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250 किलोवॉट तक के सोलर प्लांट लगाने पर अब विद्युत निरीक्षण नहीं
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चंडीगढ़। सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत 250 किलोवॉट के सोलर प्लांट को लगाने के लिए कोई भी विद्युत निरीक्षण नहीं होगा। पहले इस काम में तीन से चार महीने का समय लगता था। इस वजह से कई जगह सोलर प्लांट लगने में दिक्कत आ रही थी, लेकिन अब इस फैसले को हटा दिया गया है। साथ ही यह भी तय किया गया है कि विद्युत विभाग को तकनीकी फिजिबिलिटी की रिपोर्ट सात दिन के भीतर देनी होगी। चंडीगढ़ प्रशासन का कहना है कि इससे सोलर प्लांट को लगाने में तेजी आएगी। बताया गया है कि चंडीगढ़ को साल 2022 तक सौर ऊर्जा उत्पादन में 69 मेगावॉट का लक्ष्य हासिल करना है। प्रशासन ने अब तक 37.5 मेगावाट का लक्ष्य हासिल कर लिया है। ये सारे निर्णय यूटी सलाहकार मनोज परिदा की अध्यक्षता में हुई एक समीक्षा बैठक में लिया गया है। बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि इसमें कई सारे विभाग को एक साथ जुड़ना पड़ता है, लेकिन टीमों के बीच समन्वय नहीं है। क्रेस्ट शहर में सौर परियोजनाओं को स्थापित करने के लिए नोडल एजेंसी है, लेकिन इसमें यूटी इंजीनियरिंग विभाग, बिजली विभाग, शहरी नियोजन विभाग, मुख्य वास्तुकार कार्यालय, नगर निगम और अन्य विभाग की भी भागीदारी है। बैठक में सलाहकार ने सभी विभाग को एक टीम के तौर पर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया।
सौर परियोजनाओं की स्थापना के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए, केंद्र सरकार ने प्रशासन को 5 करोड़ रुपये भी जारी किए थे, जिसका उपयोग निवासियों को सौर सब्सिडी स्थानांतरित करने के लिए किया जा रहा है। यह सब्सिडी उन लोगों को दी गई, जिन्होंने अपनी छतों पर सौर संयंत्र स्थापित किए थे।
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सौर परियोजनाओं की स्थापना के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए, केंद्र सरकार ने प्रशासन को 5 करोड़ रुपये भी जारी किए थे, जिसका उपयोग निवासियों को सौर सब्सिडी स्थानांतरित करने के लिए किया जा रहा है। यह सब्सिडी उन लोगों को दी गई, जिन्होंने अपनी छतों पर सौर संयंत्र स्थापित किए थे।
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