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मिसालः पीजीआई डायरेक्टर बनने के बाद आज तक एक भी छुट्टी पर नहीं गए प्रोफेसर जगतराम
Mon, 16 Dec 2019 03:52 PM IST
खुशबू गोयल
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 16 Dec 2019 03:52 PM IST
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डॉ. जगतराम
- फोटो : अमर उजाला
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पीजीआई चंडीगढ़ के डॉक्टरों को साल में दो बार छुट्टियां मिलती हैं। गर्मियों में एक महीने और सर्दियों में 15 दिन की। संस्थान के हर डॉक्टर छुट्टी लेते हैं। छुट्टी लेने के पीछे तर्क दिया जाता है कि संस्थान के डॉक्टर साल भर टीचिंग, ओपीडी और रिसर्च में जुटे रहते हैं। उन पर काम का बोझ ज्यादा होता है। छुट्टी लेना उनके अधिकार में भी शामिल है लेकिन पीजीआई डायरेक्टर प्रो. जगतराम छुट्टी नहीं लेते हैं। वे विंटर विकेशन के दौरान ड्यूटी पर रहते हैं। ओपीडी और ऑपरेशन थियेटर को अटेंड करते हैं।
पीजीआई में गर्मी व सर्दी की छुट्टी दो चरणों में होती है। आधे डॉक्टर पहले चरण में छुट्टी पर लेते हैं, जबकि आधे दूसरे चरण में ताकि पीजीआई का काम प्रभावित न हो और मरीजों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। पीजीआई में विंटर वेकेशन सात दिसंबर से शुरू हुई है, जो छह जनवरी तक जारी रहेगी। डॉक्टरों को छुट्टियां इसलिए दी जाती है ताकि वे अपने आपको थोड़ा फ्रेश फील कर सकें लेकिन प्रो. जगतराम छुट्टियों पर जाने की बजाय काम करते रहने से अपने आपको तरोताजा पाते हैं।
उनके पास सिर्फ पीजीआई नहीं बल्कि दूसरे संस्थान का भी चार्ज है। एडवांस आई सेंटर, रायबरेली एम्स, बठिंडा एम्स व बिलासपुर एम्स की जिम्मेदारी भी उनके पास है। एमसीआई के बोर्ड आफ गवर्नेंस के सदस्य भी हैं। प्रो. जगतराम ने बताया कि जब से वे डायरेक्टर के पद पर आएं हैं, तब से एक भी वेकेशन नहीं ली है। डायरेक्टर बने उन्हें तीन साल बीत चुके हैं। वे छुट्टी तभी लेते हैं, जब उन्हें इमरजेंसी की वजह से कहीं जाना पड़ जाए।
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पीजीआई में गर्मी व सर्दी की छुट्टी दो चरणों में होती है। आधे डॉक्टर पहले चरण में छुट्टी पर लेते हैं, जबकि आधे दूसरे चरण में ताकि पीजीआई का काम प्रभावित न हो और मरीजों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। पीजीआई में विंटर वेकेशन सात दिसंबर से शुरू हुई है, जो छह जनवरी तक जारी रहेगी। डॉक्टरों को छुट्टियां इसलिए दी जाती है ताकि वे अपने आपको थोड़ा फ्रेश फील कर सकें लेकिन प्रो. जगतराम छुट्टियों पर जाने की बजाय काम करते रहने से अपने आपको तरोताजा पाते हैं।
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उनके पास सिर्फ पीजीआई नहीं बल्कि दूसरे संस्थान का भी चार्ज है। एडवांस आई सेंटर, रायबरेली एम्स, बठिंडा एम्स व बिलासपुर एम्स की जिम्मेदारी भी उनके पास है। एमसीआई के बोर्ड आफ गवर्नेंस के सदस्य भी हैं। प्रो. जगतराम ने बताया कि जब से वे डायरेक्टर के पद पर आएं हैं, तब से एक भी वेकेशन नहीं ली है। डायरेक्टर बने उन्हें तीन साल बीत चुके हैं। वे छुट्टी तभी लेते हैं, जब उन्हें इमरजेंसी की वजह से कहीं जाना पड़ जाए।
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सुबह सवा सात बजे पहुंचते हैं पीजीआई
पद्मश्री प्रो. जगतराम समय के पाबंद माने जाते हैं। वे सुबह सवा सात बजे पीजीआई पहुंच जाते हैं। सबसे पहले डायरेक्टर ऑफिस जाते हैं। करीब आधा घंटा रुकने के बाद वे ओपीडी या ओटी पहुंचते हैं। वहां से काम निपटाने के बाद वे फिर से डायरेक्टर ऑफिस पहुंच जाते हैं। प्रो. जगतराम बताते हैं कि समय की कीमत उन्होंने एडवांस आई सेंटर में अपने सीनियर को देखते सीखा था।
पूर्व एचओडी प्रो. आमोद गुप्ता भी सुबह सात बजे एडवांस आई सेंटर में पहुंच जाया करते थे। इतने व्यस्त होने के बावजूद वे एक दिन की ओटी में 25-30 ऑपरेशन करते हैं। सरल व सौम्य भाषा के धनी प्रो. जगतराम बहुत ही निर्धन परिवार से ताल्लुक रखते हैं। मेडिकल के क्षेत्र में कैरियर बनाने वाले किसी भी छात्र के लिए प्रो. जगतराम रोल मॉडल से कम नहीं हो सकते।
छुट्टी लेना हर डॉक्टर का अधिकार है। डॉक्टरों को छुट्टी लेना भी चाहिए, क्योंकि वे साल भर रिसर्च और टीचिंग में रहते हैं। मैं वेकेशन नहीं लेता हूं। मुझे काम करने में ही मजा आता है।
- प्रो. जगतराम, डायरेक्टर पीजीआई
पूर्व एचओडी प्रो. आमोद गुप्ता भी सुबह सात बजे एडवांस आई सेंटर में पहुंच जाया करते थे। इतने व्यस्त होने के बावजूद वे एक दिन की ओटी में 25-30 ऑपरेशन करते हैं। सरल व सौम्य भाषा के धनी प्रो. जगतराम बहुत ही निर्धन परिवार से ताल्लुक रखते हैं। मेडिकल के क्षेत्र में कैरियर बनाने वाले किसी भी छात्र के लिए प्रो. जगतराम रोल मॉडल से कम नहीं हो सकते।
छुट्टी लेना हर डॉक्टर का अधिकार है। डॉक्टरों को छुट्टी लेना भी चाहिए, क्योंकि वे साल भर रिसर्च और टीचिंग में रहते हैं। मैं वेकेशन नहीं लेता हूं। मुझे काम करने में ही मजा आता है।
- प्रो. जगतराम, डायरेक्टर पीजीआई