चंडीगढ़। गोदरेज प्रोप्राइटर लिमिटेड की याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को सीबीआई को नोटिस जारी किया है। याचिका में कंपनी ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर और उससे जुड़ी कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है। याचिका में एफआईआर को आपराधिक तंत्र के दुरुपयोग का उदाहरण बताया गया है। सीबीआई चंडीगढ़ एंटी-करप्शन ब्रांच ने 30 जनवरी को कंपनी और अन्य के खिलाफ औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 में व्यावसायिक परिसरों द्वारा पर्यावरणीय मंजूरी की शर्तों के उल्लंघन के आरोप में मामला दर्ज किया था। कंपनी का तर्क है कि सीबीआई इस तथ्य को नजरअंदाज कर रही है कि गोवा फाउंडेशन मामला 3 जून, 2022 को अंतिम रूप से निपट चुका है और इसका परियोजना पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, क्योंकि पर्यावरणीय संवेदनशील क्षेत्र की सीमा 1 किलोमीटर तक ही सीमित है। कंपनी का दावा है कि परियोजना सुखना वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी से 6.6 किलोमीटर दूर स्थित है और एजेंसी इस तथ्य को नजरअंदाज कर रही है कि पर्यावरणीय मंजूरी 26 फरवरी, 2009 को पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की ओर से दी गई थी। कंपनी ने अपनी याचिका में कहा है कि सीबीआई की प्राथमिकी इस आधार पर दर्ज की गई है कि परियोजना को नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्डलाइफ से मंजूरी नहीं मिली, जबकि पर्यावरणीय मंजूरी में ऐसी कोई शर्त नहीं थी।
सीबीआई की यह कार्रवाई पूरी तरह से गलत आधार पर की गई है। याची पक्ष की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका पर सीबीआई को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।