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चंडीगढ़: सादे कागज पर अग्निशमन विभाग का नोटिस, लोग ठेंगा दिखाकर चला रहे काम

Mon, 09 Aug 2021 07:03 PM IST
ajay kumar नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 09 Aug 2021 07:03 PM IST
सार

2019 में सूरत के एक कोचिंग संस्थान में आग लगने के मामले के बाद विभाग हरकत में आया था। इस दौरान विभाग ने जांच अभियान चलाकर 265 कोचिंग संचालकों को नोटिस जारी किया था। इसके बाद 150 लोगों ने एनओसी के लिए आवेदन किया था। इसमें से भी 50 लोगों को एनओसी दी गई। विभाग यहां भी नोटिस देने के बाद भूल गया।

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No one is taking seriously the notice of fire department in Chandigarh
चंडीगढ़ - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

चंडीगढ़ में अग्निशमन विभाग के नोटिस को कोई गंभीरता से नहीं ले रहा है, क्योंकि विभाग सादे कागज पर लोगों को नोटिस जारी करता है। इस वजह से लोगों के खिलाफ भविष्य में कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हो सकती है। विभाग के नोटिसों को लोग धत्ता बताकर पीजी और कोचिंग संचालित कर रहे हैं। वहीं, बड़ी घटनाओं के बाद अधिकारियों की नींद खुलती है और वे नोटिस जारी करते हैं।

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चंडीगढ़ अग्निशमन विभाग वर्तमान में दिल्ली अधिनियम 1986 के अंतर्गत कार्रवाई कर रहा है, जबकि दिल्ली ने 2007 में ही अपने नियमों को बदल दिया था। शहर की ज्यादातर इमारतें पुराने अधिनियम के अंतर्गत नहीं हैं। इस दौरान नियमों का पालन न करने वालों को निगम एक सादे कागज पर नोटिस जारी करता है, जबकि नियमानुसार एक प्रोफार्मा के अंतर्गत नोटिस दिया जाता है। सादे कागज पर जारी नोटिस के बाद संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई संभव नहीं होती है। वहीं, 2007 में बने अधिनियम पहले से सख्त हैं। हालांकि, निगम अब अपने अधिनियमों के संशोधन की तैयारी में जुट गया है।
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दो साल में मात्र 43 पीजी ने किया एनओसी के लिए आवेदन
बीते साल 22 फरवरी को सेक्टर-32 डी के एक पीजी में आग लग गई थी। उससे पहले किसी भी पीजी संचालक ने फायर विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) नहीं लिया था। वहीं विभाग ने भी कभी इनकी जांच की जहमत नहीं उठाई। दो छात्राओं की मौत के बाद शहर के एसडीएम से लेकर अन्य अधिकारी अवैध पीजी को बंद कराने में जुट गए। पिछले दो वर्ष में शहर के 43 पीजी संचालकों ने एनओसी के लिए आवेदन किया था। इसमें 2020 में 25 लोगों को और 2021 में 18 में से 16 लोगों को एनओसी जारी हुई, जबकि शहर में धड़ल्ले से अभी भी अवैध पीजी चल रहे हैं। प्रशासन की ओर से जारी 300 से ज्यादा नोटिसों का आज तक फॉलोअप नहीं किया गया है।

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सीबीएसई का चला डंडा, तब यादा आया एनओसी का फंडा

सीबीएसई ने इस बार स्कूलों को पंजीकरण के लिए अग्निशमन विभाग की एनओसी देने को कहा है। तब ज्यादातर स्कूलों ने एनओसी के लिए आवेदन किया है। शहर के 200 स्कूलों में से मात्र 59 के पास ही फायर विभाग की एनओसी है, जबकि विभाग इन्हें नोटिस देने तक की जहमत नहीं उठाता। यही हाल शहर के अस्पतालों का है। कोविड केयर सेंटर चला रहे मात्र दो अस्पतालों के पास ही फायर विभाग की एनओसी थी, जबकि बिना एनओसी के कई सेंटर बना दिए गए थे।

फिलहाल इसके संशोधन के लिए काम कर रहे हैं। इसके लिए एक कमेटी बनी है। इसका मैं चेयरमैन हूं। समय के अनुसार अधिनियम में संशोधन कर रहे हैं। - यादवेंद्र सिंह, कानूनी अधिकारी, निगम

 

संस्थानों को समय-समय पर नोटिस जारी करते हैं। आवेदन करने वालों के यहां जाकर मुआयना भी करते हैं। मानकों के अनुसार काम न होने पर उसे एनओसी जारी नहीं कर सकते। - सौरभ आरोड़ा, मुख्य अग्निशमन अधिकारी

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