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अब पंजाब में लाइसेंस धारक दो ही हथियार रख सकेंगे, विवाह समारोह में फायरिंग पर दो साल कैद
Thu, 25 Jun 2020 10:47 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Thu, 25 Jun 2020 10:47 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : सोशल मीडिया
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पंजाब में अब लाइसेंस धारक अपने पास केवल दो हथियार रख सकता है। इससे पहले तीन हथियार रखने की अनुमति थी। पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार के आर्म्स (संशोधन) एक्ट 2019 को राज्य में प्रभावी कर दिया है। इसी के तहत पंजाब में इसमें संशोधन किया गया है।
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अब नया नियम लागू होने के बाद पंजाब में सभी लाइसेंसधारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने पास रखे 2 से अधिक हथियारों को 13 दिसंबर, 2020 तक अधिकृत हथियार डीलर के पास जमा करवाएं। अगर कोई व्यक्ति सशस्त्र सेनाओं का सदस्य है तो उसे अपनी यूनिट की आर्मरी (हथियार रखने की जगह) में 1 साल के बीच हथियार जमा कराने को कहा गया है।
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इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति किसी पुलिस कर्मचारी या सेना के जवान से जबरन हथियार छीनने की कोशिश करता है तो उसे 10 साल कैद से लेकर उम्रकैद तक की सजा और जुर्माना भुगतना होगा। पुलिस या सेना से हथियार छीनने की कोशिश करने वाले को अब कम से कम 10 साल की कैद और अधिकतम उम्रकैद हो सकती है। इससे पहले यह सजा 3 से 7 साल तक थी। अपराधी को कैद के साथ जुर्माना भी भुगतना होगा।
विवाह समारोह में फायरिंग पर दो साल कैद
पंजाब में विवाह समारोहों और अन्य कार्यक्रमों में रुतबा और शक्ति प्रदर्शन करने के उद्देश्य से हवाई फायर करने की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए संशोधित एक्ट के सेक्शन 259 में प्रावधान कर दिया गया है। इसके तहत अगर कोई व्यक्ति सार्वजनिक, भीड़, धार्मिक स्थान, विवाह व अन्य समारोहों के मौके पर सेलिब्रिटी गन फायर करता है तो उसे कम से कम 2 साल की कैद और एक लाख रुपये जुर्माना होगा।
पंजाब में शस्त्र लाइसेंस की मियाद तीन साल से बढ़ाकर पांच साल की
संशोधित एक्ट के सेक्शन 3 के तहत शस्त्र लाइसेंस की मियाद को 3 से बढ़ाकर 5 साल कर दिया गया है। इसके साथ ही नए और पुराने लाइसेंस के नवीनीकरण की नियत भी अब 5 साल होगी। लाइसेंस धारक को अपना लाइसेंस और उस पर दर्ज हथियार व कारतूस संबंधित लाइसेंसिंग अथॉरिटी के समक्ष तस्दीक के लिए पेश करने होंगे।
सजाओं में भी हुआ इजाफा
आर्म्स एक्ट 1959 के सेक्शन 25 के तहत, हथियारों के इस्तेमाल संबंधी नियमों का उल्लंघन करने पर निर्धारित की गई सजाओ में भी संशोधित एक्ट के तहत इजाफा कर दिया गया है। पुलिस या सेना से हथियार छीनने की कोशिश करने वाले को अब कम से कम 10 साल की कैद और अधिकतम उम्रकैद हो सकती है। इससे पहले यह सजा 3 से 7 साल तक थी। अपराधी को कैद के साथ जुर्माना भी भुगतना होगा। सेक्शन 25 के सब सेक्शन 6 के तहत ऑर्गेनाइज्ड क्राइम सिंडिकेट के लिए नई सजाएं तय की गई हैं।
अगर ऑर्गेनाइज्ड क्राइम सिंडिकेट के सदस्य यहां उनसे संबंधित किसी व्यक्ति से गैर लाइसेंसी हथियार बरामद किए जाते हैं या अवैध हथियार ले जाते हुए वह पकड़ा जाता है तो उसके लिए कम से कम 10 साल या अधिकतम उम्रकैद की सजा जुर्माने सहित होगी। सब सेक्शन 7 के तहत अवैध हथियार बनाने, खरीदने, बेचने, बदलने, रिपेयर करने के मामले में अगर कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसे भी कम से कम 10 साल और अधिकतम उम्रकैद की सजा जुर्माने सहित होगी। यही सजा हथियारों की तस्करी करने वाले अपराधियों पर भी लागू होगी।
सजाओं में भी हुआ इजाफा
आर्म्स एक्ट 1959 के सेक्शन 25 के तहत, हथियारों के इस्तेमाल संबंधी नियमों का उल्लंघन करने पर निर्धारित की गई सजाओ में भी संशोधित एक्ट के तहत इजाफा कर दिया गया है। पुलिस या सेना से हथियार छीनने की कोशिश करने वाले को अब कम से कम 10 साल की कैद और अधिकतम उम्रकैद हो सकती है। इससे पहले यह सजा 3 से 7 साल तक थी। अपराधी को कैद के साथ जुर्माना भी भुगतना होगा। सेक्शन 25 के सब सेक्शन 6 के तहत ऑर्गेनाइज्ड क्राइम सिंडिकेट के लिए नई सजाएं तय की गई हैं।
अगर ऑर्गेनाइज्ड क्राइम सिंडिकेट के सदस्य यहां उनसे संबंधित किसी व्यक्ति से गैर लाइसेंसी हथियार बरामद किए जाते हैं या अवैध हथियार ले जाते हुए वह पकड़ा जाता है तो उसके लिए कम से कम 10 साल या अधिकतम उम्रकैद की सजा जुर्माने सहित होगी। सब सेक्शन 7 के तहत अवैध हथियार बनाने, खरीदने, बेचने, बदलने, रिपेयर करने के मामले में अगर कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसे भी कम से कम 10 साल और अधिकतम उम्रकैद की सजा जुर्माने सहित होगी। यही सजा हथियारों की तस्करी करने वाले अपराधियों पर भी लागू होगी।