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हरियाणाः गजट में प्रकाशित हो चुकी अधिसूचना, एक वर्ष के बाद भी गठित नहीं हुआ एससी आयोग
Mon, 17 Feb 2020 12:45 PM IST
खुशबू गोयल
यशपाल शर्मा, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 17 Feb 2020 12:45 PM IST
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फाइल फोटो
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हरियाणा में एससी आयोग अधिसूचना जारी होने के एक वर्ष बाद भी गठित नहीं हो पाया है। आयोग में अध्यक्ष के अलावा अधिकतम चार सदस्य नियुक्त होने हैं। राज्य अनुसूचित जाति आयोग विधेयक, 2018 में पारित करवाया गया था। जिसे राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य ने 5 नवंबर 2018 को स्वीकृति दे दी थी। 30 नवंबर 2018 को इसे हरियाणा सरकार के गजट में प्रकाशित किया गया।
एक वर्ष पूर्व 15 फरवरी 2019 को हरियाणा सरकार के अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने इसकी अधिसूचना जारी कर यह कानून लागू कर दिया था, लेकिन अब तक आयोग गठित नहीं किया गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि हरियाणा अनुसूचित जाति आयोग अधिनियम, 2018 की धारा 1 (2 ) के अनुसार यह कानून उस तिथि से लागू माना जाएगा जब सरकार ने गजट अधिसूचना की है।
हेमंत ने बताया कि हरियाणा अनुसूचित जाति आयोग कानून, 2018 की धारा 3 के अनुसार आयोग में एक अध्यक्ष और उपाध्यक्ष होगा। जो सामाजिक जीवन में व्यापक अनुभव रखने वाले एवं अनुसूचित जातियों से संबंधित प्रतिष्ठित व्यक्ति होंगे। इन्होंने सरकारी गतिविधियों में काम किया हो, सहयोग दिया हो या अनुसूचित जातियों से संबंधित सरकार का कोई सेवानिवृत्त अधिकारी हो। जहां तक उपाध्यक्ष का विषय है, वह आयोग के सदस्यों में से ही होगा।
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एक वर्ष पूर्व 15 फरवरी 2019 को हरियाणा सरकार के अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने इसकी अधिसूचना जारी कर यह कानून लागू कर दिया था, लेकिन अब तक आयोग गठित नहीं किया गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि हरियाणा अनुसूचित जाति आयोग अधिनियम, 2018 की धारा 1 (2 ) के अनुसार यह कानून उस तिथि से लागू माना जाएगा जब सरकार ने गजट अधिसूचना की है।
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हेमंत ने बताया कि हरियाणा अनुसूचित जाति आयोग कानून, 2018 की धारा 3 के अनुसार आयोग में एक अध्यक्ष और उपाध्यक्ष होगा। जो सामाजिक जीवन में व्यापक अनुभव रखने वाले एवं अनुसूचित जातियों से संबंधित प्रतिष्ठित व्यक्ति होंगे। इन्होंने सरकारी गतिविधियों में काम किया हो, सहयोग दिया हो या अनुसूचित जातियों से संबंधित सरकार का कोई सेवानिवृत्त अधिकारी हो। जहां तक उपाध्यक्ष का विषय है, वह आयोग के सदस्यों में से ही होगा।
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आयोग के पास सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां होंगी
आयोग के पास सिविल कोर्ट जैसे शक्तियां भी होंगी। आयोग में अध्यक्ष के अलावा अधिकतम चार सदस्य होंगे, जो अनुसूचित जाति से ही संबंधित होने चाहिए। जिनमें से एक महिला होगी। इसके अलावा आयोग में एक सदस्य सचिव होंगे, जो सरकार के अधिकारी हों या रहे हों। अधिकारी विशेष सचिव के नीचे के रैंक का नहीं होना चाहिए। आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष या उनकी 65 वर्ष तक की आयु तक होगा।
हुड्डा सरकार में मुलाना बने थे अध्यक्ष
हेमंत ने बताया कि पूर्व हुड्डा सरकार ने 10 अक्टूबर 2013 को हरियाणा अनुसूचित जाति आयोग की स्थापना की थी। इसके अध्यक्ष के रूप में हरियाणा कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष फूल चंद मुलाना एवं अन्य सदस्यों की नियुक्ति दस महीने बाद अगस्त 2014 में की गई। अक्टूबर, 2014 में विधानसभा चुनाव में भाजपा सरकार बनी। दिसंबर 2014 में इस आयोग को भंग कर दिया गया। मुलाना ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सरकार के फैसले को चुनौती दी, उनकी याचिका दिसंबर 2016 में हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी।
हुड्डा सरकार में मुलाना बने थे अध्यक्ष
हेमंत ने बताया कि पूर्व हुड्डा सरकार ने 10 अक्टूबर 2013 को हरियाणा अनुसूचित जाति आयोग की स्थापना की थी। इसके अध्यक्ष के रूप में हरियाणा कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष फूल चंद मुलाना एवं अन्य सदस्यों की नियुक्ति दस महीने बाद अगस्त 2014 में की गई। अक्टूबर, 2014 में विधानसभा चुनाव में भाजपा सरकार बनी। दिसंबर 2014 में इस आयोग को भंग कर दिया गया। मुलाना ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सरकार के फैसले को चुनौती दी, उनकी याचिका दिसंबर 2016 में हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी।