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Chandigarh News: क्लेम न देना बीमा कंपनी को पड़ा महंगा, अब 7.60 लाख रुपये 9 प्रतिशत ब्याज से देने पड़ेंगे
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चंडीगढ़। वैध लाइसेंस न होने का हवाला देकर क्लेम देने इन्कार करना बीमा कंपनी को महंगा पड़ गया। 30 मई 2018 को एक सड़क दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत और दूसरा घायल हो गया था। घायल व्यक्ति ने जब बीमा कंपनी से क्लेम लेने के लिए कहा तो इन्कार किया गया। इस पर उसने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया। इस पर ट्रिब्यूनल ने कंपनी को शिकायतकर्ता को 7.60 लाख रुपये 9 प्रतिशत ब्याज देने आदेश दिया है।
शिकायतकर्ता रंजीत साहनी ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान बताया कि वह राज किशोर साहनी और अन्य श्रमिक एक टिप्पर में सवार होकर मजदूरी करने के लिए जा रहे थे। जब वे अमरोह सरयानी रोड पर पहुंचे तो चालक राजपूत वजिंदर सिंह की लापरवाह ड्राइविंग के कारण टिप्पर 50 फीट गहरी खाई में गिर गया। हादसे में चालक और राज किशोर की मौत हो गई। रंजीत को गंभीर चोटें आईं, जिसके लिए उसे इलाज के लिए विभिन्न अस्पतालों में भेजा गया। इस पर उसने टिप्पर के मालिक और बीमा कंपनी पर क्लेम न देने पर मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल में केस दर्ज किया। वहीं, दूसरी ओर बीमा कंपनी ने दावा किया कि वाहन के चालक के पास वैध लाइसेंस नहीं था और दुर्घटना में उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद ट्रिब्यूनल ने पाया कि रंजीत की चोटों के कारण उन्हें स्थायी विकलांगता हुई और उसकी कमाई की क्षमता पर प्रभाव पड़ा है। कंपनी के दावे को खारिज कर मुआवजे का भुगतान करने का आदेश दिया।
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शिकायतकर्ता रंजीत साहनी ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान बताया कि वह राज किशोर साहनी और अन्य श्रमिक एक टिप्पर में सवार होकर मजदूरी करने के लिए जा रहे थे। जब वे अमरोह सरयानी रोड पर पहुंचे तो चालक राजपूत वजिंदर सिंह की लापरवाह ड्राइविंग के कारण टिप्पर 50 फीट गहरी खाई में गिर गया। हादसे में चालक और राज किशोर की मौत हो गई। रंजीत को गंभीर चोटें आईं, जिसके लिए उसे इलाज के लिए विभिन्न अस्पतालों में भेजा गया। इस पर उसने टिप्पर के मालिक और बीमा कंपनी पर क्लेम न देने पर मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल में केस दर्ज किया। वहीं, दूसरी ओर बीमा कंपनी ने दावा किया कि वाहन के चालक के पास वैध लाइसेंस नहीं था और दुर्घटना में उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद ट्रिब्यूनल ने पाया कि रंजीत की चोटों के कारण उन्हें स्थायी विकलांगता हुई और उसकी कमाई की क्षमता पर प्रभाव पड़ा है। कंपनी के दावे को खारिज कर मुआवजे का भुगतान करने का आदेश दिया।
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