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Budget 2018: हरियाणा में सिर्फ ‘हवा’ की चिंता, बाकी आस टूटी
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 02 Feb 2018 09:34 AM IST
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केंद्रीय मंत्री अरुण जेतली के आम बजट में हरियाणा में सिर्फ ‘हवा’ की चिंता दिखाई दी, बाकी सारी आस टूट गई। पराली प्रदूषण की वजह से आबोहवा सुधारने के लिए तो केंद्र सरकार हरियाणा पर मेहरबानी करेगी, लेकिन हरियाणा की इंडस्ट्री और पूर्व बजट में घोषित परियोजनाओं के लिए इस बजट में कुछ भी नहीं मिला।
हालांकि हरियाणा पिछले कई आम बजटों के दौरान बड़ी विकास परियोजनाओं के मामले में नजरअंदाजी झेल रहा है। उम्मीद थी कि अगले बरस लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार के इस बजट में हरियाणा के हिस्से में इतना कुछ आ जाएगा कि रुकी परियोजनाओं को रफ्तार मिलेगी और विकास की नई उम्मीद जगेगी। लेकिन जेटली की पोटली में से हरियाणा के लिए कुछ भी ऐसा नहीं निकला, जिसे हरियाणा के लिए बड़ी सौगात या बड़ी राहत कहा जा सके।
30 क्लस्टर परियोजनाओं को अभी और इंतजार
हरियाणा में औद्योगिक विकास केलिए एमएसएमई के तहत विभिन्न उद्योगों के लिए तीस क्लस्टर अलग-अलग जिलों में प्रस्तावित है। ये क्लस्टर यदि बन जाते हैं तो हरियाणा की सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को बड़ा प्रोत्साहन मिलता। हरियाणा के ये उद्योग मजबूत होते और इससे रोजगार सृजन भी बढ़ता। जबकि इसकी वजह से हरियाणा में औद्योगिक निवेश भी बढ़ता। हरियाणा में ये 30 क्लस्टर करनाल, बहादुरगढ़, पानीपत, कुंडली, भिवानी, अंबाला, यमुनानगर, फरीदाबाद, रोहतक, डरबी (सिरसा), रेवाड़ी, समालखा (पानीपत), पंचूकला, राई (सोनीपत), गुरुग्राम व जगाधरी में स्थापित किए जाने हैं। लेकिन बजट की कमी की वजह से ये परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ पा रही है। उम्मीद थी इस बजट में विशेष प्रावधान के साथ इन्हे रफ्तार मिलेगी। मगर फिलहाल मायूसी ही मिली।
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हालांकि हरियाणा पिछले कई आम बजटों के दौरान बड़ी विकास परियोजनाओं के मामले में नजरअंदाजी झेल रहा है। उम्मीद थी कि अगले बरस लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार के इस बजट में हरियाणा के हिस्से में इतना कुछ आ जाएगा कि रुकी परियोजनाओं को रफ्तार मिलेगी और विकास की नई उम्मीद जगेगी। लेकिन जेटली की पोटली में से हरियाणा के लिए कुछ भी ऐसा नहीं निकला, जिसे हरियाणा के लिए बड़ी सौगात या बड़ी राहत कहा जा सके।
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30 क्लस्टर परियोजनाओं को अभी और इंतजार
हरियाणा में औद्योगिक विकास केलिए एमएसएमई के तहत विभिन्न उद्योगों के लिए तीस क्लस्टर अलग-अलग जिलों में प्रस्तावित है। ये क्लस्टर यदि बन जाते हैं तो हरियाणा की सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को बड़ा प्रोत्साहन मिलता। हरियाणा के ये उद्योग मजबूत होते और इससे रोजगार सृजन भी बढ़ता। जबकि इसकी वजह से हरियाणा में औद्योगिक निवेश भी बढ़ता। हरियाणा में ये 30 क्लस्टर करनाल, बहादुरगढ़, पानीपत, कुंडली, भिवानी, अंबाला, यमुनानगर, फरीदाबाद, रोहतक, डरबी (सिरसा), रेवाड़ी, समालखा (पानीपत), पंचूकला, राई (सोनीपत), गुरुग्राम व जगाधरी में स्थापित किए जाने हैं। लेकिन बजट की कमी की वजह से ये परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ पा रही है। उम्मीद थी इस बजट में विशेष प्रावधान के साथ इन्हे रफ्तार मिलेगी। मगर फिलहाल मायूसी ही मिली।
