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Hindi News ›   Chandigarh ›   No member of Badal family won in Punjab assembly elections 2022

30 साल में पहली बार: जब विधानसभा में नहीं होगा बादल परिवार का कोई सदस्य, सुखबीर, मनप्रीत और प्रकाश सिंह बादल अपना किला नहीं बचा सके

Fri, 11 Mar 2022 12:58 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 11 Mar 2022 12:58 AM IST
सार

आप के पंजाब में प्रवेश करते ही शिअद के गढ़ माने जाने वाले मालवा की राजनीति को ही बदल दिया। 2017 में आप ने अकालियों को मालवा में आठ सीटों तक सीमित कर दिया था। वहीं शिअद ने दोआबा में दो और माझा में पांच सीटें जीतीं थीं। 

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No member of Badal family won in Punjab assembly elections 2022
पंजाब विधानसभा चुनाव परिणाम 2022 - फोटो : फाइल

विस्तार

पंजाब के इस चुनाव से बादल परिवार का राजनीतिक कॅरियर दांव पर लग गया है। साथ ही पूरी पार्टी की साख के लिए भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। 30 साल में यह पहला मौका है जब पंजाब की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले बादल परिवार से एक भी प्रत्याशी जीत हासिल नहीं कर पाया।

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राज्य के पांच बार मुख्यमंत्री रह चुके 94 वर्षीय प्रकाश सिंह बादल सहित शिअद प्रधान सुखबीर बादल भी चुनाव में हार गए। किसान आंदोलन के बीच अकाली दल को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन छोड़ना पड़ा और अपने सबसे पुराने गठबंधन सहयोगी भाजपा को भी अलविदा कह दिया। इसके बाद बादल परिवार ने पंजाब चुनाव में बसपा के साथ जाने का फैसला किया। हालांकि चुनाव प्रचार में प्रमुख चेहरा गठबंधन के सुखबीर बादल रहे। 
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पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए शिअद प्रधान ने राज्यभर में धुआंधार प्रचार किया। इसके बावजूद पार्टी को सकारात्मक परिणाम नहीं मिल पाए। शिरोमणि अकाली दल का अभियान पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व में सिर्फ परिवार के सदस्यों पर ही निर्भर रहा। प्रकाश सिंह बादल खराब स्वास्थ्य के कारण लंबी से बाहर प्रचार नहीं कर पाए लेकिन पार्टी अध्यक्ष सुखबीर बादल और उनकी पत्नी पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने राज्यभर में प्रचार किया। 
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आप ने किया सबसे ज्यादा नुकसान
शिअद को 2017 के बाद 2022 के चुनाव में आम आदमी पार्टी ने सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। आप के पंजाब में प्रवेश करते ही शिअद के गढ़ माने जाने वाले मालवा की राजनीति को ही बदल दिया। 2017 में आप ने अकालियों को मालवा में आठ सीटों तक सीमित कर दिया था। वहीं शिअद ने दोआबा में दो और माझा में पांच सीटें जीतीं थीं। 

पंजाब में बादल परिवार का इतिहास
1920 में जब पंजाब एक अविभाजित राज्य था, तब सिखों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए, मास्टर तारा सिंह ने शिरोमणि अकाली दल की स्थापना की थी। पार्टी सिख पंथ और धार्मिक सिद्धांतों पर काम करने वाली पार्टी मानी जाती थी। बाद में प्रकाश सिंह बादल अकाली दल में शामिल हुए, लेकिन अंग्रेजों की लड़ाई के कारण पंजाब का बुरा हाल था। देश के साथ पंजाब भी बंट गया। 1966 में वर्तमान पंजाब का गठन हुआ। तब अकाली दल नए पंजाब में सत्ता में आया। प्रकाश सिंह बादल पांच बार पंजाब के मुख्यमंत्री रहे चुके हैं।


कौन-कहां से हारा
पंजाब विधानसभा चुनाव के इतिहास में पहली बार हुआ कि 2022 के विधानसभा चुनाव में बादल परिवार का कोई भी सदस्य चुनाव नहीं जीत पाया। पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल जिंदगी के आखरी पड़ाव में लंबी से चुनाव हार गए, जबकि सुखबीर सिंह बादल जलालाबाद विस क्षेत्र से चुनाव हार चुके हैं। इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री बादल के भतीजे मनप्रीत बादल भी बठिंडा शहर सीट से आप प्रत्याशी गिल से चुनाव हार गए।

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