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‘प्रशासन बताए मनोनीत पार्षदों को कमेटियों में शामिल करें या नहीं’
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 08 Feb 2018 09:33 AM IST
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MC House Meeting
- फोटो : File Photo
नगर निगम ने मनोनीत पार्षदों का वोटिंग राइट छीनने के बाद प्रशासन से पूछा है कि इन पार्षदों को गठित होने वाली 15 सब कमेटियां में शामिल किया जाए या नहीं। मेयर देवेश मोदगिल ने बुधवार को स्थानीय निकाय सचिव एवं गृह सचिव अनुराग अग्रवाल को इस संबंध में पत्र लिखा है।
ऐसे में मेयर ने मनोनीत पार्षदों को अलग-अलग कमेटियों में सदस्य या चेयरमैन बनाए जाने की गेंद एक तरह से प्रशासन के खेमे में फेंक दी है, ताकि अगर प्रशासन मनोनीत पार्षदों को कमेटियों में सदस्य न बनाने का फैसला देता है तो उस समय मेयर देेवश मोदगिल को मनोनीत की नाराजगी का सामना न करना पड़े।
इस समय नगर निगम में नौ मनोनीत पार्षद हैं। इनसे मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव में मतदान करने का अधिकार पिछले साल पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। इसके बाद इनमें से किसी को भी इस साल पहली बार वित्त एवं अनुबंध कमेटी का सदस्य भी नहीं बनाया गया है। अनुबंध कमेटी का सदस्य किसी मनोनीत पार्षद को न बनाए जाने का आधार यही बताया गया था कि उनके पास वोटिंग अधिकार नहीं है।
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30 जनवरी को हुई सदन की बैठक में सब कमेटियों का गठन करने का अधिकार मेयर को दे दिया गया है। ऐसे में मेयर मोदगिल का कहना है कि स्थानीय निकाय सचिव के अलावा इस संबंध में कानूनी राय भी ली जाएगी। जैसा भी फैसला आएगा उस हिसाब से कमेटियों का गठन कर दिया जाएगा।
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ऐसे में मेयर ने मनोनीत पार्षदों को अलग-अलग कमेटियों में सदस्य या चेयरमैन बनाए जाने की गेंद एक तरह से प्रशासन के खेमे में फेंक दी है, ताकि अगर प्रशासन मनोनीत पार्षदों को कमेटियों में सदस्य न बनाने का फैसला देता है तो उस समय मेयर देेवश मोदगिल को मनोनीत की नाराजगी का सामना न करना पड़े।
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इस समय नगर निगम में नौ मनोनीत पार्षद हैं। इनसे मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव में मतदान करने का अधिकार पिछले साल पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। इसके बाद इनमें से किसी को भी इस साल पहली बार वित्त एवं अनुबंध कमेटी का सदस्य भी नहीं बनाया गया है। अनुबंध कमेटी का सदस्य किसी मनोनीत पार्षद को न बनाए जाने का आधार यही बताया गया था कि उनके पास वोटिंग अधिकार नहीं है।
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30 जनवरी को हुई सदन की बैठक में सब कमेटियों का गठन करने का अधिकार मेयर को दे दिया गया है। ऐसे में मेयर मोदगिल का कहना है कि स्थानीय निकाय सचिव के अलावा इस संबंध में कानूनी राय भी ली जाएगी। जैसा भी फैसला आएगा उस हिसाब से कमेटियों का गठन कर दिया जाएगा।
कमेटियों में होते हैं विकास के प्रस्ताव पास
MC House Meeting
- फोटो : File Photo
कमेटियों में होते हैं विकास के प्रस्ताव पास
नगर निगम की कार्यों के लिए अलग-अलग कमेटियों का गठन होता है जिसमें विकास के प्रस्ताव होते हैं। रोड, वाटर सप्लाई, सैनिटेशन जैसी कई अहम कमेटियां हैं जिसमें अहम नीतियां बनती हैं। हर बार दो से तीन कमेटियों पर मनोनीत पार्षदों को चेयरमैन भी बनाया जाता रहा है।
जब सदन के सदस्य हो सकते हैं तो कमेटियों के क्यों नहीं
मनोनीत पार्षद चरणजीव सिंह का कहना है कि जब मनोनीत पार्षद सदन के सदस्य हो सकते हैं तो वे कमेटियों के भी सदस्य बन सकते हैं। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि मनोनीत पार्षद वोट नहीं डाल सकते, लेकिन पिछले एक साल में देखा गया है कि अधिकतर प्रस्ताव और फैसले सर्वसम्मति से ही लिए जा रहे हैं।
कमेटियों की बैठकों में भी ऐसा ही होता है। इसके बावजूद मेयर जो भी निर्णय लेंगे वे सभी मनोनीत को मंजूर होगा। कमेटियों का सदस्य न बनाए जाने पर उन्हें निजी तौर पर कोई फर्क नहीं पड़ता है।
नगर निगम की कार्यों के लिए अलग-अलग कमेटियों का गठन होता है जिसमें विकास के प्रस्ताव होते हैं। रोड, वाटर सप्लाई, सैनिटेशन जैसी कई अहम कमेटियां हैं जिसमें अहम नीतियां बनती हैं। हर बार दो से तीन कमेटियों पर मनोनीत पार्षदों को चेयरमैन भी बनाया जाता रहा है।
जब सदन के सदस्य हो सकते हैं तो कमेटियों के क्यों नहीं
मनोनीत पार्षद चरणजीव सिंह का कहना है कि जब मनोनीत पार्षद सदन के सदस्य हो सकते हैं तो वे कमेटियों के भी सदस्य बन सकते हैं। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि मनोनीत पार्षद वोट नहीं डाल सकते, लेकिन पिछले एक साल में देखा गया है कि अधिकतर प्रस्ताव और फैसले सर्वसम्मति से ही लिए जा रहे हैं।
कमेटियों की बैठकों में भी ऐसा ही होता है। इसके बावजूद मेयर जो भी निर्णय लेंगे वे सभी मनोनीत को मंजूर होगा। कमेटियों का सदस्य न बनाए जाने पर उन्हें निजी तौर पर कोई फर्क नहीं पड़ता है।