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जाने को पैसे नहीं तो क्या तारा विदेश नहीं जाएगी?
संजीव पंगोत्रा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 26 Feb 2014 01:02 PM IST
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शहर की फेंसिंग की खिलाड़ी तारा कारकी का बुल्गारिया में वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में चयन हुआ है। लेकिन उसके परिवार की आर्थिक हालत ऐसी नहीं कि वह तारा को वहां भेज सके। अब चंडीगढ़ की इस उभरती प्रतिभा को किसी स्पॉन्सर की तलाश है।
सत्रह वर्षीय तारा के सिटी ब्यूटीफुल की सर्वश्रेष्ठ तलवारबाज बनने के पीछे की कहानी संघर्ष से भरी है। सेक्टर-10 में किराये पर रहने वाले उसके माता-पिता दोनाें ही अस्थमा के मरीज हैं।
उसके पिता रेहड़ी लगाते हैं और पार्ट टाइम कुक का काम करते हैं। तारा गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकें डरी स्कूल सेक्टर-10 में 12वीं की छात्रा है और इसी स्कूल में बनी शहर की इकलौती फेंसिंग एकेडमी की सदस्य है।
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उसकी मां अधिकतर बीमार रहती है। इस कारण तारा घर पहुंचकर पहले घर का खाना बनाती है और फिर वापस स्कूल में चलने वाली एकेडमी में प्रैक्टिस के लिए जाती है।
वह वहां रोज तीन घंटे से ज्यादा समय तक कड़ा अभ्यास करती है। इसके बाद शाम को पिता के काम में मदद करती है। इसके बावजूद उसके हौसले बेहद बुलंद हैं। वह दुनिया भर में देश का नाम रोशन करना चाहती है।
ऐसी तलवारबाज बेहद कम देखने को मिलती है : कोच
तारा की कोच चरणजीत कौर जोकि भारतीय फेंसिंग टीम की सबसे पहली महिला कोच थी, का कहना है कि तारा जैसी तलवारबाज बहुत कम देखने को मिलती है।
उसका बुल्गारिया में वर्ल्ड चैंपियनशिप में कैडेट वर्ग में भारतीय टीम में चयन हुआ है। इसमें एक लाख से अधिक का खर्चा आएगा। अगर इसे कोई स्पॉन्सर मिल जाए तो वह वर्ल्ड चैंपियनशिप में देश के लिए मेडल जीतने में कामयाब होगी।
सहेलियों ने दिया झांसी की रानी का खिताब
सहेलियों ने तारा को झांसी की रानी का खिताब दिया है। उनका कहना है कि जब वे तलवारबाजी करती है तो विरोधियों के छक्के छुड़ा देती है।
तारा की उपलब्धियां
- 2013 में स्कूल नेशनल गेम्स में 2 टीम गोल्ड और 1 सिल्वर मेडल जीता
- 2013 स्टेट गेम्स में 2 गोल्ड और 1 ब्रॉन्ज मेडल
- 2013 में जूनियर नेशनल मे सिल्वर मेडल
- 2014 में आंध्र प्रदेश में स्कूल नेशनल गेम्स में देश की नंबर वन तलवारबाज को हराकर मेडल जीता।
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सत्रह वर्षीय तारा के सिटी ब्यूटीफुल की सर्वश्रेष्ठ तलवारबाज बनने के पीछे की कहानी संघर्ष से भरी है। सेक्टर-10 में किराये पर रहने वाले उसके माता-पिता दोनाें ही अस्थमा के मरीज हैं।
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उसके पिता रेहड़ी लगाते हैं और पार्ट टाइम कुक का काम करते हैं। तारा गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकें डरी स्कूल सेक्टर-10 में 12वीं की छात्रा है और इसी स्कूल में बनी शहर की इकलौती फेंसिंग एकेडमी की सदस्य है।
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उसकी मां अधिकतर बीमार रहती है। इस कारण तारा घर पहुंचकर पहले घर का खाना बनाती है और फिर वापस स्कूल में चलने वाली एकेडमी में प्रैक्टिस के लिए जाती है।
वह वहां रोज तीन घंटे से ज्यादा समय तक कड़ा अभ्यास करती है। इसके बाद शाम को पिता के काम में मदद करती है। इसके बावजूद उसके हौसले बेहद बुलंद हैं। वह दुनिया भर में देश का नाम रोशन करना चाहती है।
ऐसी तलवारबाज बेहद कम देखने को मिलती है : कोच
तारा की कोच चरणजीत कौर जोकि भारतीय फेंसिंग टीम की सबसे पहली महिला कोच थी, का कहना है कि तारा जैसी तलवारबाज बहुत कम देखने को मिलती है।
उसका बुल्गारिया में वर्ल्ड चैंपियनशिप में कैडेट वर्ग में भारतीय टीम में चयन हुआ है। इसमें एक लाख से अधिक का खर्चा आएगा। अगर इसे कोई स्पॉन्सर मिल जाए तो वह वर्ल्ड चैंपियनशिप में देश के लिए मेडल जीतने में कामयाब होगी।
सहेलियों ने दिया झांसी की रानी का खिताब
सहेलियों ने तारा को झांसी की रानी का खिताब दिया है। उनका कहना है कि जब वे तलवारबाजी करती है तो विरोधियों के छक्के छुड़ा देती है।
तारा की उपलब्धियां
- 2013 में स्कूल नेशनल गेम्स में 2 टीम गोल्ड और 1 सिल्वर मेडल जीता
- 2013 स्टेट गेम्स में 2 गोल्ड और 1 ब्रॉन्ज मेडल
- 2013 में जूनियर नेशनल मे सिल्वर मेडल
- 2014 में आंध्र प्रदेश में स्कूल नेशनल गेम्स में देश की नंबर वन तलवारबाज को हराकर मेडल जीता।