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Chandigarh News: विंसेंट की पेंटिंग किसी ने समझा न खरीदी, पर कला का साथ नहीं छोड़ा

Sat, 12 Jul 2025 02:06 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 12 Jul 2025 02:06 AM IST
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No one understood or bought Vincent's paintings, but he did not abandon art
चंडीगढ़। सेक्टर-18 के टैगोर थिएटर के मिनी ऑडिटोरियम में शुक्रवार को नाटक फाइंडिंग विंसेंट का मंचन किया गया। इसका लेखन सत्यव्रत राउत ने किया है और निशा लुथरा के निर्देशन में द नैरेटर्स के कलाकारों ने अभिनय किया। इस नाटक में विंसेंट की कहानी है। इस कहानी को मूवमेंट और इमेजरी के माध्यम से पेश किया गया है। इसमें सभी 21 दृश्य संवाद, इमेजरी, मास्क और प्रोजेक्शन से दिखाए गए। विंसेंट एक बहुत बड़े पेंटर हैं।
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नाटक में दिखाया कि विंसेंट का काम किसी ने भी नहीं समझा और न ही उनकी पेंटिंग खरीदी। उनके पिता पादरी थे और चाहते थे कि वह पादरी बने। वे पादरी बन गए। वे कोयला खदान के पास्टर बनकर गए और वहां पर दुखों की पेंटिंग बना डाली। वहां के मजदूरों के नाखूनों में समाए कोयले की पेंटिंग बनाई और वे वहां के लोगों के दुखों में डूब गए और उनकी पेंटिंग बनानी शुरू कर दी। वे बच्चे की लाश देखकर रोने लगे और उसकी पेंटिंग बना दी। वहां एक पादरी आते हैं और कहते हैं कि आपकी नौकरी खत्म कर देंगे क्योंकि जिस काम के लिए भेजा है वह आपने नहीं किया।
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विंसेंट एक क्रिस्टी नाम की वेश्या के साथ रहने लगे और क्रिस्टी प्यार मांगती है। वे पेंटर से पेंटिंग की बारीकियां सीखने जाते हैं। उन्हें तकनीक नहीं आती और ऐसा लगा कि उसे बांधा जा रहा है। नाटक में रस्सी से बांधते दिखाया है। नाटक में संकेतों का प्रयोग किया गया है। इसमें दिखाया गया कि उनके भाई थियो थे, जो विंसेंट को समझते थे। थियो की मृत्यु हो जाती है। फ्रांस में विंसेंट और थियो के कब्र एक दूसरे के साथ है। इसमें दिखाया कि रंग भी नाच रहे हैं। रंगों से विंसेंट को श्रद्धांजलि दी जाती है। विंसेंट की मृत्यु के बाद उनकी भाभी यानि थियो की पत्नी उनकी कलाकृतियों को बाहर निकालकर समाज में लाती हैं। इसके बाद लोगों को पता चलता है कि विंसेंट कितने महान कलाकार थे। उनके मरने के बाद उनकी पेंटिंग बिकी। नाटक संदेश के साथ समाप्त हुई कि कला का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। कई बार रिश्ते किरदार छोड़ने पड़ते हैं। हर कलाकार संघर्ष से गुजरता है। हर कलाकार में विंसेंट है। नाटक में काले कपड़े से कोयला खदान को दिखाया गया। इस नाटक में मनप्रीत, प्रयाग, भानु, सूर्याराजपूत, अर्यान, अंशिका, दक्ष, ऋषभ और आदित्य ने अभिनय किया है।
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