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Hindi News ›   Chandigarh ›   Notice to Haryana government on the petition of DSP Joginder Sharma

Haryana News: डीएसपी जोगिंदर शर्मा की याचिका पर हरियाणा सरकार को नोटिस, आईपीएस पदोन्नति पर लटकी तलवार

Tue, 09 Jan 2024 08:46 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 09 Jan 2024 08:46 PM IST
सार

याची ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय खेल में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर उन्हें राज्य सरकार ने 2007 में डीएसपी नियुक्त किया था। चार सितंबर 2007 के नियुक्ति पत्र में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि वह दो साल की अवधि के लिए प्रोबेशन पर रहेंगे, जिसमें प्रशिक्षण की अवधि आदि शामिल होगी। 

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Notice to Haryana government on the petition of DSP Joginder Sharma
डीएसपी जोगिंदर शर्मा। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

हरियाणा सरकार को बड़ा झटका देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने डीएसपी की आईपीएस के तौर पर पदोन्नति की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली डीएसपी जोगिंदर शर्मा की याचिका पर हरियाणा सरकार व अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अगर याचिका लंबित रहते पदोन्नति की जाती हैं तो यह याचिका पर आने वाले अंतिम फैसले पर निर्भर होंगी। ऐसे में इस पदोन्नति प्रक्रिया पर तलवार लटक गई है।

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याचिका दाखिल करते हुए पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी जोगिंदर शर्मा ने बताया कि आईपीएस के तौर पर पदोन्नति के लिए 2021 की चयन सूची तैयार की है। इस सूची के लिए राज्य पुलिस सेवा के 12 अधिकारियों के नाम पर विचार किया जा रहा है। याची ने बताया कि वह 2007 में राज्य पुलिस सेवा में शामिल हुआ था और बाकी सभी डीएसपी से पहले प्रोबेशन पूरा कर चुका है। बावजूद इसके उसके नाम पर विचार न कर 2009 बैच के अधिकारियों के नाम पर ही विचार किया जा रहा है।

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याची ने कहा कि सरकार का मानना है कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ही प्रोबेशन अवधि को पूर्ण मान सेवा को नियमित माना जाता है जबकि यह शर्त नियुक्ति पत्र एवं नियमों के विरुद्ध है व पूर्णत: अवैध है। नियुक्ति पत्र में ऐसा कोई उल्लेख नहीं है कि प्रोबेशन कंफर्म के लिए प्रशिक्षण पूरा करना आवश्यक है। याचिका के अनुसार नियम 10 को पढ़ने से यह स्पष्ट हो जाता है कि सेवा आरंभ करने वाला पूर्ण कर्मचारी के रूप में सेवा में शामिल किया गया है। प्रशिक्षण पूरा होने से पहले की याचिकाकर्ता की सेवा अवधि को जोड़ने से इन्कार नहीं किया जा सकता।

याची ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय खेल में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर उन्हें राज्य सरकार ने 2007 में डीएसपी नियुक्त किया था। चार सितंबर 2007 के नियुक्ति पत्र में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि वह दो साल की अवधि के लिए प्रोबेशन पर रहेंगे, जिसमें प्रशिक्षण की अवधि आदि शामिल होगी। 

याची ने कहा कि इसके अनुसार वह पांच अक्तूबर, 2009 को डीएसपी के पद पर कंफर्म होने के हकदार थे, या अधिकतम इसे एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता था। याची ने बताया कि उसे नौ जनवरी 2014 से कंफर्म किया गया, जो छह साल और तीन महीने की अवधि के बाद है। याची ने अपील की कि उसे 2009 से कंफर्म करने का आदेश दिया जाए और इससे होने वाले वरिष्ठता और पदोन्नति आदि अन्य सभी लाभ प्रदान किए जाएं। हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर स्पष्ट कर दिया कि 2021 की चयन सूची के लिए आईपीएस पद पर पदोन्नति इस याचिका के अंतिम फैसले पर निर्भर होगी।

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