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Chandigarh News: पीजीआई में अब 15 नहीं चार घंटे में मिलेगी खून जांच रिपोर्ट
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चंडीगढ़। पीजीआई में अब खून की जांच रिपोर्ट 15 घंटे के बजाय 4 से 6 घंटे में मिल जाएगी। मशीन से ही स्लाइड बनेगी और गंभीर बीमारियों से जुड़ी जांच जल्द हो सकेगी। इसके लिए पीजीआई की न्यू ओपीडी बिल्डिंग में एडवांस हीमोग्राम लैब का संचालन शुरू कर दिया गया है। निदेशक प्रो. विवेक लाल ने मंगलवार को इस लैब का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि इसे और ज्यादा बेहतर बनाने की कोशिश है ताकि ज्यादा से ज्यादा मरीजों को इसका लाभ मिले।
इस लैब में हीमोग्लोबिन, प्लेटलेट काउंट और व्हाइट ब्लड सेल काउंट के साथ-साथ डिफरेंशियल काउंट, रेटिकुलोसाइट काउंट जैसे परीक्षण होंगे। वहीं, अधिक सुविधाओं वाली नई मशीनों की मदद मदद से फ्लोरोसेंट प्लेटलेट काउंट (डेंगू जांच में उपयोगी), रेटिकुलोसाइट हीमोग्लोबिन सामग्री के माध्यम से एनीमिया रोगियों में आयरन की कमी का शीघ्र पता लगाना, खंडित लाल रक्त कोशिकाओं को ढूंढना और संक्रमण व रक्त कैंसर के रोगियों में असामान्य कोशिकाओं को ढूंढना आसान हो जाएगा।
बॉक्स
बढ़ेगी जांच की क्षमता
लैब में स्थापित नई मशीनों से पहले की तुलना में एक बार में ज्यादा नमूनों की जांच हो सकेगी। इससे ज्यादा मरीजों को कम समय में बेहतर सुविधा प्राप्त हो सकेगी। हेमेटोलॉजी विभाग की प्रमुख प्रो. रीना दास ने कहा कि बुनियादी परीक्षण अक्सर सबसे महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि वे रोगियों की सबसे बड़ी संख्या को प्रभावित करते हैं। क्लिनिकल हेमटोलॉजी और मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. पंकज मल्होत्रा ने सही समय पर सटीक रिपोर्टों की उपलब्धता पर संतोष जताते हुए कहा कि गंभीर बीमारियों में इसकी भूमिका बेहद अहम है। इस अवसर पर डीडीए कुमार गौरव, वित्तीय सलाहकार कुमार अभय और चिकित्सा अधीक्षक प्रो. विपिन कौशल भी मौजूद थे।
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इस लैब में हीमोग्लोबिन, प्लेटलेट काउंट और व्हाइट ब्लड सेल काउंट के साथ-साथ डिफरेंशियल काउंट, रेटिकुलोसाइट काउंट जैसे परीक्षण होंगे। वहीं, अधिक सुविधाओं वाली नई मशीनों की मदद मदद से फ्लोरोसेंट प्लेटलेट काउंट (डेंगू जांच में उपयोगी), रेटिकुलोसाइट हीमोग्लोबिन सामग्री के माध्यम से एनीमिया रोगियों में आयरन की कमी का शीघ्र पता लगाना, खंडित लाल रक्त कोशिकाओं को ढूंढना और संक्रमण व रक्त कैंसर के रोगियों में असामान्य कोशिकाओं को ढूंढना आसान हो जाएगा।
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बढ़ेगी जांच की क्षमता
लैब में स्थापित नई मशीनों से पहले की तुलना में एक बार में ज्यादा नमूनों की जांच हो सकेगी। इससे ज्यादा मरीजों को कम समय में बेहतर सुविधा प्राप्त हो सकेगी। हेमेटोलॉजी विभाग की प्रमुख प्रो. रीना दास ने कहा कि बुनियादी परीक्षण अक्सर सबसे महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि वे रोगियों की सबसे बड़ी संख्या को प्रभावित करते हैं। क्लिनिकल हेमटोलॉजी और मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. पंकज मल्होत्रा ने सही समय पर सटीक रिपोर्टों की उपलब्धता पर संतोष जताते हुए कहा कि गंभीर बीमारियों में इसकी भूमिका बेहद अहम है। इस अवसर पर डीडीए कुमार गौरव, वित्तीय सलाहकार कुमार अभय और चिकित्सा अधीक्षक प्रो. विपिन कौशल भी मौजूद थे।
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