फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   not got One rank one pension benefits, challenge in Tribunal

वन रैंक वन पेंशन का लाभ नहीं मिला, ट्रिब्यूनल में दी चुनौती

Tue, 19 Apr 2016 10:14 AM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 19 Apr 2016 10:14 AM IST
विज्ञापन
not got One rank one pension benefits, challenge in Tribunal
आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल - फोटो : DEMO Pics

रक्षा मंत्रालय की वन रैंक वन पेंशन योजना को चंडीगढ़ आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल (एएफटी) में चुनौती दी गई है। सोमवार को वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) के खिलाफ कुल आठ याचिकाएं दायर हुईं। ट्रिब्यूनल के जस्टिस प्रकाश कृष्णा व लेफ्टिनेंट जनरल डीएस सिद्धू की बेंच ने रक्षा मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

विज्ञापन


इस मामले की सुनवाई अब चार जुलाई को होगी। केंद्र सरकार की ओर से नोटिफिकेशन जारी होने के बाद यह पहली बार है, जब किसी ट्रिब्यूनल में वन रैंक वन पेंशन को चुनौती दी गई हो।
विज्ञापन


एएफटी में ओआरओपी को चुनौती देने वाले आल इंडिया एक्स सर्विसमैन वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन भीमसेन सहगल ने बताया कि नोटिफिकेशन के पैरा नंबर 4.1 में उल्लेख है कि इस योजना का लाभ रिजर्व फोर्स के सिपाहियों को नहीं मिलेगा। उन्हें जो भी पेंशन मिल रही है, उसमें कोई इजाफा नहीं होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्होंने बताया यह फैसला अन्यायपूर्ण है। यह उन सिपाहियों के साथ धोखा है, जो साल 1962, 1965 और 1971 के युद्ध में देश के साथ खड़े हुए और दुश्मनों को मुंह तोड़ जवाब दिया। रेग्युलर और रिजर्व सर्विस पूरी होने के बाद उन्हें पेंशन मिलने लगी। उन्हें अभी इतनी कम पेंशन मिल रही है, जिससे घर का खर्चा चलाना उनके लिए मुश्किल हो गया है।

सिर्फ 3500 रुपये मिल रही पेंशन
सहगल के मुताबिक फौज में पहले आठ साल रेग्युलर जॉब करनी पड़ती थी। उसके बाद उन्हें रिजर्व फोर्स में सात साल के लिए रखा जाता था। रिजर्व फोर्स में जाने के दौरान उन्हें हर महीने सिर्फ 20 रुपये मिलते थे। हालांकि दो महीने के लिए उन्हें ट्रेनिंग में भेजा जाता था, जिसमें उन्हें मेहनताना मिलता था। पूरे उत्तर भारत में इस कैटेगरी के गिनती के ही सिपाही बचे हैं। 1972 में उनकी पेंशन 40 रुपये थी। 1986 में रिवाइज कर 375 रुपये कर दी गई। 1996 में 1275 और फिर 2006 में 3500 रुपये, लेकिन इसके बाद कोई इजाफा नहीं किया गया, जबकि 2009, 2012 और 2014 में बाकियों की पेंशन में बढ़ोतरी हुई, लेकिन इनका एक भी रुपया नहीं बढ़ा।


कई बार पत्र लिखा, लेकिन नहीं हुई सुनवाई
एसोसिएशन ने इस बारे में संबंधित अथॉरिटीज को कई बार पत्र लिखा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। आखिर में उन्हें ट्रिब्यूनल में जाना पड़ा। उन्होंने बताया कि वन रैंक वन पेंशन के मुताबिक उन्हें अब 6665 रुपये पेंशन मिलनी चाहिए, लेकिन उन्हें सिर्फ 3500 रुपये में ही गुजारा करना पड़ रहा है। इन पेंशनरों की उम्र 80-90 साल होगी। उम्र के इस पड़ाव में उन्हें काफी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। इतनी कम राशि में उन्हें घर चलाना मुश्किल हो रहा है। याचिका दायर करने वालों में बलदेव सिंह, रघुवीर सिंह, भूरी सिंह, राज मल व चंदकिशोर सहित कई लोग शामिल हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed