चंडीगढ़ में हेल्पलाइन नंबर का हाल: देर रात युवती को चाहिए थी मदद, देरी से आई पीसीआर तो साथ में नहीं थी महिला पुलिसकर्मी
मनीमाजरा के शास्त्रीनगर निवासी अजीत ने बताया कि रात 10.15 बजे 28 वर्षीय एक युवती सेक्टर-9 में हाथ में फाइल लेकर घूम रही थी। इस दौरान वह खरड़ निवासी मंदीप सिंह के साथ कार में उसके पिता को लेने दड़वा जा रहा था।
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चंडीगढ़ में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जारी हेल्पलाइन नंबर-112 पर मदद लेना आसान नहीं है। गुरुवार की रात इसका उदाहरण देखने को मिला। मानसिक रूप से परेशान दिख रही मनीमाजरा की एक युवती रात 10.15 बजे सेक्टर-9 में घूम रही थी। इस दौरान एक युवक ने पुलिस को कॉल कर मदद मांगी। पहले तो फोन नहीं मिला।
जब 10.15 बजे फोन मिला तो करीब रात 12 बजे मदद मिली। इस दौरान आई पीसीआर में महिला पुलिसकर्मी ही नहीं थीं। इस कारण युवती ने पीसीआर में बैठने से इनकार कर दिया। बाद में पुलिस ने महिला कर्मचारी के साथ पीसीआर भेजी, तब जाकर युवती को घर छोड़ा गया। यह पहली बार नहीं है जब 112 नंबर पर कॉल नहीं लगा। इससे पहले भी कई मामले हो चुके हैं जब लोग आपातकाल में फोन लगाते रहते हैं, लेकिन नंबर मिलता ही नहीं है।
पुलिस को कॉल करने के बाद सवा घंटे तक ऐसे चला खेल तमाशा
मनीमाजरा के शास्त्रीनगर निवासी अजीत ने बताया कि रात 10.15 बजे 28 वर्षीय एक युवती सेक्टर-9 में हाथ में फाइल लेकर घूम रही थी। इस दौरान वह खरड़ निवासी मंदीप सिंह के साथ कार में उसके पिता को लेने दड़वा जा रहा था। युवती ने उनसे मदद मांगी। मंदीप ने कहा कि उसे अपने पिता को लेने जाना है, देरी हो रही है इसलिए वह कैब के माध्यम से घर चली जाए। युवती ने उसका धन्यवाद किया और आगे बढ़ गई। इस दौरान उन्हें लगा कि कहीं लड़की के साथ कोई अनहोनी न हो जाए तो मंदीप ने अपने दोस्त अजीत को वहीं रुक जाने को कहा और वह अपने पिता को लेने के लिए चला गया।
इसके बाद अजीत ने 112 पर कॉल कर इस संबंध में पुलिस को जानकारी देनी चाही, लेकिन फोन नहीं लगा। कई बार प्रयास के बाद 10.57 बजे 112 नंबर पर फोन लगा। अजीत ने पुलिस को बताया कि एक अकेली लड़की सेक्टर-9 में घूम रही है और वह कुछ परेशान लग रही है। साथ ही अजीत ने सेक्टर-3 थाना प्रभारी को फोन लगाया। लगभग 15 मिनट बाद पीसीआर से एक कॉल आई, युवक से युवती की लोकेशन पूछी। पीसीआर ने उसे खोजा, लेकिन युवती नहीं मिली। इस दौरान मंदीप भी अपने पिता को लेकर वहां पहुंच गया। जब अजीत उनके साथ गाड़ी में मटका चौक पहुंचा तो युवती उन्हें वहां मिल गई। उन्होंने 11.27 बजे फिर 112 पर दोबारा फोन किया और महिला पुलिसकर्मी को भेजने के लिए कहा। साथ ही पहले आए पीसीआरकर्मी को भी फोन लगाया।
पुलिसकर्मी ने कहा कि युवती को थाने छोड़ दो। लगभग 15 मिनट तक फोन न आने पर अजीत ने फिर से 112 पर कॉल किया और कहा कि युवती मटका चौक से सेक्टर-16/17 लाइट प्वाइंट की तरफ जा रही है, रात में कोई हादसा हो सकता है, इसलिए मदद उपलब्ध कराएं। तब तक युवती पैदल ही सेक्टर-22 के पेट्रोल पंप पर पहुंच गई। वे भी उसके पीछे-पीछे गए। लगभग आधे घंटे बाद सेक्टर-17 परेड ग्राउंड के बाहर स्लिप रोड पर पीसीआर आई, लेकिन उसमें भी महिलाकर्मी नहीं थी। युवती सड़क की दूसरी तरफ सेक्टर-22 के एक होटल के बाहर खड़ी थी। पुलिसकर्मी ने अजीत से ही उस युवती को गाड़ी में बिठाने के लिए कहा, उसके बाद सेक्टर-17 थाने से महिला पुलिसकर्मी समेत चार पुलिस वाले सेक्टर-17 पहुंचे। अजीत ने बताया कि युवती सेक्टर-22 में खड़ी है। इसके बाद पुलिस वालों ने कहा कि कॉल हमारे क्षेत्र से नहीं आई है। इसके बाद चले गए। इसके बाद पीसीआरकर्मी ने कंट्रोल रूम में फोन कर महिला पुलिसकर्मियों को बुलाया। रात लगभग 12 बजे सेक्टर-22 से युवती को मनीमाजरा स्थित उसके घर छोड़ा गया।
अधिकारी ने बताया, क्या है नियम
- दो से तीन मिनट में पीसीआर को मौके पर पहुंचना होता हैं।
- पीसीआर दूसरे घटना स्थल पर व्यस्त है तो दो से तीन मिनट ज्यादा लग सकते हैं
- एक थाने के अंतर्गत तीन पीसीआर की गाड़ियां होती हैं
- दिन में एक थाने अंतर्गत पीसीआर पर एक महिला पुलिस कर्मी तैनात होती है
- रात को एक थाने अंतर्गत एक पीसीआर पर दो महिला पुलिस कर्मी तैनात होती हैं
- सबसे पहले नजदीकी पीसीआर पहुंचेगी, जरूरत पड़ने पर महिला पुलिसकर्मी तुरंत बुलाया जाएगा
कई कॉल और मौके पर देरी से पहुंचने के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। हमारे रिकॉर्ड के अनुसार युवती के पास चार मिनट में पीसीआर गाड़ी पहुंच गई थी, जिसमें दो महिला पुलिसकर्मी भी तैनात थी। उन्होंने सुरक्षित मनीमाजरा स्थित उसके घर पहुंचाया। - राम गोपाल, डीएसपी