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अस्पताल में सामने आए नोटबंदी के साइड इफेक्ट, शव 'किडनेप' मरीज कैद

Tue, 15 Nov 2016 12:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा) Updated Tue, 15 Nov 2016 12:35 PM IST
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Note ban side effect in hospital, dead body kidnap jailed
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बड़े नोट बंद होने की मार अब मरीज और उनके तिमारदारों पर पड़नी शुरू हो गई है। हिसार में नोटबंदी के दो साइड इफेक्ट सामने आए। पुराने नोट का इंतजाम न होने पर निजी अस्पताल प्रबंधन ने शव देने से इन्कार कर दिया। 

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मामले में डीसी के हस्तक्षेप के बाद पुराने नोटों का इंतजाम हुई और पूर्व सरपंच ने रिश्तेदार का शव अस्पताल से छुड़वाया। वहीं एक अन्य मामले में नई करेंसी न देने पर अस्पताल प्रबंधन ने मरीज को डिस्चार्ज करने से मना कर दिया। बाद में हंगामे के बाद मरीज को डिस्चार्ज कर दिया।
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कापड़ो के पूर्व सरपंच हाल मिलगेट स्थित श्रीनगर निवासी रोशन लाल ने बताया कि उनके समधी का भाई सुलतान गांव उगालन निवासी अपने बेटे के पास रोहतक गया था। छत से नीचे गिरने पर घायल होने के बाद उन्हें गंभीर हालात में शहर के निजी अस्पताल में भर्ती करवाया था। 

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सीएमओ ने जताई लाचारी 

Note ban side effect in hospital, dead body kidnap jailed
500-1000 के नोट बंद - फोटो : social media

रविवार रात 10:00 बजे सुलतान ने दम तोड़ दिया। वहीं 12 नवंबर को अस्पताल में खाना देकर लौट रहे उनके बेटे सहित तीन रिश्तेदार इनमें समधी हवा सिंह, जमाई राजेश और बेटा अमनदीप हादसे में घायल हो गए। 

उन्हें भी अस्पताल में आईसीयू में भर्ती करवाया था। सुलतान की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने 33 हजार रुपये का बिल बताया। अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि नए नोट ही लेंगे। उन्होंने अपने रिश्तदारों के पास कॉल कर 33 हजार रुपये के 100 रुपये के नोटों का इंतजाम करके शव छुड़वाया। पूर्व सरपंच के बेटे को भी सुबह डिस्चार्ज के लिए 14 हजार रुपये का नए नोट में बिल मांगा। 

सीएमओ ने जताई लाचारी 
परिजनों ने सीएमओ जेएस ग्रेवाल से गुहार लगाई तो उन्होंने कहा कि निजी अस्पताल से संबंधित कोई गाइड लाइन नहीं है। डीसी के मोबाइल पर दो बार कॉल करने के बाद कोई रिस्पांस नहीं मिला। पूर्व सरपंच ने फिर उनके रेजिडेंस पर कॉल कर पूरा मामला बताया। 

डीसी रेजिडेंस से हस्तक्षेप के बाद अस्पताल प्रबंधन ने उनसे पुरानी करेंसी आईडी प्रूफ के साथ जमा कर दूसरे मरीज को भी डिस्चार्ज कर दिया। अभी भी उनके पास उनके दो और रिश्तेदार भर्ती हैं। आरोप है कि इतना ही नहीं अस्पताल प्रबंधन ने दोनों भर्ती मरीजों को नजरबंद कर लिया। सिक्योरिटी को निर्देश दिए कि दो लोग यहां स्पेशल ड्यूटी देंगे ताकि इनमें से कोई भाग न जाए।

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