अमर उजाला पड़ताल: जन औषधि का सिस्टम बीमार... एक दुकान पर स्टॉक ही नहीं, दूसरी पर दवा की भरमार
एक तरफ तो अस्पताल के जन औषधि केंद्र पर दवाओं की कमी होने के कारण मरीज लौटाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अस्पताल की वेबसाइट पर 198 तरह की जेनेरिक दवाओं की लिस्ट जारी की गई है। इससे साफ पता चल रहा है कि मरीजों के साथ प्रशासन की आंख में धूल झोंका जा रहा है।
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स्वास्थ्य विभाग की जेनेरिक दवाओं की योजना जीएमसीएच 32 में दम तोड़ती नजर आ रही है। स्थिति यह है कि एक तरफ जहां जीएमएसएच 16 के जन औषधि केंद्र पर मरीजों की धक्कामुक्की नजर आ रही है, वहीं दूसरी तरफ जीएमसीएच 32 के जन औषधि केंद्र पर इक्का-दुक्का मरीज नजर आ रहे हैं। इसका कारण प्रशासन का पूरा जोर जीएमएसएच 16 पर होना है। इसका लाभ उठाकर जीएमसीएच 32 के निजी दवा के दुकानदार जन औषधि केंद्र पर दवाओं की उपलब्धता नहीं होने दे रहे हैं जबकि दोनों ही केंद्रों में दवा के स्टॉक एक ही जगह से मंगाए जा रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि अस्पताल प्रशासन को भी इसकी भलीभांति जानकारी है। अब नए डायरेक्टर प्रिंसिपल भी पुरानी व्यवस्था में सुधार करने की योजना बना रहे हैं।
बता दें कि जीएमसीएच 32 और जीएमएसएच 16 में एक-एक जन औषधि केंद्र संचालित किया जा रहा है। पूर्व स्वास्थ्य सचिव के तमाम प्रयास के बाद दोनों दुकानें लगभग तीन साल तक बंद रहने के बाद दोबारा खोली गई थीं। इसके बाद भी जीएमसीएच 32 की दुकान से मरीजों को कोई लाभ होता नजर नहीं आ रहा है, जबकि जीएमएसएच 16 की जन औषधि केंद्र में दवाओं के भरपूर स्टॉक उपलब्ध हैं। इसका कारण स्वास्थ्य विभाग की मॉनिटरिंग के साथ ही अस्पताल प्रशासन की निगरानी भी है, जबकि दूसरी तरफ जीएमसीएच 32 में व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है।
अस्पताल की वेबसाइट पर 198 दवाओं की सूची
एक तरफ तो अस्पताल के जन औषधि केंद्र पर दवाओं की कमी होने के कारण मरीज लौटाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अस्पताल की वेबसाइट पर 198 तरह की जेनेरिक दवाओं की लिस्ट जारी की गई है। इससे साफ पता चल रहा है कि मरीजों के साथ प्रशासन की आंख में धूल झोंका जा रहा है।
यहां-यहां है जन औषधि केंद्र
पीजीआई न्यू ओपीडी, पीजीआई गोल मार्केट, जीएमएसएच 16 ओपीडी, जीएमसीएच 32 की ओपीडी।
मरीजों को नहीं मिल रहा लाभ
मरीजों को सस्ते इलाज का सपना तो दिखा दिया जाता है लेकिन सस्ती दवाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं। डॉक्टर और दुकानदारों की मिलीभगत के कारण मरीज अब भी ठगी के शिकार हो रहे हैं। प्रशासन को कड़े कदम उठाने चाहिए। देवेष कुमार, सेक्टर 34
आखिर ये कैसे हो सकता है कि एक अस्पताल में दुकान पर दवाओं के भरपूर स्टॉक हो और दूसरे से मरीज खाली लौट रहे हो। इसके पीछे लंबा खेल चल रहा है। प्रशासन को इस खेल का पर्दाफाश करना होगा, तभी मरीजों को लाभ मिलेगा। आरती शर्मा, मलोया
अस्पताल के जन औषधि केंद्र पर दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराना हमारी प्राथमिकता सूची में शामिल है। इस संबंध में चिकित्सा अधीक्षक संचालक को कई बार निर्देश भी जारी कर चुके हैं। दवाओं की उपलब्धता को लेकर अब सख्ती की जाएगी, ताकि मरीजों को सस्ते दर पर दवाइयां मिल सकें। -डॉ. एके अत्री, डायरेक्टर प्रिंसिपल जीएमसीएच 32