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चंडीगढ़ः प्रधानमंत्री आवास योजना को लगा ग्रहण, अब तक नहीं मिली योजना को मंजूरी

Mon, 07 Jan 2019 03:26 PM IST
खुशबू गोयल अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, चंडीगढ़
अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 07 Jan 2019 03:26 PM IST
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no permission to pradhanmantri aavas yojna in chandigarh, chandigarh housing board
प्रधानमंत्री आवास योजना
प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत गरीबों को घर देने की योजना चंडीगढ़ में अभी तक परवान नहीं चढ़ पाई है। इसकी वजह मिनिस्ट्री से नए साल में भी मंजूरी नहीं मिल पाना है। इसके चलते यह प्रोजेक्ट अधर में है। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) ने मार्केट रेट से कम कीमत पर जमीन देने की फाइल पहले ही मिनिस्ट्री के पास भेज दी थी। अब तक केंद्र से बोर्ड को मंजूरी नहीं मिल सकी है। बोर्ड ने मलोया, धनास और मौलीजागरां में योजना के तहत फ्लैट्स बनवाने की योजना बनाई है।
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प्रशासन के फाइनेंस सेक्रेटरी एवं सीएचबी के चेयरमैन अजोय कुमार सिन्हा ने बताया कि हमने फाइल तैयार करके केंद्र को भेज दी थी। संभावना थी कि दिसंबर में केंद्र इसे मंजूरी दे देगा, लेकिन अभी तक मिनिस्ट्री की ओर से इस योजना को अप्रूवल नहीं मिली है। केेंद्र से अनुमति मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा। इसकी पूरी तैयारी कर ली गई है। सीएचबी को इस प्रोजेक्ट के लिए नोडल एजेंसी बनाया है। बोर्ड चेयरमैन ने बताया कि इस योजना के तहत मलोया, धनास और मौलीजागरां में जमीन लेने की तैयारी पूरी कर ली है। फाइल तैयार करके केंद्र को भेज दी गई है।
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दो साल पहले शुरू हुई थी कवायद
बोर्ड ने दो वर्ष पूर्व 20 मार्च को गरीब लोगों को घर देने के लिए यह प्रोजेक्ट शुरू किया था। ईडब्ल्यूएस, एलआईजी और एमआईजी का डिमांड सर्वे किया था। सीएचबी के सूत्रों की मानें तो प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों को घर देने की मंजूरी मिल जानी चाहिए थी। लोगों को आशा है कि जल्द ही योजना को मंजूरी मिल जाएगी।
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ऐसे हुआ गरीबों का चयन
योजना के तहत इच्छुकों लोगों से आवेदन मांगे थे। बोर्ड ने 444 लोगों के नामों की फाइनल लिस्ट जारी की थी। जो लोग बाद में किसी कारण प्रपत्र पूरे नहीं कर पाए थे, उन्हें एक और मौका दिया था। यही वजह है कि बाद में छंटनी में कुल 9 हजार लोग योग्य लोग पाए गए थे।

2012 में भेजा गया था लेटर
योजना का लाभ लेने के लिए 1.27 लाख लोगों ने अप्लाई किया था। सीएचबी आशा कर रहा है कि अधिग्रहण दर पर ही उन्हें इसके लिए जमीन मिल जाए, जो 3.1 करोड़ रुपये प्रति एकड़ है। केंद्र ने 2012 में जो लेटर जारी किया था, उसके तहत ऐसे प्रोजेक्ट के लिए जमीन दर मार्केट रेट्स से कम नहीं हो सकती है, जोकि 30 करोड़ प्रति एकड़ है।


ऐसे में तो बढ़ेंगे फ्लैट्स के रेट्स
अगर मार्केट रेट पर ही प्रशासन को इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन अलॉट होती है, तो फ्लैट्स रेट्स काफी अधिक बढ़ जाएंगे। ईडब्ल्यूएस फ्लैट्स की कीमत 25 लाख तक पहुंच जाएगी। अधिग्रहण दर पर इसकी कीमत करीब 10 लाख ही होगी। बोर्ड की ओर से मलोया, धनास और मौलीजागरां में योजना के तहत फ्लैट्स का निर्माण होना है। इसके लिए जमीन की पहचान कर ली गई है।
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