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गुरुद्वारा करतारपुर साहिब में पाकिस्तानी मुस्लिमों को जाने की इजाजत नहीं, दो चौंकाने वाले खुलासे

Thu, 05 Dec 2019 09:57 AM IST
खुशबू गोयल अशोक नीर/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
अशोक नीर/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब) Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 05 Dec 2019 09:57 AM IST
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No Permission to Pakistani Muslims to Enter in Gurudwara Kartarpur Sahib
गुरुद्वारा करतारपुर साहिब
पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा करतारपुर साहिब की पहली मंजिल, जहां श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी सुशोभित हैं, उस पवित्र स्थान पर पाकिस्तानी मुस्लिमों को जाने की इजाजत नहीं है। पाकिस्तानी मुस्लिम गुरुद्वारा साहिब की पहली मंजिल पर जहां श्री गुरु नानक देव जी की समाधि (दरगाह) विराजमान है, वहीं सजदा कर सकते हैं।
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पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (पीएसजीपीसी) के अध्यक्ष सतवंत सिंह ने एक संदेश में यह जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तानी मुस्लिम किसी सिख के साथ गुरुद्वारा साहिब में माथा टेकने के लिए आए तो उसे इसकी अनुमति दी जाती है। एक उत्तर में भाई सतवंत सिंह ने बताया कि पाकिस्तानी मुस्लिमों को गुरुद्वारा साहिब में जाने की इसलिए इजाजत नहीं है कि कहीं गलती से उनसे मर्यादा भंग न हो जाए।
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पाकिस्तानी मुस्लिमों से वसूले जाते हैं 200 रुपये
पीएसजीपीसी के अध्यक्ष सतवंत सिंह ने बताया कि गुरुद्वारा साहिब की पहली मंजिल में विराजमान समाधि के दर्शन के लिए आने वाले मुस्लिमों के प्रवेश के लिए पाकिस्तान सरकार ने 200 रुपये की फीस तय की है। पाकिस्तानी सिखों को छोड़कर शेष सभी धर्म के लोगों से गुरुद्वारा साहिब में प्रवेश से पहले यह फीस वसूली जा रही है।
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इस संदर्भ में भाई सतवंत सिंह ने कहा कि पीएसजीपीसी ने पाकिस्तान सरकार को एक पत्र लिख कर इस फीस को माफ करने का आग्रह किया है। बता दें कि पाकिस्तान ने भारतीय श्रद्धालुओं से भी 20 अमरीकी डॉलर यानि 1400 रुपये की फीस की शर्त थोप रखी है।

मंजीत पाकिस्तानी से गुरुद्वारा के अंदर ही मिली थी

बता दें कि हरियाणा निवासी मंजीत कौर सोशल मीडिया के माध्यम से दोस्त बने फैसलाबाद निवासी आवेश मुख्त्यार से मिली तो उसकी पहली भेंट गुरुद्वारा साहिब में ही हुई थी। इस पवित्र स्थान पर मुस्लिमों के प्रवेश पर लगाई गई पाबंदी के बावजूद आवेश मुख्त्यार अपने दोस्त व पत्नी के साथ मंजीत कौर को मिलने पहली मंजिल पर पहुंचा था। आवेश मुख्त्यार उसके दोस्त व उसकी पत्नी कुछ घंटे गुरुद्वारा साहिब में बैठकर मंजीत कौर के साथ बातचीत करते रहे, लेकिन वहां मौजूद किसी भी ग्रंथि सिंह ने इस बात का संज्ञान नहीं लिया।

आवेश मुख्यतार ने मंजीत कौर के साथ गुरुद्वारा साहिब में बैठकर बनाई योजना के अनुसार उसे अपने दोस्त की पत्नी का वह यात्रा कार्ड दे दिया जो उसने समाधि में सजदा करने के लिए बनाया था। मंजीत कौर की इस साजिश को पाक रेंजर ने नाकाम कर दिया।

मंजीत कौर की घटना के बाद पाकिस्तान रेंजर ने गुरुद्वारा साहिब के आसपास की सुरक्षा कड़ी कर दी है। जानकारी के अनुसार भारत से जाने वाले श्रद्धालुओं को गुरुद्वारा साहिब के दर्शन करने के बाद उन्हें बायोमैट्रिक सत्यापन के लिए कहा जाएगा।

पाक रेंजर ने मंजीत कौर की घटना के बारे में बीएसएफ को जानकारी तक नहीं दी
23 नवंबर को मंजीत कौर को पाकिस्तानी रेंजर ने पकड़ा तो उन्होंने मंजीत कौर द्वारा किए गए इस कृत्य के बारे में बीएसएफ अधिकारियों को कोई भी जानकारी नहीं दी। रेंजर ने मंजीत कौर को पाकिस्तान की तरफ से हिरासत में लेकर भारत की तरफ जाने वाले कॉरिडोर से वापस भेज दिया था।

मंजीत कौर की इस साजिश पर पाकिस्तान ने बीएसएफ के साथ कोई भी फ्लैग मीटिंग करने की जहमत नहीं उठाई। इस कारण बीएसएफ को घटना की जानकारी नहीं मिली। जानकारी के अनुसार 23 नवंबर को गुरुद्वारा साहिब के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं में से पांच के नाम मंजीत कौर थे।
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