मोदी-बादल में नो टॉकिंग, आखिर क्या मायने इसके?
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हरियाणा के नए मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के शपथ ग्रहण समारोह में नरेंद्र मोदी और प्रकाश सिंह बादल के बीच संवाद न होने चर्चा का विषय बना हुआ है।
किसी को भी यह बात हजम नहीं हो रही है। समारोह में दोनों की मुलाकात बस अभिवादन तक ही सिमट गई। आखिर इस तरह संवाद न होने के क्या मायने हो सकते हैं?
हरियाणा में इनेलो का साथ देने के बावजूद पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के शपथ ग्रहण समारोह में भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से ज्यादा सम्मान किया गया। समारोह में उन्हें खास तौर से बुलाया गया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एयरपोर्ट पर रिसीव करने वे भी गए थे, लेकिन वहां पर दोनों के बीच केवल रस्मी बातचीत हुई। समारोह स्थल पर प्रधानमंत्री न तो बादल से मिले और न ही दोनों के बीच किसी तरह का संवाद हुआ।
सभी मंत्रियों ने उनसे मुलाकात की, मोदी ने नहीं
दूसरी ओर, नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह और आडवाणी से पहले बादल समारोह स्थल पर पहुंच गए थे। बादल के मंच पर पहुंचने पर सभी नेताओं ने खड़े होकर उनका स्वागत किया। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने उनका स्वागत खड़े होकर हाथ मिलाकर किया।
बादल के एक तरफ पंजाब के गवर्नर शिवराज पाटिल और दूसरी तरफ छतीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह को बैठाया गया था। बादल ने शाह के बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से बात की।
गृह मंत्री राजनाथ सिंह व भाजपा के तमाम वरिष्ठ नेता बादल से मिलने के लिए उनके पास पहुंचे। बादल से उनकी सीट पर मिलने के लिए मुरली मनोहर जोशी, नड्डा, धनखड़, कैप्टन अभिमन्यु भी पहुंचे।
हुड्डा आए नहीं, निमंत्रण ही नहीं मिला
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा हरियाणा की नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में नहीं पहुंचे। उन्होंने न्योता न मिलने की बात कही, जिस पर भाजपा का कहना है कि हुड्डा को निमंत्रण न मिलना हास्यास्पद है।
प्रदेश प्रवक्ता वीरकुमार यादव ने कहा कि कार्यक्रम भाजपा द्वारा नहीं बल्कि राजभवन की ओर से आयोजित किया गया था। हमें पुख्ता जानकारी है कि सभी 90 विधायकों एवं लोकसभा व राज्यसभा सांसदों को आमंत्रित किया गया था।
यादव ने कहा कि जब अभय चौटाला और जयप्रकाश कार्यक्रम में शिरकत कर सकते हैं तो भला राजभवन को हुड्डा से क्या नाराजगी थी। समारोह के लिए निमंत्रण नहीं मिला।
अगर मिलता तो जाने या नहीं जाने के बारे में सोचता। उम्मीद है, भाजपा प्रदेश का विकास जारी रखेगी और जनता की उम्मीदों पर खरा उतरेगी।
रोहतक निवास स्थान पर भेजा गया था निमंत्रण
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा को शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित न किए जाने के मामले में सरकार के एक प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि रोहतक के उपायुक्त कार्यालय की ओर से हुड्डा और सांसद दीपेंद्र हुड्डा को उनके निवास पर 25 अक्तूबर को निमंत्रण-पत्र भेजा गया था। उपायुक्त कार्यालय के कर्मचारी ने निमंत्रण दोपहर एक बजे दिया था।
शपथ ग्रहण समारोह में हुड्डा के लिए मंच पर एक कुर्सी अलग से आरक्षित भी की गई थी। चंडीगढ एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए गणमान्य व्यक्तियों के नामों की सूची में हुड्डा का नाम भी शामिल था। उधर, भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने शपथ ग्रहण समारोह के बाद कहा कि उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया था।
हुड्डा को निमंत्रण न मिलना हास्यास्पद
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के शपथ ग्रहण समारोह में भाग नहीं लेने के संबंध में भाजपा नेताओं का कहना है कि उन्हें निमंत्रण न मिलना हास्यास्पद है।
प्रदेश प्रवक्ता वीरकुमार यादव ने कहा कि शपथ ग्रहण कार्यक्रम भाजपा द्वारा नहीं बल्कि राजभवन की ओर से आयोजित किया गया था। हमें पुख्ता जानकारी है कि शपथ ग्रहण समारोह के लिए हरियाणा के सभी 90 विधायकों एवं लोकसभा व राज्यसभा सांसदों को आमंत्रित किया गया था।
यादव ने व्यंग्यात्मक लहजे में पूछा कि जब नेता विधायक दल इनेलो के अभय चौटाला और कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय विधायक जयप्रकाश सूचना के उपरांत कार्यक्रम में शिरकत कर सकते हैं तो भला राजभवन को हुड्डा से क्या नराजगी थी कि निर्वतमान एवं कार्यकारी मुख्यमंत्री को निमंत्रण पत्र ही नहीं भेजा।
यादव के अनुसार हुड्डा ने कार्यक्रम का बहिष्कार कर न केवल लोकतांत्रिक परंपराओं को तोड़ा है बल्कि राजभवन जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है।