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धीमी रहेगी पूर्व परियोजनाएं की रफ्तार
Budget 2018
- फोटो : अमर उजाला
धीमी रहेगी पूर्व परियोजनाएं की रफ्तार
हरियाणा में हालांकि पिछले कई आम बजट के दौरान कुछ खास नहीं मिला। लेकिन कई परियोजनाएं ऐसी है जो केंद्र प्रायोजित है। केंद्र से पर्याप्त फंड न मिलने की वजह से ये परियोजनाएं भी रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। पूर्व बजट के दौरान हरियाणा में बागवानी विश्वविद्यालय की घोषणा हुई थी, लेकिन अभी कागजों तक ही सीमित है।
इसी तरह डिफेंस यूनिवर्सिटी, रेल कोच फैक्टरी, रीजनल साइंस सेंटर, अंबाला कैंट के स्टेशन को ए-वन बनाना इत्यादि बड़ी घोषणएं भी फंड की कमी के चलते धरातल पर उतरने का इंतजार कर रही है। इसके अलावा भी कई अन्य केंद्र प्रायोजित प्रोजेक्ट्स भी ऐसे हैं, जो काफी समय से लटके हुए हैं। हरियाणा सरकार ने ऐसे ही प्रोजेक्ट्स को गति प्रदान करने और केंद्र से समन्वय स्थापित करने के लिए बाकायदा एक आईएएस अफसर सुनील गुलाटी को सीईओ बनाकर दिल्ली में बिठाया है। लेकिन हरियाणा सरकार के ये प्रयास भी तभी सिरे चढ़ेंगे, जब केंद्र इन परियोजनाओं के लिए फंड जल्द रिलीज करेगा।
प्रयास जारी रखे हरियाणा सरकार
हरियाणा के लिहाज से यदि देखा जाए तो केंद्रीय बजट नाउम्मीद करने वाला है। जब तक पुरानी परियोजनाओं को सिरे चढ़ाने के लिएफंड ही रिलीज नहीं होगा, तो नई घोषणाओं को भी फायदा नहीं है। हरियाणा में पूर्व घोषित केंद्रीय प्रायोजित प्रोजेक्ट्स सिरे चढ़े, इसके लिए प्रदेश सरकार ने केंद्र से लाइजनिंग के लिए एक आईएएस की नियुक्त कर साकारात्मक पहल की है। ये प्रयास जारी रहने चाहिए। ओवरआल हरियाणा के किसानों को इस बजट में जरूर लाभ मिलेगा। लेकिन प्रदेश के उद्यमी, कारोबारी और मध्यम वर्ग के लिए ये बजट मायूस करने वाला है। - प्रोफेसर जेएस नैन, आर्थिक मामलों के जानकार
हरियाणा में हालांकि पिछले कई आम बजट के दौरान कुछ खास नहीं मिला। लेकिन कई परियोजनाएं ऐसी है जो केंद्र प्रायोजित है। केंद्र से पर्याप्त फंड न मिलने की वजह से ये परियोजनाएं भी रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। पूर्व बजट के दौरान हरियाणा में बागवानी विश्वविद्यालय की घोषणा हुई थी, लेकिन अभी कागजों तक ही सीमित है।
इसी तरह डिफेंस यूनिवर्सिटी, रेल कोच फैक्टरी, रीजनल साइंस सेंटर, अंबाला कैंट के स्टेशन को ए-वन बनाना इत्यादि बड़ी घोषणएं भी फंड की कमी के चलते धरातल पर उतरने का इंतजार कर रही है। इसके अलावा भी कई अन्य केंद्र प्रायोजित प्रोजेक्ट्स भी ऐसे हैं, जो काफी समय से लटके हुए हैं। हरियाणा सरकार ने ऐसे ही प्रोजेक्ट्स को गति प्रदान करने और केंद्र से समन्वय स्थापित करने के लिए बाकायदा एक आईएएस अफसर सुनील गुलाटी को सीईओ बनाकर दिल्ली में बिठाया है। लेकिन हरियाणा सरकार के ये प्रयास भी तभी सिरे चढ़ेंगे, जब केंद्र इन परियोजनाओं के लिए फंड जल्द रिलीज करेगा।
प्रयास जारी रखे हरियाणा सरकार
हरियाणा के लिहाज से यदि देखा जाए तो केंद्रीय बजट नाउम्मीद करने वाला है। जब तक पुरानी परियोजनाओं को सिरे चढ़ाने के लिएफंड ही रिलीज नहीं होगा, तो नई घोषणाओं को भी फायदा नहीं है। हरियाणा में पूर्व घोषित केंद्रीय प्रायोजित प्रोजेक्ट्स सिरे चढ़े, इसके लिए प्रदेश सरकार ने केंद्र से लाइजनिंग के लिए एक आईएएस की नियुक्त कर साकारात्मक पहल की है। ये प्रयास जारी रहने चाहिए। ओवरआल हरियाणा के किसानों को इस बजट में जरूर लाभ मिलेगा। लेकिन प्रदेश के उद्यमी, कारोबारी और मध्यम वर्ग के लिए ये बजट मायूस करने वाला है। - प्रोफेसर जेएस नैन, आर्थिक मामलों के जानकार