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स्पेशल रिपोर्ट: नोटबंदी से धंधाबंदी, काम न मिलने से मजदूरों का पलायन शुरु

Sun, 27 Nov 2016 12:49 AM IST
नीरज कुमार/अमर उजाला, चंडीगढ़
नीरज कुमार/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 27 Nov 2016 12:49 AM IST
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not getting the work, The migration of workers start
नोटबंदी से नहीं मिल रहा काम मजदूर कर रहे हैं पलायन
नोटबंदी का व्यापक असर लेबर चौक के मजदूरों पर दिख रहा है। काम न मिलने के कारण बहुत से गांव की ओर पलायन कर चुके हैं। जो बचे हैं उनको पारिवारिक समस्या के चलते रात को चैन की नींद नहीं आती। किसी को बच्चों के लिए किताब खरीदनी है तो किसी को ठंड से बचने के लिए स्वेटर लेना है।
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सुबह सात बजे ही लेबर चौक पर मजदूरों का आना शुरू हो जाता है। लेकिन काम नहीं मिल रहा है। शेषनाथ पेशे से मिस्त्री हैं। उनका कहना है कि वे आठ बजे लेबर चौक पर आ जाते हैं। लेकिन पिछले एक सप्ताह से काम नहीं मिला है। अब घर चलाना मुश्किल है। कोलाई बड़हेडी से आते हैं। उनका कहना है कि नोट बंदी ने परेशानियां बढ़ा दी है। क्या करें, कहां जाएं, किससे काम मांगे। यदि काम नहीं करेंगे तो पैसे नहीं। और पैसे नहीं तो बच्चों के लिए खाना कहां से जुटाएंगे। उन्होंने बताया कि मजदूरों का कोई बैंक बैलेंस तो है नहीं कि उससे काम चला सकें। नोटबंदी से अब बहुत परेशानी हो रही है।
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चायवाला भी नोटबंदी से परेशान

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नोटबंदी से नहीं मिल रहा काम मजदूर कर रहे हैं पलायन
बनारसी भइया का कहना है नोटबंदी से वे स्वयं बंद हो गए हैं। खाने पीने की चीजें जैसे आटा दाल तेल महंगा होने लगा है। अब तो और बुरा हाल हो रहा है। केदन लाल और दीनानाथ का कहना है कि काम नहीं मिलने पर लेबर चौक पर ही रहते हैं। कहां जाएं घर में अकेले जाकर क्या करेंगे। लेबर चौक पर ही बैठकर समय पास करके शाम को घर चले जाते हैं। काम न मिलने से रात को नींद भी नहीं आती।

सेक्टर-40 के लेबर चौक पर करीब दो हजार मजदूर हर रोज आते हैं। यहां पर बिहार, यूपी, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल के लेबर आते हैं। इसी लेबर चौक पर विकास यादव की चाय की दुकान भी है। उनकी भी हालत खराब है। मजदूरों के पास पैसे न होने के कारण उनके दुकान पर भी असर पड़ा है।

वहीं लेबर चौक सेक्टर-44 के कुछ मजदूरों का कहना है कि नोटबंदी से उनके काम पर असर नहीं पड़ा है। कुछ मजदूरों का कहना है कि ठेकेदारों के पास काम करते हैं। उनके महीना का वेतन मिलता है। मजदूर भोला, बबलू और सुनील कुमार का कहना है कि काम मिल रहा है। कोई परेशानी नहीं है।
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