{"_id":"668de3571a9be047b80115e6","slug":"no-hassle-of-registration-no-waiting-for-hours-treatment-done-at-home-chandigarh-news-c-16-pkl1049-464182-2024-07-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh News: पंजीकरण का चक्कर, न घंटों का इंतजार... घर बैठे हो गया इलाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh News: पंजीकरण का चक्कर, न घंटों का इंतजार... घर बैठे हो गया इलाज
विज्ञापन
चंडीगढ़। पीजीआई में इलाज के लिए मरीज घंटों लाइन में खड़े रहते हैं। धक्का-मुक्की झेलते हैं ताकि बेहतर इलाज मिल सके। अब पीजीआई के ईएनटी विभाग के विशेषज्ञों ने मरीजों को राहत देने के लिए इसका बेहतर उपाय तलाश लिया है।
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के निर्देश पर विभाग के विशेषज्ञों ने बहरेपन की जांच के लिए ऑनलाइन तकनीक विकसित की है। इसके तहत दो वर्षों के इस प्रोजेक्ट में 500 लोगों की लॉइ लाइन ही हियरिंग टेस्ट की गई। इतना ही नहीं उन 500 में से गंभीर पाए गए 115 मरीजों में हियरिंग एड इंप्लांट किया गया। यह प्रोजेक्ट सिर्फ चंडीगढ़ ही नहीं देशभर के लिए खास है क्योंकि पहली बार ऑनलाइन माध्यम से जांच कर मरीजों का सफल इलाज किया गया है।
पहली बार हिंदी में जांच की सुविधा : ऑनलाइन माध्यम से मरीजों की जांच करने वाले ईएनटी विभाग के डॉ. नूरैन आलम ने बताया कि यह प्रोजेक्ट इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार इसमें हिंदी भाषा को माध्यम बनाया गया है। जांच में अब तक अंग्रेजी के शब्दों का प्रयोग किया जाता था, जिसे समझना सभी के लिए आसाना नहीं था। डॉ. नूरैन ने बताया कि इसमें 1 से 9 तक के अंकों में से किन्हीं तीन को अलग-अलग फ्रीक्वेंसी पर लेकर साउंड के साथ मरीज की जांच की जाती है। इसके आधार पर यह तय होता है कि व्यक्ति को हियरिंग लॉस है या नहीं है या फिर किस स्तर का हियरिंग लॉस है। इस आधार पर वेबसाइड विकसित कर इंग्लिश की जगह हिंदी को माध्यम के रूप में शामिल किया गया, जिससे कम पढ़े-लिखे लोग भी इसका लाभ ले सकें।
विज्ञापन
विज्ञापन
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के निर्देश पर विभाग के विशेषज्ञों ने बहरेपन की जांच के लिए ऑनलाइन तकनीक विकसित की है। इसके तहत दो वर्षों के इस प्रोजेक्ट में 500 लोगों की लॉइ लाइन ही हियरिंग टेस्ट की गई। इतना ही नहीं उन 500 में से गंभीर पाए गए 115 मरीजों में हियरिंग एड इंप्लांट किया गया। यह प्रोजेक्ट सिर्फ चंडीगढ़ ही नहीं देशभर के लिए खास है क्योंकि पहली बार ऑनलाइन माध्यम से जांच कर मरीजों का सफल इलाज किया गया है।
विज्ञापन
पहली बार हिंदी में जांच की सुविधा : ऑनलाइन माध्यम से मरीजों की जांच करने वाले ईएनटी विभाग के डॉ. नूरैन आलम ने बताया कि यह प्रोजेक्ट इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार इसमें हिंदी भाषा को माध्यम बनाया गया है। जांच में अब तक अंग्रेजी के शब्दों का प्रयोग किया जाता था, जिसे समझना सभी के लिए आसाना नहीं था। डॉ. नूरैन ने बताया कि इसमें 1 से 9 तक के अंकों में से किन्हीं तीन को अलग-अलग फ्रीक्वेंसी पर लेकर साउंड के साथ मरीज की जांच की जाती है। इसके आधार पर यह तय होता है कि व्यक्ति को हियरिंग लॉस है या नहीं है या फिर किस स्तर का हियरिंग लॉस है। इस आधार पर वेबसाइड विकसित कर इंग्लिश की जगह हिंदी को माध्यम के रूप में शामिल किया गया, जिससे कम पढ़े-लिखे लोग भी इसका लाभ ले सकें।
विज्ञापन