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चंडीगढ़ः अब कैसे आएंगे पदक, न घोड़े हैं और न ही घुड़सवारी केंद्र, होनी है नेशनल चैम्पियनशिप
Sat, 27 Apr 2019 03:06 PM IST
खुशबू गोयल
संजीव पंगोत्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
संजीव पंगोत्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 27 Apr 2019 03:06 PM IST
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घुड़सवारी केंद्र
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काले और भूरे घोड़ों को अपनी चाबुक के इशारों पर दौड़ाने वाले बच्चे और बडे़ अब नया ठिकाना तलाश रहे हैं। चाबुक के इशारों पर घोड़ों को दौड़ाने वाले बच्चे और बड़े परेशान हैं क्योंकि राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं नजदीक हैं और ट्राइसिटी का एकमात्र घुड़सवारी केंद्र बंद होने के बाद उनको कोई विकल्प भी नजर नहीं आ रहा। हार्स राइडर्स को समझ नहीं आ रहा है कि नेशनल इक्वेस्ट्रियन चैंपियनशिप में अब सिर्फ चंद माह रह गए तो ऐसे में कहां जाएं।
चंडीगढ़ लेक क्लब के घुड़सवारी केंद्र में 22 से ज्यादा घोड़े थे। यहां पर 2009 से ओम प्रकाश हॉर्स राइडिंग के कोच थे। यहां से ऋित्विक ठाकुर, सूर्या ठाकुर, गुरबाज सिंह, विजय राणा भारतीय जूनियर टीम के सदस्य बन कर उभरे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए खेल रहे है। इस सेंटर पर तीन से सात साल के बच्चे शुरुआत में ट्रेंनिग के लिए आते थे। कुछ बच्चे घुड़सवारी में कैरियर बनाने यहां पर पहुंचते थे।
वहीं गर्मियों की छुट्टियों में 35-40 बच्चे इस सेंटर पर घुड़सवारी के गुर सीखने पहुंचते थे। इस सेंटर से कई राष्ट्रीय खिलाड़ी अपनी पहचान बना चुके हैं। गौरतलब है कि कई वर्ष से यूटी खेल विभाग के साथ चंडीगढ़ हॉर्स राइडिंग सोसायटी का यह ट्रेनिंग सेंटर एग्रीमेंट के अंतर्गत चल रहा था। एग्रीमेंट खत्म हुआ तो भी सोसाइटी ने यह जगह नही छोड़ी। मामला कोर्ट पहुंचा तो कोर्ट के आदेश के बाद हॉर्स राइडिंग सोसायटी को यह जगह खाली करनी पड़ी। अब यहां के घोड़े पंजाब में स्थित फार्म हाउस में चले गए।
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चंडीगढ़ लेक क्लब के घुड़सवारी केंद्र में 22 से ज्यादा घोड़े थे। यहां पर 2009 से ओम प्रकाश हॉर्स राइडिंग के कोच थे। यहां से ऋित्विक ठाकुर, सूर्या ठाकुर, गुरबाज सिंह, विजय राणा भारतीय जूनियर टीम के सदस्य बन कर उभरे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए खेल रहे है। इस सेंटर पर तीन से सात साल के बच्चे शुरुआत में ट्रेंनिग के लिए आते थे। कुछ बच्चे घुड़सवारी में कैरियर बनाने यहां पर पहुंचते थे।
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वहीं गर्मियों की छुट्टियों में 35-40 बच्चे इस सेंटर पर घुड़सवारी के गुर सीखने पहुंचते थे। इस सेंटर से कई राष्ट्रीय खिलाड़ी अपनी पहचान बना चुके हैं। गौरतलब है कि कई वर्ष से यूटी खेल विभाग के साथ चंडीगढ़ हॉर्स राइडिंग सोसायटी का यह ट्रेनिंग सेंटर एग्रीमेंट के अंतर्गत चल रहा था। एग्रीमेंट खत्म हुआ तो भी सोसाइटी ने यह जगह नही छोड़ी। मामला कोर्ट पहुंचा तो कोर्ट के आदेश के बाद हॉर्स राइडिंग सोसायटी को यह जगह खाली करनी पड़ी। अब यहां के घोड़े पंजाब में स्थित फार्म हाउस में चले गए।
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कर्नल कूल और रंगीला की मस्ती थी खूब
इस सोसायटी में दो घोड़े कर्नल कूल और रंगीला की मस्ती देखने को मिलती थी। हॉर्स राइडिंग सेंटर बंद हुआ है तब से कर्नल कूल, रंगीला सहित कई अन्य घोड़ों को देखने को लोग तरस गए है। लेक स्पोर्ट्स कांप्लेक्स पर पिछले कई सालों से हॉर्स राइडिंग सीखने व वाले लोग ट्राइसिटी से पहुंचते थे।
बादल पर सवार होते थे पाटिल
हॉर्स राइडिंग सेंटर में कई बडे़ और नामी चेहरों का आना जाना लगा रहता था। इनमें पंजाब के पूर्व राज्यपाल शिवराज पाटिल भी अक्सर पहुंचते थे। उनको बादल नाम केघोड़े से काफी लगाव था। वह इस पर सवार होकर यहां पर शान से घुड़सवारी का मजा उठाते थे। एक घंटे से अधिक समय तक वह घुड़सवारी किया करते थे।
अस्तबल में रखा जाता था घोड़ों का ख्याल
यहां पर रेबों, रंगीला रेंज, ठकीला, रॉयल फ्लेम, कर्नल कूल, बादल,मैरी मोनार्च, लिली, गोल्ड़ी लॉक्स नाम से लंबी कद काठी वाले घोड़े रहते थे। गर्मियों से इन्हें बचाने केलिए खासतौर पर कूलर की हवा दी जाती थी। इन घोड़ों के लिए अस्तबल बनाए गए थे। जहां पर उनकी देखभाल केलिए कर्मचारी भी मौजूद रहते थे।
बादल पर सवार होते थे पाटिल
हॉर्स राइडिंग सेंटर में कई बडे़ और नामी चेहरों का आना जाना लगा रहता था। इनमें पंजाब के पूर्व राज्यपाल शिवराज पाटिल भी अक्सर पहुंचते थे। उनको बादल नाम केघोड़े से काफी लगाव था। वह इस पर सवार होकर यहां पर शान से घुड़सवारी का मजा उठाते थे। एक घंटे से अधिक समय तक वह घुड़सवारी किया करते थे।
अस्तबल में रखा जाता था घोड़ों का ख्याल
यहां पर रेबों, रंगीला रेंज, ठकीला, रॉयल फ्लेम, कर्नल कूल, बादल,मैरी मोनार्च, लिली, गोल्ड़ी लॉक्स नाम से लंबी कद काठी वाले घोड़े रहते थे। गर्मियों से इन्हें बचाने केलिए खासतौर पर कूलर की हवा दी जाती थी। इन घोड़ों के लिए अस्तबल बनाए गए थे। जहां पर उनकी देखभाल केलिए कर्मचारी भी मौजूद रहते थे।