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अमर उजाला एक्सक्लूसिव : अब संसद मार्च नहीं करेंगे किसान, नेताओं में कलह
Mon, 19 Apr 2021 05:24 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अंकित चौहान, सोनीपत
अंकित चौहान, सोनीपत
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 19 Apr 2021 05:24 AM IST
सार
- संयुक्त मोर्चा में शामिल पंजाब के अधिकतर संगठनों के नेता परिस्थितियों को देखते हुए संसद मार्च के विरोध में खड़े हुए
- संयुक्त मोर्चा की बैठक में मार्च को लेकर घंटों हंगामा भी हुआ
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किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
संसद मार्च को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा में कलह हो गई है और पंजाब व हरियाणा के नेता आमने-सामने होने के कारण संसद मार्च को रद्द कर दिया गया है। जहां संयुक्त किसान मोर्चा में शामिल पंजाब के अधिकतर संगठनों के नेता परिस्थितियों को देखते हुए संसद मार्च के विरोध में खड़े हुए। वहीं हरियाणा व यूपी के किसान नेता संसद मार्च करने पर अड़े हुए थे।
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इसको लेकर ही संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में घंटों तक हंगामा भी चला और नेताओं के बीच आपस में खींचतान होने के बाद दिल्ली मार्च को फिलहाल रद्द कर दिया गया। फिलहाल दिल्ली की सीमा पर लगे मोर्चों को मजबूत करने पर जोर रहेगा और दिल्ली मार्च के लिए परिस्थिति को देखते हुए बाद में रणनीति बनाई जा सकती है।
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कृषि कानून रद्द कराने की मांग को लेकर किसान पिछले साढ़े चार महीने से दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए है। किसानों ने जब आंदोलन शुरू किया था तो करीब दो महीने तक सरकार व किसानों के बीच बातचीत का दौर चलता रहा। किसानों व सरकार के बीच 11 दौर की बातचीत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं निकल सका। किसानों व सरकार के बीच बातचीत चल रही थी तो किसानों को कोई हल निकलने की उम्मीद थी, लेकिन अब आंदोलन लंबा होता जा रहा है और सरकार से ढ़ाई महीने से ज्यादा से कोई बातचीत भी नहीं हो रही है। ऐसे में किसानों का धैर्य टूटता देखकर मई के शुरूआत में संसद तक पैदल मार्च का एलान किया गया था। लेकिन अब संसद मार्च को लेकर पंजाब व हरियाणा के किसान संगठनों में कलह हो गई है।
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संसद मार्च की रणनीति को लेकर ही दो दिन पहले पंजाब के किसान संगठनों की बैठक हुई थी, जिसमें 29 संगठनों ने संसद मार्च करने से साफ इंकार कर दिया तो तीन संगठन संसद मार्च करने के लिए तैयार दिखे। उसके बाद शनिवार देर शाम तक संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक चली, जिसमें संसद मार्च करने से पंजाब के संगठनों ने इंकार कर दिया। जबकि हरियाणा के किसान संगठनों के साथ ही यूपी के एक संगठन ने संसद मार्च जरूर करने की बात कही और इसको लेकर हरियाणा व पंजाब के किसान नेताओं के बीच काफी देर तक खींचतान होती रही।
इस तरह से संसद मार्च को लेकर संगठनों में कलह होने से उसे फिलहाल रद्द कर दिया गया। किसान नेताओं का दावा है कि इस समय परिस्थितियां अनुकूल नहीं है, जिसको देखते हुए संसद मार्च नहीं करने का फैसला लिया गया है। संसद मार्च को लेकर अभी कोई विचार नहीं है और आगे परिस्थिति देखते हुए कोई फैसला लिया जा सकता है।
संसद मार्च को रद्द कर दिया गया है। अब यह कहना ठीक नहीं होगा कि कौन संसद मार्च चाहता था और कौन नहीं चाहता था। अभी आगे संसद मार्च करने को लेकर भी कोई विचार नहीं है। यह जरूर है कि आगे परिस्थितियों के देखते हुए आंदोलन की रणनीति बनेगी और उसके अनुसार ही संसद मार्च को लेकर फैसला हो सकता है। इस समय धरनास्थलों पर भीड़ बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
-गुरनाम सिंह चढूनी, अध्यक्ष भाकियू हरियाणा