पाते हुए उन्होंने हॉस्पिटल को समाजसेवा के लिए मशीन को सौंपी। इस मशीन में डोनेट की गई आंखों की स्ट्रेंथ की जांच की जा सकेगी। परवीन गोयल अब तक डेराबस्सी के उन लगभग 15 स्कूलों को रेनोवेट करा चुके हैं, जिनमें बच्चों के बैठने और मिड-डे मील शेड तक की व्यवस्था नहीं थी।
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उन्होंने बताया कि आई बैंक की शुरुआत को स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से निरीक्षण के लिए दिल्ली से डॉक्टरों की टीम आई थी। इसके बाद आई बैंक के लिए जागरूकता फैलाने का निर्देश दिया गया है। जिनकी आंखों की रोशनी जा चुकी है, अब वह मुफ्त कोर्निया ट्रांसप्लांट करा सकेंगे।
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इसकी शुरुआत से पहले जन जागरूकता मुहिम चलाई जाएगी। इसके तहत चैरिटेबल आई हॉस्पिटल की ओर से पांच सदस्यीय टीम मंदिर, गुरुद्वारा, स्कूल, कॉलेज और अन्य संस्थानों में नेत्र दान के लिए लोगों को जागरूक करेगी। नेत्रदान करने वालों के परिवारों को सम्मानित भी किया जाएगा।
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एचएस सभ्रवाल ने बताया कि पीजीआई में कोर्निया ट्रांसप्लांट के लिए 25 से 30 हजार रुपये खर्च के साथ लगभग 4 साल की वेटिंग है। इस आई बैंक की शुरुआत होते ही मात्र एक हफ्ते में मरीज का मुफ्त कोर्निया ट्रांसप्लांट कर डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। इसके अलावा मरीजों के रहने व खाने की व्यवस्था भी हॉस्पिटल की तरफ से होगी। कोर्निया ट्रांसप्लांट के लिए मृतक की आंख को सुरक्षित रखने के लिए अमेरिका से सवा करोड़ की एक मशीन मंगवाई है।
आई हॉस्पिटल के प्रवक्ता रविंदर सिंह बिल्ला ने बताया कि सौरभ केमिकल की ओर से आई हॉस्पिटल को 28 लाख रुपये कीमत की एक मशीन भी डोनेट की गई। सौरभ केमिकल के चेयरमैन परवीन गोयल ने कहा कि डेढ़ साल पहले उन्हें इस हॉस्पिटल के बारे में पता चला था।
उसके बाद लगभग 20 दिन उन्होंने आसपास के लोगों से पूछताछ की और सोशल मीडिया से वीडियो देखकर पड़ताल की। सारी जानकारी सही पाते हुए उन्होंने हॉस्पिटल को समाजसेवा के लिए मशीन को सौंपी। इस मशीन में डोनेट की गई आंखों की स्ट्रेंथ की जांच की जा सकेगी। परवीन गोयल अब तक डेराबस्सी के उन लगभग 15 स्कूलों को रेनोवेट करा चुके हैं, जिनमें बच्चों के बैठने और मिड-डे मील शेड तक की व्यवस्था नहीं थी।