फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   No Reservation to Jatt Sikh of Punjab

पंजाब के जट्ट सिखों को नहीं मिल सकेगा आरक्षण

Tue, 04 Feb 2014 09:21 AM IST
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 04 Feb 2014 09:21 AM IST
विज्ञापन
No Reservation to Jatt Sikh of Punjab
पंजाब सरकार की लापरवाही के चलते प्रदेश के जट्ट सिख सरकारी नौकरियों में आरक्षण से महरूम रह जाएंगे। केंद्र सरकार की ओर से नौ राज्यों में जाट बिरादरी के लोगों को अदर बैकवर्ड क्लासेस (ओबीसी) में शामिल करने की कवायद शुरू की गई है, लेकिन इन राज्यों में पंजाब शामिल नहीं है।
विज्ञापन


इसका कारण यह है कि पंजाब सरकार ने इस बारे में कोई प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा ही नहीं है। हैरानी की बात यह है कि शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने इस मुद्दे पर पार्टी स्तर पर एक प्रस्ताव पास करके सहमति भी जता दी थी, लेकिन शिअद की अपनी ही सरकार ऐसा कोई प्रस्ताव केंद्र को नहीं भेजा।
विज्ञापन


जाट बिरादरी को ओबीसी कैटेगरी में शामिल करने की मांग लंबे समय से उठ रही थी। आखिरकार केंद्र सरकार ने उन राज्यों से प्रस्ताव मांगे, जहां जाट बिरादरी के लोगों की संख्या अधिक हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


नौ राज्यों ने इस संबंधी प्रस्ताव पास करके केंद्र सरकार को भेज दिए हैं, जिनमें हरियाणा, गुजरात, दिल्ली, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार शामिल हैं।

पंजाब में भी जट्ट सिखों की संख्या अधिक है, लेकिन पंजाब सरकार ने केंद्र को अपने प्रदेश के जट्ट सिखों को आरक्षण दिलाने के लिए कोई प्रस्ताव नहीं भेजा।

उधर, नेशनल कमीशन फॉर बैकवर्ड क्लासेस ने राज्यों की सिफारिश पर जाटों को ओबीसी में शामिल करने की कवायद शुरू कर दी है।

इसके लिए आयोग पहले सभी नौ राज्यों के संगठनों और लोगों से जाटों को ओबीसी में शामिल करने के हक और विरोध में पक्ष सुनेगा। उसके बाद केंद्र सरकार को अपनी सिफारिश भेजेगा, जिसके आधार पर केंद्र सरकार उक्त नौ राज्यों में जाटों को आरक्षण दे सकती है। लेकिन उस समय पंजाब के जट्ट सिख इसका लाभ नहीं ले पाएंगे।

दस फरवरी से आयोग सुनेगा जाटों का पक्ष
नेशनल कमीशन फॉर बैकवर्ड क्लासेज के चेयरमैन डॉ. वी. इस्वेरैया और सदस्य डॉ. शकील उज जमा अंसारी, एसके खरवेंथन और सचिव एके मंगोत्रा जाटों को ओबीसी में शामिल करने के संबंध में लोगों का पक्ष सुनेंगे।

दस फरवरी को सीरी फोर्ट ऑडिटोरियम दिल्ली में यह सुनवाई शुरू होगी, जो 11 फरवरी तक चलेगी। दस फरवरी को हरियाणा, गुजरात, दिल्ली और उत्तराखंड के लोग अपनी बात आयोग के सामने रखेंगे जबकि 11 फरवरी को उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार के लोगों को मौका दिया जाएगा।

इसी तरह, जिन लोगों को जाटों को ओबीसी में शामिल करने पर एतराज है, वे 12 और 13 फरवरी को आयोग के सामने अपना पक्ष रख सकेंगे। 12 को हरियाणा, गुजरात, दिल्ली, उत्तराखंड और 13 फरवरी को यूपी, हिमाचल, राजस्थान, एमपी और बिहार के लोगों को मौका दिया जाएगा।

कैप्टन ने भी सरकारी देरी पर जताई थी चिंता
पंजाब के पूर्व सीएम और जाट महासभा के प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पहले ही आगाह किया था कि अगर राज्य सरकार ने जल्द कुछ न किया तो पंजाब के जट्ट सिख आरक्षण से महरूम रह जाएंगे।

कैप्टन ने मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल पर दोहरे चरित्र का आरोप लगाते हुए सवाल उठाया था कि शिअद द्वारा प्रस्ताव पास करने के बाद भी सरकार क्यों इस प्रस्ताव को केंद्र को नहीं भेज रही।

उनका कहना था कि पंजाब में जट्ट सिख खेती पर निर्भर हैं। जमीनें कम होने के बाद उनका गुजारा मुश्किल हो गया है। ओबीसी में शामिल होने के बाद कम से कम उनके बच्चों को नौकरी तो मिल सकेगी।


- जिन राज्यों ने जाटों को ओबीसी में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा है, उनका रिकार्ड स्टडी किया जा रहा है। जल्द ही केस तैयार करके केंद्र को भेज दिया जाएगा।
- डॉ. दलजीत सिंह चीमा, प्रवक्ता, अकाली दल
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed