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रॉबर्ट वाड्रा को स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी वैट मामले में कोर्ट से झटका

Wed, 27 Apr 2016 06:00 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 27 Apr 2016 06:00 PM IST
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no relief to Robert Vadra from court on issue of skylight hospitality VAT
रॉबर्ट वाड्रा - फोटो : file photo

रॉबर्ट वाड्रा की गुड़गांव स्थित स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को वैट भुगतान के मामले में किसी तरह की राहत नहीं मिल सकी है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मंगलवार को हरियाणा सरकार के जवाब को रिकार्ड पर लेते हुए कंपनी की याचिका का निपटारा कर दिया।

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कंपनी ने याचिका दायर कर शिकायत की थी कि हरियाणा सरकार वैट से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा रही। मंगलवार को सरकार ने हाईकोर्ट में कहा कि कंपनी को इस मामले से जुड़े सभी दस्तावेज उपलब्ध करा दिए गए हैं।
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कंपनी ने याचिका दायर कर हरियाणा के एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग की ओर से जारी उस नोटिस को चुनौती दी थी, जिसके तहत विभाग ने स्काई लाइट कंपनी को नोटिस भेजकर वेट असेसमेंट पर जवाब मांगा था। कंपनी ने याचिका में कहा कि कंपनी के पास जो 3.53 एकड़ जमीन थी, उसे उसने वर्ष 2012 में ही डीएलएफ को बेच दिया था।
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बावजूद इसके एक्साइज विभाग अब कंपनी को नोटिस भेजकर वेट असेसमेंट पर जानकारी मांग रहा है। कंपनी ने इस बारे में विभाग को पत्र लिखकर यह भी पूछा था कि कंपनी से किस आधार वैट की मांग की जा रही है। याचिका में कहा गया कि विभाग ने कंपनी को पत्र का कोई जवाब नहीं दिया।

उल्लेखनीय है कि हरियाणा सरकार वाड्रा लैंड डील मामले की जांच के लिए जस्टिस ढींगरा आयोग का गठन करने के बाद राबर्ट वाड्रा की स्काई लाइट कंपनी को नोटिस जारी कर पूछा था कि कंपनी पर हरियाणा वैट एक्ट के उल्लंघन को लेकर क्यों न कार्रवाई की जाए? राज्य के एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग ने स्काई लाइट कंपनी को गत 28 मार्च तक वैट असेसमेंट देने के आदेश जारी किए थे। विभाग ने कंपनी को नोटिस भेज कर कहा था कि स्काई लाइट कंपनी ने अपना लाइसेंस डीएलएफ को बेचा है, लिहाजा उसे वैट अदा करना होगा।

इसके खिलाफ कंपनी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिस पर हाईकोर्ट ने अगले आदेश तक कोई कार्रवाई नहीं करने का हरियाणा सरकार को आदेश दिया था। कंपनी इस बात पर अड़ी रही कि उसने अपने अधिकार वाली 3.53 एकड़ भूमि डीएलएफ को बेच दी है।


कंपनी ने याचिका में आरोप लगाया कि सरकार यह अंदाजा लगा रही है कि कंपनी ने जमीन के साथ अपना लाइसेंस भी डीएलएफ को बेच दिया है, जबकि कंपनी ने सरकार की अनुमति से लाइसेंस ट्रांसफर किया था, जिसके लिए पूरी फीस अदा की गई थी। ऐसे में कंपनी पर वैट की अदायगी नहीं बनती है। इसके बाद भी एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग कंपनी को वैट के लिए परेशान कर रहा है।

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