कांग्रेस में अब शुरू होगी असली जंग, परगट-सिद्धू पर कैप्टन को कामयाबी
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लंबे मंथन के बाद भी कांग्रेस देर से उम्मीदवार घोषित करने की अपनी परंपरा से बाहर नहीं निकल सकी। पार्टी ने वीरवार को अपने 61 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी।
पर इनमें सभी वे उम्मीदवार हैं, जिनके नाम पर किसी को एतराज नहीं था।
इन्हें टिकट मिलना पहले दिन से ही तय माना जा रहा था। इससे साफ है कि कांग्रेस में असली जंग तो अब शुरू होगी। कांग्रेस में शुरू से ही तमाम विवादों के बीच देर से टिकट घोषित करने की परंपरा रही है। लेकिन इस बार लग रहा था कि माहौल कैप्टन अमरिंदर सिंह और कांग्रेस के पक्ष में है।
अगर पार्टी जल्द उम्मीदवार घोषित करेगी तो फायदा मिलेगा। लेकिन इतने दिन चलीं स्क्रीनिंग कमेटी और इलेक्शन कमेटी की बैठकों के बाद भी नतीजा सिफर रहा। विवादित सीटों पर कोई फैसला नहीं हो सका।
इस लिस्ट से साफ है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह को फ्री-हैंड नहीं मिल पा रहा है। लेकिन यह भी तय है कि कैप्टन विरोधी भी अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाए हैं। कैप्टन, इंदरबीर सिंह बोलारिया और सरवन सिंह फिल्लौर को अकाली दल से शामिल करा कर टिकट देना चाहते थे, पर पहली लिस्ट में नहीं मिला।
विवादित सीटों पर नहीं हो सका फैसला
लेकिन कैप्टन भी परगट सिंह और नवजोत कौर सिद्धू का टिकट रुकवाने में कामयाब हो गए जबकि, इन्हें सीधे राहुल गांधी ने टिकट का वादा किया था। इनके शामिल होने में कैप्टन की भूमिका नहीं थी।
हालांकि बठिंडा से कैप्टन की इच्छा सुरिंदर सिंगला को लड़ाने की थी, पर पार्टी ने मनप्रीत बादल को टिकट दे दिया। जालंधर से मोहिंदर सिंह केपी और लुधियाना से राकेश पांडे का नाम पहली लिस्ट में न होना कांग्रेसियों के लिए हैरानीजनक रहा।
वहीं, लुधियाना से टिकट चाह रहे मनीष तिवारी की भी नहीं चली। पहले स्क्रीनिंग कमेटी में प्रदेश प्रधान और सीएलपी लीडर, दोनों ही बड़े कद के नेता होते थे। इस बार सीएलपी लीडर चरनजीत चन्नी थे, तो माना जा रहा था कि कैप्टन की ही चलेगी लेकिन बाकी सभी नेता कैप्टन के खिलाफ लामबंद हो गए हैं। प्रताप बाजवा और शमशेर दूलो तो उनके विरोधी थे ही, अंबिका सोनी, रवनीत बिट्टू और चौधरी संतोख भी उनके खिलाफ मुखर हो गए हैं।
पर हाईकमान पावर बैलेंस बना कर चल रहा है, इसीलिए राहुल ने बुधवार को सबके साथ मीटिंग कर साफ कह दिया है कि विवादित सीटों पर सहमति बनाने के बाद ही घोषणा की जाए ताकि बगावत न झेलनी पड़े। इन हालातों से साफ है कि अब दिल्ली में घमासान और बढ़ेगा। इसके चलते बाकी उम्मीदवारों के एलान में अब काफी वक्त भी लग सकता है।