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सैनिक आईटीआई पर फैसला लटका और स्टाफ के रोजगार पर संकट छाया, 31 को हो जांएगे सेवामुक्त
Tue, 30 Jul 2019 09:19 AM IST
खुशबू गोयल
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 30 Jul 2019 09:19 AM IST
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फाइल फोटो
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हरियाणा में सैनिक आईटीआई के भविष्य पर सरकार ने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है। जिसके चलते आईटीआई स्टाफ के रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है। जल्द सरकार ने इस पर फैसला नहीं लिया तो 31 जुलाई से प्रदेश कीसभी सातों सैनिक आईटीआई बंद हो जाएंगे। संबंधित विभाग पहले ही स्टाफ को सेवामुक्त होने का नोटिस थमा चुका है।
हरियाणा राज्य सैनिक बोर्ड के अंतर्गत सन 1971 के भारत-पाक युद्ध में शहीद परिवारों की विधवाओं व उनके बच्चों को स्वावलंबी बनाने केउद्देश्य से वर्ष 1972 में तत्कालीन हरियाणा सरकार ने सैनिक आईटीआई की शुरुआत की थी। पंचूकला, रोहतक, झज्जर, चरखी दादरी, रेवाड़ी, जींद व हिसार में चल रहे हैं। जबकि यमुनानगर के छछरौली स्थित सेंटर पहले ही बंद कर दिया गया था। अब शेष सातों आईटीआई को भी बंद करने की प्रक्रिया चल रही है।
बंद करने पर विभाग ने भेजे अपने कमेंट्स
इन सैनिक आईटीआई को क्यों बंद किया जा रहा है, इसे लेकर सरकार ने संबंधित विभाग से कमेंट्स भी मांगे थे। विभाग की ओर से बंद करने के कारणों से सरकार को अवगत करवाया है। सूत्रों के अनुसार विभाग ने बताया कि इन आईटीआई सेंटरों केजो वर्तमान हालात है, उससे इन आईटीआई को नेशनल काउंसिल फॉर वोकेशनल ट्रेनिंग की मान्यता नहीं दिलवाई जा सकती। दूसरा, इन आईटीआई सेंटरों में छात्रों की संख्या भी कम है और इंफ्रास्ट्रक्चर भी नहीं है। विभाग के इन कमेंट्स के बाद अब हरियाणा सरकार को फैसला लेना था।
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हरियाणा राज्य सैनिक बोर्ड के अंतर्गत सन 1971 के भारत-पाक युद्ध में शहीद परिवारों की विधवाओं व उनके बच्चों को स्वावलंबी बनाने केउद्देश्य से वर्ष 1972 में तत्कालीन हरियाणा सरकार ने सैनिक आईटीआई की शुरुआत की थी। पंचूकला, रोहतक, झज्जर, चरखी दादरी, रेवाड़ी, जींद व हिसार में चल रहे हैं। जबकि यमुनानगर के छछरौली स्थित सेंटर पहले ही बंद कर दिया गया था। अब शेष सातों आईटीआई को भी बंद करने की प्रक्रिया चल रही है।
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बंद करने पर विभाग ने भेजे अपने कमेंट्स
इन सैनिक आईटीआई को क्यों बंद किया जा रहा है, इसे लेकर सरकार ने संबंधित विभाग से कमेंट्स भी मांगे थे। विभाग की ओर से बंद करने के कारणों से सरकार को अवगत करवाया है। सूत्रों के अनुसार विभाग ने बताया कि इन आईटीआई सेंटरों केजो वर्तमान हालात है, उससे इन आईटीआई को नेशनल काउंसिल फॉर वोकेशनल ट्रेनिंग की मान्यता नहीं दिलवाई जा सकती। दूसरा, इन आईटीआई सेंटरों में छात्रों की संख्या भी कम है और इंफ्रास्ट्रक्चर भी नहीं है। विभाग के इन कमेंट्स के बाद अब हरियाणा सरकार को फैसला लेना था।
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वित्तमंत्री काआश्वासन, मगर कार्रवाई का इंतजार
पिछले दिनों सैनिक आईटीआई स्टाफ का प्रतिनिधिमंडल चंडीगढ़ में वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु से मिला था। स्टाफ सदस्यों ने वित्तमंत्री को बताया गया था कि उन्हे सरकारी कर्मचारी की तर्ज पर पूरा वेतन व भत्ते मिलते हैं और अधिकतर स्टाफ की उम्र लगभग पचास व उससे अधिक है, ऐसे में यदि उनका रोजगार छिन जाता है, तो उनके लिए अपना परिवार का गुजर-बसर भी मुश्किल हो जाएगा।
उन्होेंने मांग की थी कि यदि सैनिक आईटीआई बंद की जानी है तो छात्रों व स्टाफ को अन्य सरकारी आईटीआई में मर्ज किया जाए, तो स्टाफ का रोजगार बच सके। वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने उन्हें रोजगार संरक्षण और फैसले पर पुनर्विचार का आश्वासन दिया था, मगर अभी तक सरकार इस पर फैसला नहीं ले पाई है।
उन्होेंने मांग की थी कि यदि सैनिक आईटीआई बंद की जानी है तो छात्रों व स्टाफ को अन्य सरकारी आईटीआई में मर्ज किया जाए, तो स्टाफ का रोजगार बच सके। वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने उन्हें रोजगार संरक्षण और फैसले पर पुनर्विचार का आश्वासन दिया था, मगर अभी तक सरकार इस पर फैसला नहीं ले पाई है।