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डाॅग बाइट के पीड़ितों को मुआवजा कब: हाईकोर्ट के आदेशों पर बनी कमेटी बैठक कर रही... पीड़ित इंतजार
Thu, 19 Sep 2024 03:29 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 19 Sep 2024 03:29 PM IST
सार
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने नवंबर 2023 में गाय, बैल, गधे, कुत्ते, नीलगाय, भैंस और अन्य जंगली जानवरों के हमले या काटने पर प्रशासन की तरफ से पीड़ित को मुआवजा देने के आदेश जारी किए थे।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने नवंबर-2023 में कुत्तों व अन्य कुछ लावारिस जानवरों के काटने पर पीड़ितों को मुआवजा देने के आदेश जारी किए थे। आदेश के करीब सात महीने बाद डीसी की अध्यक्षता में कमेटी बनाई जिसकी दो बैठकें भी हुईं, लेकिन आज तक पीड़ितों को मुआवजा नहीं मिला। अधिकारी नियम-कानूनों के जाल में फंसे हैं। आज कमेटी की तीसरी बैठक होगी। उम्मीद है कि इस बैठक में फैसला हो जाएगा कि पीड़ितों को कब से मुआवजा देना है।
यह तय है कि हाईकोर्ट के आदेशानुसार, डॉग बाइट पीड़ितों को मुआवजा देना है लेकिन अब तक के पीड़ितों को मुआवजा देना है, इसे लेकर कमेटी की तरफ से स्थानीय प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा गया था। इसके अलावा कई केसों में पीड़ितों के पास डीडीआर की कॉपी नहीं थी लेकिन कमेटी ने मुआवजा देने के लिए जो नियम तय किए थे, उसमें डीडीआर की कॉपी अनिवार्य रखी थी। पहले लोगों को इसकी जानकारी नहीं थी इसलिए भी कमेटी ने स्थानीय प्रशासन से पूछा था कि ऐसे केसों का क्या किया जाए। स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि इस संबंध में कमेटी को खुद ही फैसला लेना चाहिए।
बैठक में मुख्य रूप से दो मुद्दों पर फैसला लिया जाएगा। पहला कि कब से मुआवजा दिया जाना है और दूसरा कि पुराने जिन केसों में लोगों के पास डीडीआर की कॉपी नहीं है, उनका क्या करना है। बता दें कि एमओएच विभाग के पास 100 से ज्यादा आवेदन आ चुके हैं। आवेदनों को डॉक्टर भी देख चुके हैं और सिफारिश कर चुके हैं। इसके अलावा डीसी ने मामले में एक सब-कमेटी का भी गठन किया है ताकि आवेदनों पर जल्द फैसला लिया जा सके।
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अदालत ने डीसी को अवमानना का नोटिस जारी किया, जिसके बाद कमेटी बनी। डीसी की अध्यक्षता में बनी कमेटी में एसपी, संबंधित एरिया के एसडीएम, एसटीए के सचिव, जीएमएसएच-16 के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट सदस्य हैं और नगर निगम के अतिरिक्त या संयुक्त आयुक्त को कन्वीनर बनाया गया है। जरूरत के अनुसार डीसीएफ (वाइल्ड लाइफ), नगर निगम के बीएंडआर के एक्सइन, एनिमल हसबेंडरी के संयुक्त निदेशक व अन्य सदस्यों की भी मदद ली जा सकती है। जांच के बाद चार महीने के अंदर मुआवजे की राशि पीड़ित के बैंक खाते में जारी किया जाएगा।
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यह तय है कि हाईकोर्ट के आदेशानुसार, डॉग बाइट पीड़ितों को मुआवजा देना है लेकिन अब तक के पीड़ितों को मुआवजा देना है, इसे लेकर कमेटी की तरफ से स्थानीय प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा गया था। इसके अलावा कई केसों में पीड़ितों के पास डीडीआर की कॉपी नहीं थी लेकिन कमेटी ने मुआवजा देने के लिए जो नियम तय किए थे, उसमें डीडीआर की कॉपी अनिवार्य रखी थी। पहले लोगों को इसकी जानकारी नहीं थी इसलिए भी कमेटी ने स्थानीय प्रशासन से पूछा था कि ऐसे केसों का क्या किया जाए। स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि इस संबंध में कमेटी को खुद ही फैसला लेना चाहिए।
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बैठक में मुख्य रूप से दो मुद्दों पर फैसला लिया जाएगा। पहला कि कब से मुआवजा दिया जाना है और दूसरा कि पुराने जिन केसों में लोगों के पास डीडीआर की कॉपी नहीं है, उनका क्या करना है। बता दें कि एमओएच विभाग के पास 100 से ज्यादा आवेदन आ चुके हैं। आवेदनों को डॉक्टर भी देख चुके हैं और सिफारिश कर चुके हैं। इसके अलावा डीसी ने मामले में एक सब-कमेटी का भी गठन किया है ताकि आवेदनों पर जल्द फैसला लिया जा सके।
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चार महीने के अंदर पीड़ितों को देना है मुआवजा
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने नवंबर 2023 में गाय, बैल, गधे, कुत्ते, नीलगाय, भैंस और अन्य जंगली जानवरों के हमले या काटने पर प्रशासन की तरफ से पीड़ित को मुआवजा देने के आदेश जारी किए थे। इसके लिए कमेटी बनाने के आदेश दिए थे लेकिन प्रशासन ने सात महीने तक कमेटी का गठन नहीं किया।अदालत ने डीसी को अवमानना का नोटिस जारी किया, जिसके बाद कमेटी बनी। डीसी की अध्यक्षता में बनी कमेटी में एसपी, संबंधित एरिया के एसडीएम, एसटीए के सचिव, जीएमएसएच-16 के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट सदस्य हैं और नगर निगम के अतिरिक्त या संयुक्त आयुक्त को कन्वीनर बनाया गया है। जरूरत के अनुसार डीसीएफ (वाइल्ड लाइफ), नगर निगम के बीएंडआर के एक्सइन, एनिमल हसबेंडरी के संयुक्त निदेशक व अन्य सदस्यों की भी मदद ली जा सकती है। जांच के बाद चार महीने के अंदर मुआवजे की राशि पीड़ित के बैंक खाते में जारी किया जाएगा।